नोबल के बाद दूसरा बड़ा सम्मान: भारत के प्रो. जैनेंद्र जैन को मिला फिजिक्स का वुल्फ प्राइज, ये सम्मान हासिल करने वाले बने पहले भारतीय

डिजिटल डेस्क, भोपाल। भारतीय भौतिकविद प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन को नोबेल प्राइज के बाद दूसरे सबसे बड़े सम्मान वुल्फ प्राइज से सम्मानित किया गया है। लोढ़ा थियोरेटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट' (LTPI) के फाउंडिंग डायरेक्टर प्रो जैन ने इतिहास रच दिया, क्योंकि इससे पहले किसी भारतीय को यह सम्मान नहीं मिला है। इजराइल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग ने यरूशलेम में आयोजित एक राजकीय समारोह में भौतिकी के क्षेत्र में दुनिया का प्रतिष्ठित वुल्फ प्राइज उन्हें सौंपा। यह पूरे भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
प्रोफेसर जैन ने साल 1989 में दुनिया के सामने 'कंपोजिट फर्मिओन्स' का कॉन्सेप्ट रखा। तब वे येल यूनिवर्सिटी में एक युवा शोधकर्ता थे। आज यह विचार मॉडर्न कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स का मुख्य केंद्र बन चुका है और 'क्वांटम कंप्यूटिंग' जैसे भविष्य के उभरते हुए क्षेत्रों को लगातार प्रभावित कर रहा है।
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वो राजस्थान के सांभर जिले में पले -बढ़े है, उनका जीवन संघर्षों से भरा रहा है। जयपुर फुट के सहारे राजस्थान के छोटे से कस्बे से उन्होंने यरूशलेम तक का सफर तय किया है। उन्होंने महाराजा कॉलेज जयपुर से पढ़ाई के बाद आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) और स्टोनी ब्रूक विश्व विद्यालय से डिग्रियां हासिल कीं। इसके बाद उन्होंने अमेरिका में एक बेहद प्रतिष्ठित शैक्षणिक करियर बनाया।
प्रो. जैन को यह सम्मान उनकी क्रांतिकारी खोज कंपोजिट फर्मिओन्स के लिए दिया है। इस थ्योरी ने क्वांटम दुनिया को लेकर इंसानी समझ को पूरी तरह बदल दिया और भौतिकी की सबसे कठिन पहेलियों में से एक 'फ्रैक्शनल क्वांटम हॉल इफेक्ट' को सुलझाया है।
साल 1978 से वुल्फ फाउंडेशन ने इस सम्मान की शुरुआत की थी। नोबेल पुरस्कार के बाद दूसरा सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है। फिजिस्क में अब तक वुल्फ प्राइज पाने वाले 27 वैज्ञानिक आगे चलकर नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं, इसी से इस पुरस्कार की अहमियत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
Created On :   19 Jun 2026 6:31 PM IST











