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Samsung ने लॉन्च किए Galaxy Book Go और Book Go 5G लैपटॉप, जानें कीमत और खूबियां

Samsung ने लॉन्च किए Galaxy Book Go और Book Go 5G लैपटॉप, जानें कीमत और खूबियां

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दक्षिण कोरिया की दिग्गज टेक कंपनी Samsung (सैमसंग) ने Galaxy Book (गैलेक्सी बुक) सीरीज का नया लैपटॉप लॉन्च कर दिया है। यह लैपटॉप G के साथ ही 5G वेरिएंट में लॉन्च किया गया है। इनके नाम क्रमश: Galaxy Book Go (गैलेक्सी बुक गो) और Galaxy Book Go 5G (गैलेक्सी बुक गो 5जी) हैं। बता दें कि इससे पहले कंपनी ने Galaxy Book सीरीज में तीन नए लैपटॉप Galaxy Book, Galaxy Book Pro और Galaxy Book Pro 360 को लॉन्च किया था। 

बात करें नए Galaxy Book Go की, तो यह लैपटॉप काफी स्लिम और हल्का है। देखने में यह एप्पल के MacBook की तरह नजर आता है। इस लैपटॉप को दो वर्जन वाई-फाई और LTE में बाजार में उतारा है। इस लैपटॉप में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 7c प्रोसेसर मिलता है। वहीं Galaxy Book Go 5G लैपटॉप सेकेंड जनरेशन क्वालकॉम स्नैपड्रैगन प्रोसेसर को सपोर्ट करता है। 

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कीमत 
Samsung Galaxy Book Go के वाई-फाई ओनली वेरिएंट की शुरुआती कीमत 349 डॉलर (करीब 25,600 रुपए) है। Galaxy Book Go लैपटॉप केवल एक सिल्वर कलर ऑप्शन में आएगा। सैमसंग के अनुसार, यह लैपटॉप इस महीने से कुछ चुनिंदा बाजारों में खरीदने के लिए उपलब्ध होगा और जल्द ही दुनिया भर में उपलब्ध होगा। हालांकि Galaxy Book GO 5G लैपटॉप की कीमत और उपलब्धता की कोई जानकारी कंपनी द्वारा नहीं दी गई है। 

Samsung Galaxy Book Go: स्पेसिफिकेशन्स 
डिस्प्ले कैमरा
 
Galaxy Book Go लैपटॉप में 14 इंच का TFT फुल HD+ डिस्प्ले दिया गया है। य​ह डिस्प्ले 1920x1080 पिक्सल का रेजॉल्यूशन देगा। यह स्लिम बेजल्स के साथ आता है। इसमें 180 डिग्री फोल्डिंग हिंज का इस्तेमाल किया गया है। लैपटॉप में वीडियो कॉलिंग के लिए एक HD कैमरा दिया गया है। 

प्लेटफार्म/ रैम/ प्रोसेसर/ स्टोरेज
यह लैपटॉप Window 10 Home/Pro पर काम करेगा। इसमें 4GB और 8GB LPDDR4x रैम विकल्प मिलता है। बेहतर परफोर्मेंस के लिए इस लैपटॉप में ऑक्टा-कोर क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 7c Gen 2 SoC प्रोसेसर दिया गया है। वहीं ग्राफिक्स के लिए इसमें अड्रेनो GPU सपोर्ट​ दिया गया है। गैलेक्सी बुक गो लैपटॉप में 64GBऔर 128GB eUFS स्टोरेज विकल्प भी है। इसमें दी गई इंटरनल स्टोरेज को माइक्रो एसडी कार्ड की मदद से बढ़ाया जा सकेगा।

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बैटरी
पावर बैकअप के लिए Galaxy Book Go लैपटॉप में 42.3Wh बैटरी दी गई है, जो यूएसबी टाइप-सी पोर्ट के साथ 25W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट के साथ आएगा। 

