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कोरोना वायरस: क्या आप जानते है "कैसा है आपका एंटीवायरस”?

April 03rd, 2020 19:34 IST
कोरोना वायरस: क्या आप जानते है "कैसा है आपका एंटीवायरस”?

डिजिटल डेस्क, भोपाल। विषाणु का अंग्रेजी शब्द वाइरस का शाब्दिक अर्थ विष होता है। विषाणु अकोशिकीय अतिसूक्ष्म जीव हैं जो केवल जीवित कोशिका में ही वंश वृद्धि कर सकते हैं। ये शरीर के बाहर तो ये मृत-समान होते हैं परंतु शरीर के अंदर जीवित हो जाते हैं। जिस प्रकार एक वायरस आपके कंप्यूटर में पहुंचकर इसकी पूरी प्रोग्रामिंग को खराब कर सकता है और ना केवल कंप्यूटर का सॉफ्टवेयर प्रभावित होता है बल्कि हार्डवेयर भी ठीक से काम नहीं कर पाता। क्योंकि कोरोनावायरस की अभी तक कोई दवाई नहीं बनी है। आपको आपका प्राकृतिक एंटीवायरस प्रणाली मजबूत करना होगी। आइए इन सवालों के द्वारा जानने का प्रयास करें कि आपका इम्यूनिटी सिस्टम कैसा है?

  • क्या आप दिनभर थकान का अनुभव करते हैं? 
  • क्या तनाव एवं चिंता ज्यादा महसूस करते हैं? 
  • क्या आपको सर्दी एवं जुकाम अक्सर होता रहता है? 
  • क्या आपकी पाचन क्रिया सामान्य है अर्थात सम्यक भोजन को पचाने में परेशानी तो नहीं होती है? 
  • क्या आपकी त्वचा पर सामान्य चोट एवं घावों को भरने में बहुत अधिक समय लगता है? 
  • क्या आपके शरीर का तापमान सामान्य से थोड़ा ज्यादा अक्सर रहता है?

इन सवालों के अतिरिक्त सबसे महत्वपूर्ण है आप स्वयं कैसा महसूस करते हैं क्योंकि आपको आप से बेहतर और कोई नहीं समझ सकता। किसी परिस्थिति में चिंता एवं तनाव ना लें एवं हर संभव प्रयास करें, एक स्वस्थ, स्वच्छ एवं सकारात्मक जीवन जीने का। दैनिक जीवन में निम्नलिखित बदलाव करके आप अपनी नकारात्मक ऊर्जा को सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित कर सकते हैं और यही सकारात्मक ऊर्जा आपके एंटीवायरस सिस्टम को मजबूत बनाती है।

