मिडिल ईस्ट संघर्ष: फ्रांस ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा में शामिल होने के लिए भेजा प्रस्ताव, G7 शिखर सम्मेलन में गहन मंथन की उम्मीद, इन मुद्दों पर भी हो सकती है चर्चा

फ्रांस ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा में शामिल होने के लिए भेजा प्रस्ताव, G7 शिखर सम्मेलन में गहन मंथन की उम्मीद, इन मुद्दों पर भी हो सकती है चर्चा
पश्चिम एशिया में लगातार तनाव गहराता हुआ दिखाई दे रहा है। इसकी वजह से दुनियाभर के लिए सबसे अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा संकट उत्पन हो गया है।

डिजिटल डेस्क, पेरिस। पश्चिम एशिया में लगातार तनाव गहराता हुआ दिखाई दे रहा है। इसकी वजह से दुनियाभर के लिए सबसे अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा संकट उत्पन हो गया है। यहां पर सुरक्षा बनाए रखने के लिए फ्रांस ने भारत को एक महत्वपूर्ण समुद्री सुरक्षा पहल में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा है। उम्मीद लगाई जा रही है कि भारत के प्रधानमंत्री इस प्रस्ताव पर जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से विस्तार से चर्चा कर सकते हैं।

इस प्रस्ताव का मकसद?

जानकारी के मुताबिक, फ्रांस अपने कई साझेदार देशों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट में मुफ्त जहाजों की आवाजाही और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पहल कर रहा है। ये पहले एक बहुराष्ट्रीय बताई जा रही है। इसमें भारत के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। इस समुद्री रास्ते को दुनिया का सबसे अहम व्यापार मार्ग माना जाता है। यहां से अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा निकलता है।

PM मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच बातचीत

समाचार न्यूज 'द हिंदू' ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया कि पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के बीच बातचीत हुई है। इस दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, सैन्य उपकरणों की खरीद, रणनीतिक साझेदारी और मिडिल ईस्ट के ताजा हालत पर चर्चा की गई। दो महीने के सीजफायर के बाद अमेरिका और ईरान के बीच हमले देखने को मिले थे। इसकी वजह से खाड़ी क्षेत्र में वैश्विक सुरक्षा की चिंता बन गई है।

मिडिल ईस्ट के मुद्दे पर विशेष बैठक

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि जी-7 सम्मेलन के अलावा मिडिल ईस्ट के मसले पर भी एक विशेष बैठक भी होने वाली है। इसमें भारत, अमेरिका, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात देशों के नेता शामिल होने की संभावना है। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा पर विस्तार से चर्चा हो सकती है। हालांकि, भारत ने भेजे गए इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है और न ही किसी ऐसे प्रस्ताव का जिक्र किया है।

Created On :   12 Jun 2026 6:16 PM IST

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