कनेक्टिविटी
Galaxy Book Go लैपटॉप में LTE, Wi-Fi 5 और Bluetooth 5.1. का सपोर्ट मिलेगा। इसमें एक USB 2.0 टाइप-A पोर्ट, दो USB 3.2 टाइप-C पोर्ट, एक नैनो सिम कार्ड का स्लॉट दिया गया है। इसके अलावा एक  हेडफोन जैक दिया गया है। Galaxy Book Go लैपटॉप में डॉल्बी एटमॉस, मिलिट्री ग्रेड ड्यूराबिलिटी मिलती है।

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क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

क्या है ड्रोन ? देश की सुरक्षा के लिए कितना घातक हो सकता है, जानें सबकुछ

डिजिटल डेस्क, श्रीनगरजम्मू कश्मीर की सीमा के आसपास ड्रोन की हलचलें लगातार तेज होती जा रही हैं। इसके बाद भारत ने भी ये मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया है कि ड्रोन की इस तरह की गतिविधियां न सिर्फ भारत बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुरक्षा के दृष्टिकोण से घातक साबित हो सकती हैं। इस हमले के बाद से भारत में ड्रोन के इस्तेमाल को लेकर बहस छिड़ गई है। इस रिपोर्ट में जानिए आखिर ड्रोन है क्या और यह कैसे ऑपरेट होते हैं? इसके इस्तेमाल और इससे क्या नुकसान हो सकता है और देश में ड्रोन्स को उड़ाने को लेकर सरकार की क्या गाइडलाइन्स हैं।

ड्रोन क्या होता है?
ड्रोन्स को UAV यानी Unmanned aerial vehicles या RPAS यानी Remotely Piloted Aerial Systems भी कहा जाता है। आम बोल चाल वाली भाषा में इसे मिनी हैलिकॉप्टर भी कहते हैं। अक्सर शादी के दौरान फोटोग्राफी के लिए आपने ड्रोन का इस्तेमाल होते हुए देखा होगा। यह एक ऐसा यंत्र है, जिसमें एचडी कैमरे, ऑनबोर्ड सेंसर और जीपीएस लगा होता है। इसे नियंत्रित करने के लिए एक सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है। इसके चारों और 4 रोटर्स लगे होते हैं, जिनकी मदद से यह आसमान में ऊंचा उड़ने में सक्षम होता है। एक ड्रोन का वजन 250 ग्राम से लेकर 150 किलोग्राम से भी ज्यादा हो सकता है।

ड्रोन को उड़ाने के लिए सॉफ्टवेयर, जीपीएस और रिमोट की आवश्यकता होती है। रिमोट के जरिए ही ड्रोन को ऑपरेट और कंट्रोल कर सकते हैं। ड्रोन पर लगे रोटर्स की गति को रिमोट की जॉयस्टिक के जरिए कंट्रोल किया जाता है। वहीं, जीपीएस दिशाएं बताता हैं, जीपीएस दुर्घटना होने से पहले ही ऑपरेटर को चेतावनी भेज देता है। 

ड्रोन हमले किस तरह से हो सकते हैं?
ड्रोन का इस्तेमाल कई देशों की सेनाएं कर रही हैं, क्योंकि ये साइज में छोटे होते हैं इसलिए रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आ पाते हैं, साथ ही दुर्गम इलाकों में भी गुपचुप घुसपैठ कर सकते हैं। यही कारण है कि सेना में इनका इस्तेमाल बढ़ने लगा है।ड्रोन हमले दो प्रकार से संभव हैं। एक तरीका ये है कि ड्रोन में हथियार या विस्फोटक लगा दिए जाते हैं और ड्रोन इन हथियारों या विस्फोटक को लक्ष्य पर ड्रॉप कर देता है। ड्रोन से हमले का दूसरा तरीका है ड्रोन को खुद ही एक विस्फोटक में बदल दिया जाए। 

