पुराने अंदाज में धमाकेदारी वापसी: नए चैट 'शेखर टुनाइट' में नजर आएंगे शेखर, अपने इस चर्चित शो पर क्या बोले?

डिजिटल डेस्क, मुंबई। शेखर सुमन एक बार फिर अपने पुराने तेवर और बेबाक अंदाज के साथ लौट आए हैं। 90 के दशक में ‘मूवर्स एंड शेकर्स’ जैसे चर्चित शो से टीवी की दुनिया में अलग पहचान बनाने वाले शेखर सुमन अब नए चैट शो ‘शेखर टुनाइट’ के जरिए दर्शकों से जुड़ रहे हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में शेखर सुमन ने सोशल मीडिया ट्रोलिंग, राजनीति से दूरी, हिंदी भाषा की गिरती स्थिति और इंडस्ट्री के बदलते माहौल पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने साफ कहा कि वक्त भले बदल गया हो, लेकिन सवाल पूछने का उनका अंदाज नहीं बदलेगा।
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लोगों की मर्जी से शो शुरू
साल 1997 में मैंने मूवर्स एंड शेकर्स शुरू किया था ,इतने साल हो गए लेकिन यह शो लोग भूल नहीं पाए हैं। देश ही नहीं विदेश में भी जहां मैं गया लोग मुझसे यही पूछते थे कि आप कब फिर से टॉक शो शुरू करेंगे? लेकिन मैं तैयार नहीं था। पर अब अचानक से सोचा कि शुरू करते हैं। दर्शकों से और मेहमानों से समाज और मुद्दों पर चर्चा करते हैं इसलिए शेखर टुनाइट शुरू कर रहा हूं।
सोशल मीडिया बेरहम है
शेखर सुमन कहते हैं, मुझे लोग मेरी मुखर भाषा और बेबाकी के लिए जानते हैं उस शैली को मैं कैसे छोड़ सकता हूं। मुझे पता है साल 1997 से अब तक बहुत कुछ बदल चुका है। लोग जजमेंटल हो गए हैं, धैर्य समाप्त होता जा रहा है। सोशल मीडिया बेरहम हो चुकी है यह तो ट्रोल करने से ईश्वर को भी नहीं छोड़ते तो मुझे क्या बख्शेंगे ? वह सुनते नहीं सिर्फ बोलना जानते हैं। मैं शब्दों का प्रयोग करने से पहले थोड़ी और सतर्कता रखूंगा लेकिन मैं सवाल भले ही कितने कड़वे हो उसे पूछने से पीछे नहीं हटूंगा। सवाल तो मेरे बेबाक ही होंगे, उसी तेवर के साथ होंगे जो मेरी खासियत रही है।
राजनीति मेरा मिजाज नहीं है
मैं इस समय जो शो कर रहा हूं वह मुझे इजाजत नहीं देता कि मैं राजनीति में कदम रखूं। मैं जनता का प्रतिनिधि बनकर जिनसे सवाल पूछूंगा उनके ही खेमे में कैसे शामिल हो जाऊं ? राजनीति मेरे मिजाज के बाहर की चीज है। हालांकि कुछ लोगों ने मुझे राजनीति में धकेलने की कोशिश की लेकिन मैं अब उससे बाहर आ गया हूं। मैं स्पष्ट हूं कि यह मेरे बस के बाहर है, इसलिए किनारा कर लिया।
मेरी आजादी मुझे चाहिए
मुझे अपनी स्वतंत्रता से बेहद प्यार है ,मैं किसी दायरे में बांधना नहीं चाहता। इसलिए मैं किसी चैनल से भी नहीं जुड़ा क्योंकि शो के दौरान मैं किसी भी पार्टी या व्यक्ति विशेष से प्रभावित कोई बायस्ड शो नहीं बना सकता इसलिए मैंने अपना खुद का यूट्यब चैनल खोलकर उस पर शो कर रहा हूं। मेरे शो को लेकर कुछ चैनलवालों ने शर्तें रखीं थी कि कुछ बातें आपको पोलिटिकली करेक्ट बोलनी होगी। मैंने मना कर दिया और कहा कि मैं तो कोई बदलाव नहीं करूंगा आप में हिम्मत नहीं है तो रहने दीजिए। राजनीति से दूरी बनाने के बाद मैंने खुद इस शो को अपने दम पर शुरु किया है जिससे विचारों और अभिव्यक्ति की आजादी मेरे पास ही हो। आजकल लोगों की बातों को दबाया जा रहा है उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा है मुझे उनकी आवाज बनना है।
हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अंग्रेजी का सिस्टम
मुझे हमेशा से इस बात की दिक्कत रही है कि आज के युवा हिंदी जानते ही नहीं। नए एक्टर हिंदी का उच्चारण नहीं कर पाते। फिल्म के डायलॉग बोलने के लिए रोमन में स्क्रिप्ट पढ़ते हैं। हिंदी फिल्म के लिए अवार्ड शो में अंग्रेजी में भाषण देते हैं। कहां से सुधरेगी हिंदी ? इसलिए मैंने शेखर अकडेमी की शुरुआत की। मुझे लगा इतने सालों में जो सीखा है कम से कम युवा बच्चों को कुछ तो सीखा पाऊं। इसलिए शेखर अकेडमी में स्टूडियो, डबिंग, स्क्रिप्टिंग सबके लिए एक खास सेशन बनाया गया है। जहां हिंदी भाषा के लेखन, पठन और उसके सही उच्चारण पर काम होता है।
मैं खुद इन्हे पढ़ाऊंगा
कई बच्चे रोजाना मुंबई में आते हैं और सही दिशा ना मिलने के कारण भटक जाते हैं। उन बच्चों को मैं यहां खुद सिर्फ पढ़ाऊंगा ही नहीं बल्कि इस शहर में आपको कैसे रहना है, इंडस्ट्री में कैसे काम करना है वह भी बताऊंगा जिससे उन्हें सही मार्गदर्शन मिल सके। एक्टिंग एक ऐसा हुनर जो आपके भीतर होता है इसकी डिग्री आप नहीं ले सकते तो बच्चों के 5 साल इसके पीछे क्यों बर्बाद हो? उनके भीतर के हुनर को सिर्फ तराशने में इतने साल नहीं लगने चाहिए। इसलिए हमने कई छोटे- छोटे कोर्स रखे हैं। सीखो और अपने-अपने काम पर लगो।
Created On :   18 May 2026 6:18 PM IST












