इजरायल में इस साल आम चुनाव: क्या नेतन्याहू सत्ता में कर रहे वापसी? राजनीति जानकारों और PM के समर्थकों का रिएक्शन

क्या नेतन्याहू सत्ता में कर रहे वापसी? राजनीति जानकारों और PM के समर्थकों का रिएक्शन
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायल से बड़ी खबर मिली है। बताया जा रहा है कि देश में चुनाव को लेकर अभियान जोरों पर है।

डिजिटल डेस्क, यरूशलम। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच इजरायल से बड़ी खबर मिली है। बताया जा रहा है कि देश में चुनाव को लेकर अभियान जोरों पर है। ऐसे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का सफर खत्म हो सकता है। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इजरायल में राजनीतिक उठापटक, बलबदल, जातीय आधार पर नागरिकों से खुली अपील की जा रही है। यह भी माना जा रहा है कि 7 अक्टूबर, 2023 में आई प्राकृतिक आपदा और उसके बाद युद्धों के कारणु पैदा हुए हालात से जनता जवाबदेही तय करने की बात कही जा रही है।

लोगों में इस वजह से नाराजगी

इजरायल में आम चुनाव अक्टूबर, 2026 में होने की संभावना है। बेंजामिन के समर्थन के एक धड़ा कहता है कि देश की सुरक्षा के लिए पहली पंसद मौजूदा पीएम है, लेकिन उनका ये दावा मजबूत नजर नहीं आ रही है। इसकी वजह से लेबनान, गाजा और ईरान से ढाई सालों में हुए आक्रमक हमलें बताए जा रहे हैं। जिस कारण लोगों में नाराजगी है। इन हमलों का नतीजा कुछ भी नहीं निकला और बेहद थका देने वाले रहे हैं।

इजराय का उत्तरी हिस्से तबाह

इस युद्धों की वजह से इजरायल रक्षा बल यानी IDF पर काफी प्रेशर पड़ा है। ईरान ने लगातार लेबनाना बॉर्डर पर के पास मिसाइलों से हमले किए हैं, जिस वजह से ज्यादातर उत्तरी हिस्से तबाह हुए हैं। वहीं, ईरान में इजरायल की कार्रवाइयों से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। ईरान पहले से अब परमाणु कार्यक्रम को लेकर ज्यादा ताकतवर दिखाई दे रहा है।

पॉलिटिक्स एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

दिस वीक इन एशिया ने ने इजरायल-अमेरिका जियो-पॉलिटिक्स एक्सपर्ट्स शाइल बेन एफ्रैम के हवाले से बताया कि इजरायल कभी भी इनता असुरक्षित महसूस नहीं किया है। वह हमेशा सुरक्षा की कसौटी पर खरा उतरा है। यही इजराय का मकसद रहा है। ऑपिनियन पोल्स बताते हैं कि नेतन्याहू को दोबारा चुनाव नहीं लड़ना चाहिए।

इसके साथ ही बताया गया है कि नेतन्याहू पर भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के भी आरोप लगे हैं। इन्हीं मुद्दों पर विपक्ष हमलावर बना हुआ है। इनके अलावा 8 अक्टूबर हुई हुई सिक्योरिटी इंटेल फेल होने से नेतन्याहू की छवि खराब हुई है।

खुद को बता रहे सुरक्षा मसीहा

एक्सपर्ट्स बताते हैं कि प्रधानमंत्री खुद को सुरक्षा के मसीहा के रूप में बता रहे हैं। उनका मिशन सिर्फ ईरान को हराना रह गया है। लेकिन नॉर्थ इजरायल इसके लायक नहीं बचा है, क्योंकि तेहरान ने कई हमले मिडिल इजरायल पर भी किए हैं। सेना के पास बहुत काम और देश की कूटनीतिक अलग-थलग पड़ी हुई है।

नेतन्याहू की पॉलिसी पर चर्चा

नेतन्याहू की पॉलिसी पर लोग फूट डालो और राज करो के रूप में देख रहे हैं। इस प्रकार की रणनीतियां वोट दिलाने में तो खरी उतर सकती है, लेकिन सवाल भी है कि क्या अन्य गठबंधन बनाने में सफलता मिल सकती है?

ये गठबंधन सक्रिय

हाल ही में पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट ने येश अतीद पार्टी के नेता यायर लैपिड के साथ गठबंधन किया है। यह गठबंधन पहले पर रह चुका है, जिसने 2021 के मध्य से लेकर 2022 के आखिरी तक सत्ता को संभाली थी। यानी यह गठबंधन फिर से सक्रिय हो गया है। अब इस चुनाव में यह गठबंधन खुद को सरकार बनाने के तौर पर पेश कर रहा है। हालांकि, फिलहाल विपक्षी एकता मजबूती से नजर नहीं आ रही है। इजरायल में 120 सदस्यों वाली नेसेट है और सरकार बनाने के लिए किसी भी पार्टी को 3.25 प्रतिशत की न्यूनतम सीमा पार करनी होती है।

Created On :   22 May 2026 8:13 PM IST

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