कितने घातक हो सकते हैं ड्रोन हमले?
ये ड्रोन के प्रकार और पेलोड पर निर्भर है। पेलोड मतलब ड्रोन कितना वजन अपने साथ लेकर उड़ सकता है। ड्रोन की पेलोड क्षमता जितनी ज्यादा होगी वो अपने साथ उतनी ज्यादा मात्रा में विस्फोटक सामग्री लेकर उड़ सकता है। अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन अपने साथ 1700 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम हैं।

ड्रोन से अबतक के बड़े हमले
2020 में अमेरिका ने ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी को मार गिराया था। इससे पहले 2019 में यमन के हूती विद्रोहियों ने साऊदी अरब की अरामको ऑयल कंपनी पर ड्रोन हमला किया था। पाकिस्तान के वजीरिस्तान में 2009 के दौरान एक ड्रोन हमले में 60 लोग मारे गए थे।

देश में ड्रोन्स के इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइन्स 
देश में नागरिक उड्डयन मंत्रालय(Ministry of Civil Aviation) ने ड्रोन उड़ाने पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। ड्रोन के वजन और साइज के अनुसार इन प्रतिबंधों को कई वर्ग में बांटा गया है।

1.नेनो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए लाइसेंस की आवश्यकता नहीं पड़ती।

2.माइक्रो ड्रोन्स- इसको उड़ाने के लिए UAS Operator Permit-I से अनुमति लेनी पड़ती है और ड्रोन पायलट को SOP(Standard operating procedure) का पालन करना होता है। 

इनसे बड़े ड्रोन उड़ाने के लिए डीजीसीए से परमिट(लाइसेंस ) की आवश्यकता होती है। अगर आप किसी प्रतिबंधित जगह पर ड्रोन उड़ाना चाहते हैं तो इसके लिए भी आपको डीजीसीए से अनुमति लेनी पड़ेगी। बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाना गैरकानूनी है और इसके लिए ड्रोन ऑपरेटर पर भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।

ड्रोन उड़ाने के लिए प्रतिबंधित जगह

  • मिलिट्री एरिया के आसपास या रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाका।
  • इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 5 किलोमीटर और नेशनल एयरपोर्ट के 3 किलोमीटर का दायरा।
  • इंटरनेशनल बॉर्डर के 25 किलोमीटर का दायरा ।
  • इसके अलावा ड्रोन की कैटेगरी को मद्देनजर रखते हुए इन्हें कितनी ऊंचाई तक उड़ाया जा सकता है वो भी निर्धारित है।

ड्रोन उड़ाने के लिए जरूरी हैं लाइसेंस
नैनो ड्रोन्स को छोडकर किसी भी तरह के ड्रोन्स को उड़ाने के लिए लाइसेंस या परमिट की जरूरत पड़ती है।ड्रोन उड़ाने के लिए लाइसेंस दो कैटेगरी के अंतर्गत दिए जाते हैं, जिसमें पहला है स्टूडेंट रिमोट पायलट लाइसेंस और दूसरा है रिमोट पायलट लाइसेंस।इन दोनों लाइसेंस को प्राप्त करने के लिए ड्रोन ऑपरेटर की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 65 साल होनी चाहिए। लाइसेंस के लिए ऑपरेटर कम से कम 10वीं पास या 10वीं क्लास के बराबर उसके पास किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से डिग्री होना अति आवश्यक हैं।आवेदन करने वाले व्यक्ति को डीजीसीए स्पेसिफाइड मेडिकल एग्जामिनेशन भी पास करना जरूरी है। लाइसेंस के लिए बैकग्राउंड भी चेक होता है।

जुर्माने का प्रावधान

  • बिना लाइसेंस उड़ाने पर 25000 रुपए का जुर्माना।
  • नो-ऑपरेशन जोन यानी प्रतिबंधित क्षेत्र में उड़ान भरने पर 50000 रुपए का जुर्माना।
  • ड्रोन का थर्ड पार्टी बीमा ना होने पर 10000 रुपए का जुर्माना लग सकता है।