comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

कोरोना मरीजों के शवों से भर गया दिल्ली का पंजाबी बाग श्मशान घाट, वीडियो वायरल

June 12th, 2020 00:00 IST
 कोरोना मरीजों के शवों से भर गया दिल्ली का पंजाबी बाग श्मशान घाट, वीडियो वायरल

हाईलाइट

  • कोरोना मरीजों के शवों से भर गया दिल्ली का पंजाबी बाग श्मशान घाट, वीडियो वायरल

नई दिल्ली, 11 जून (आईएएनएस)। दिल्ली में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सरकारी आंकड़े जहां 984 मौतों की बात करते हैं तो एमसीडी का कहना है कि दो हजार से ज्यादा मौतें हुईं हैं। बहरहाल, इन दिनों दिल्ली में श्मशान घाटों पर कोरोना से मरने वालों के शवों का ढेर लग रहा। श्मशान घाटों के हालात भयावह हैं।

कोविड मरीजों के लिए रिजर्व साउथ एमसीडी के पंजाबी बाग श्मशान घाट रोजाना शवों से भर जाता है। जिससे शवों के अंतिम संस्कार के लिए परिवार वालों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। गुरुवार को पंजाबी बाग श्मशान घाट में दर्जनों शवों के एक साथ अंतिम संस्कार का वीडियो भी वायरल हुआ।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने इस वीडियो को ट्वीट किया। जिसमें लाइन से एक साथ दर्जनों शव जलते दिख रहे हैं। वीडियो में एक व्यक्ति कहता है कि यहां शमशान घाट भर गया है और शवों को जलाने की जगह नहीं है। बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने वीडियो को ट्वीट कर कहा, पंजाबी बाग शमशान घाट, दिल्ली.. यहां विज्ञापन लगवाइए केजरीवाल जी। सबसे ज्यादा लोग यहीं आ रहे हैं आजकल।

उधर, दिल्ली में मौतों को लेकर कांग्रेस नेता अजय माकन का रुख भी केजरीवाल सरकार को लेकर हमलावर है। अजय माकन ने दिल्ली में देश में सबसे ज्यादा मृत्यु दर होने की आशंका जताई है। अजय माकन ने ट्वीट कर कहा, कुल 2098 का कोविड प्रोटोकॉल के तहत दिल्ली में अंतिम संस्कार हुआ। मगर सरकार सिर्फ 984 मौत दिखा रही है। साउथ डीएमसी में 1080, नार्थ डीएमसी 976, ईस्ट डीएमसी में 42 लोगों की मौत हुई। इस प्रकार दिल्ली में मृत्यु दर 6.4 प्रतिशत है। जो कि देश में सबसे ज्यादा है या फिर गुजरात के बाद सबसे ज्यादा है।

बता दें कि पंजाबी बाग श्मशान घाट को सिर्फ कोरोना से मरने वालों के अंतिम संस्कार के लिए रिजर्व किया गया है। सोमवार को ही एमसीडी ने इस बारे में सकरुलर जारी कर लोगों की हिदायत दी थी कि सामान्य मौत वाले शवों का यहां पर अंतिम संस्कार न किया जाए। ऐसे में यहां अंतिम संस्कार के लिए ज्यादा संख्या में शवों के पहुंचने से दिनों दिन हालात के भयावह होने का अंदाजा लगता है।

कमेंट करें
6r5u1
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।