  • हमें शारीरिक व मानसिक दोनों रूप से स्वस्थ रहना है। 
  • शारीरिक स्वच्छता आपकी जीवन शैली का एक हिस्सा है कृपया इस समय सावधानीपूर्वक इसका ध्यान रखें। 
  • हमारे एंटीवायरस को मजबूत बनाने में मानसिक स्वास्थ्य बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
  • एन एल पी (न्यूरो लिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग) के अनुसार हर एक शब्द जो आप अपने जीवन में उपयोग करते हैं उसकी संरचना के मुताबिक प्रोग्राम आपकी मेमोरी का हिस्सा होता है और जितनी बार आप इस शब्द को दोहराते हैं उतनी बार वह प्रोग्राम एवं उसकी दृढ़ता प्रगाढ़ होती जाती है। 
  • जितने  ज्यादा नकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल आपअपने जीवन में करते हैं इससे संबंधित नकारात्मक रासायनिक परिवर्तन आपके मस्तिष्क में होते हैं जो आपके एंटीवायरस को कमजोर करते हैं। 
  • नकारात्मक विचार एवं उनका दोहराव नकारात्मक शब्दोंको जन्म देते हैं आपके नकारात्मक शब्द , नकारात्मक कार्यों में परिवर्तित हो जाते हैं और इन नकारात्मक कार्यों के दोहराव से पूरा व्यक्तित्व नकारात्मक हो सकता है और आप नकारात्मक ऊर्जा के स्रोत बन जाते हैं। 
  • नकारात्मक ऊर्जाको सकारात्मक ऊर्जा में परिवर्तित की जा सकती है लेकिन इसके लिए आपको होश पूर्वक प्रयास करना होगा और उसकी शुरुआत आप किसी भी स्तर से कर सकते हैं चाहे वह सकारात्मक विचार हो या शब्द या कार्य अथवा सकारात्मक संगति। 
  • क्योंकि जिस तरह का नक्शा आप अपने मस्तिष्क मैं बनाए हुए हैं वह वास्तविकता नहीं है जीवन परिवर्तनशील है और इस परिवर्तन के अनुसार आपको सकारात्मक ऊर्जा के साथ होश पूर्वक स्वयं को परिवर्तित करना है तभी आप अपना एंटीवायरस अर्थात संपूर्ण इम्यून सिस्टम अति शीघ्र बेहतर कर सकते हैं। 
  • सकारात्मक शब्दों के साथ आपका हौसला, आपका आत्मविश्वास एवं चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है कृपया नाही कभी स्वयं के लिए एवं दूसरों के लिए नकारात्मक विचार एवं नकारात्मक शब्दों का प्रयोग करें क्योंकि दूसरे से ज्यादा यह आपके स्वयं के स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है।

दूसरों के द्वारा दिए गए प्रतिपुष्टि (फीडबैक ) का किस तरह से आपके शरीर पर प्रभाव पड़ता है इससे संबंधित अनेक  प्रयोग किए गए। एक बार एक कॉलेज के प्रोफेसर पर यह प्रयोग किया गया। 15 लोगों को इसमें शामिल किया गया ,जिसमें उनके परिवार के लोग भी इसमें शामिल थे। सुबह जैसे ही वे अपने बिस्तर से उठे उनकी श्रीमती ने कहा क्या आपका स्वास्थ्य खराब है? मैं बोले नहीं मैं स्वस्थ हूं। जैसे ही नहा धोकर वे  निकले ,उनके नौकर ने कहा मालिक ऐसा लगता है कि आप को बुखार है, इस बार वे थोड़ा घबराए, पर उन्होंने कहा नहीं मैं ठीक हूं।जैसे  ही घर से बाहर निकले वैसे ही उनके माली नेउन्हें स्पर्श किया और कहां अरे आपको तो तेज बुखार है किंतु इस बार वे और ज्यादा परेशान हुए। इस तरह घर से लेकर कॉलेज तक तकरीबन सभी 15 लोगों ने उनके स्वास्थ्य के बारे में उन्हें डराया और यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वाकई में उन्हें बुखार है, नतीजा सामने था शाम तक उन्हें 102 डिग्री बुखार चढ़ गया था। आप समझ सकते हैं की किस तरह नकारात्मक प्रतिपुष्टि(फीडबैक ) अर्थात नकारात्मक शब्द एवं नकारात्मक विचार आपके शरीर में नकारात्मक रासायनिक परिवर्तन कर देते हैं क्योंकी आपका शरीर आपके मस्तिष्क का अनुसरण करता है नकारात्मक ऊर्जा आपके एंटीवायरस को कमजोर कर सकती है और आपके बीमार होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। 

अतः मेरा आपसे निवेदन है कृपया जहां तक हो सके सकारात्मक विचार ,सकारात्मक भावना एवं सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा अपने जीवन में करें ,इनकी मदद से आप अपने अंदर के एंटीवायरस सिस्टम को बहुत मजबूत कर सकते हैं।


धन्यवाद
पंकज राय
(अंतर्राष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर ,लेखकएवं मनोवैज्ञानिक )
M  +919407843111
 

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