शिक्षक दिवस विशेष: कहीं दूध से सुधरी अटेंडेंस, कहीं गाने-डांस से बनी पढ़ाई आसान, तो कहीं AI-ड्रोन बने टीचर के नए साथी, इन 3 शिक्षकों ने बदल दिया पढ़ाने का तरीका

कहीं दूध से सुधरी अटेंडेंस, कहीं गाने-डांस से बनी पढ़ाई आसान, तो कहीं AI-ड्रोन बने टीचर के नए साथी, इन 3 शिक्षकों ने बदल दिया पढ़ाने का तरीका
विश्वविद्यालयों का काम सिर्फ यह पता लगाना नहीं है कि छात्र क्या जानते हैं, बल्कि यह भी देखना है कि वे उस ज्ञान का इस्तेमाल करके क्या कर सकते हैं। संस्थानों से हजारों छात्र अपने भविष्य की शुरुआत करते है, स्किल, क्रिएटिव तरीके से समस्या सुलझाने की क्षमता और प्रैक्टिकल अनुभव ही इंसान को सफल बनाते हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। एक अच्छा शिक्षक सिर्फ किताब का पाठ नहीं पढ़ाता, वह बच्चों की जरूरत को समझकर पढ़ाने का तरीका भी बदलता है। कोई शिक्षक बच्चों की सेहत को उनकी पढ़ाई से जोड़ता है, कोई पढ़ाई को खेल और गानों के जरिए आसान बनाता है, तो कोई स्कूल की कक्षा में AI, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी तकनीक पहुंचा देता है। शिक्षक दिवस पर मिलिए ऐसे ही तीन शिक्षकों से, जिन्होंने अपने-अपने तरीके से शिक्षा को नई दिशा देने की कोशिश की।

दूध के एक गिलास से बदली बच्चों की पढ़ाई

छत्तीसगढ़ की शिक्षिका सुनीता यादव ने देखा कि कई बच्चों की स्कूल में कम उपस्थिति और पढ़ाई में कम एकाग्रता की वजह सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि पोषण की कमी भी है। उन्होंने समस्या को समझा और 2023 में अपने स्कूल के बच्चों के लिए हर दिन एक गिलास दूध उपलब्ध कराने की पहल शुरू की।

लेकिन उनकी कोशिश सिर्फ पोषण तक सीमित नहीं रही। बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने के लिए उन्होंने शॉर्ट फिल्म, ऑडियो बुक, पॉडकास्ट और स्मार्ट क्लास जैसे तरीकों का इस्तेमाल किया। यानी बच्चों की जरूरत के हिसाब से पढ़ाई का तरीका बदला और सीखने को ज्यादा रोचक बनाने की कोशिश की।

गाने और डांस से सरकारी स्कूल में लौटी रौनक

बिहार के बांका की हेडमास्टर खुशबू कुमारी ने भी बच्चों के सामने आने वाली एक बड़ी समस्या को अलग नजरिए से देखा। छोटे बच्चों के लिए alphabet और basic concepts को सिर्फ किताबों से पढ़ना कई बार मुश्किल और उबाऊ हो सकता है।

उन्होंने पढ़ाई को मजेदार बनाने के लिए गाने, डांस, teaching aids और interactive methods का सहारा लिया। बच्चों को सिर्फ सुनने के बजाय बोलने, करने और बातचीत के जरिए सीखने का मौका मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरीके का असर स्कूल की उपस्थिति पर भी दिखा और attendance 90 फीसदी से ऊपर पहुंच गई।

AI, ड्रोन और रोबोटिक्स से सरकारी स्कूल में आया नया दौर

इन दोनों शिक्षकों की पहल जहां बच्चों की बुनियादी जरूरतों और सीखने के तरीके पर केंद्रित रही, वहीं मैसूर के सरकारी हाई स्कूल के शिक्षक मधुसुधन के. एस. ने तकनीक को ही कक्षा का हिस्सा बना दिया।

हिनकल स्थित सरकारी हाई स्कूल में उन्होंने AI tools, ड्रोन और रोबोटिक्स को बच्चों की learning से जोड़ा। उनका मकसद बच्चों को सिर्फ किताबों में तकनीक के बारे में पढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें तकनीक के साथ सीखने और उसे इस्तेमाल करने का अनुभव देना था।

सोचिए, जिस सरकारी स्कूल की कक्षा में बच्चे कभी सिर्फ किताबों और ब्लैकबोर्ड के जरिए पढ़ते थे, वहां अब वे AI, ड्रोन और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों से रूबरू हो रहे हैं। इससे बच्चों के लिए पढ़ाई सिर्फ परीक्षा पास करने का जरिया नहीं, बल्कि नई चीजें समझने, प्रयोग करने और सवाल पूछने का माध्यम बनती है।

मधुसुधन ने सिर्फ बच्चों तक ही तकनीक को सीमित नहीं रखा, बल्कि अभिभावकों को भी ट्रेनिंग दी। शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल की उनकी इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और उन्हें 2025 में Best Teacher Award से सम्मानित किया गया।

Created On :   4 Sept 2026 6:20 PM IST

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