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जम्मू-कश्मीर के 19 युवाओं को घर वापसी का इंतजार

May 13th, 2020 19:01 IST
 जम्मू-कश्मीर के 19 युवाओं को घर वापसी का इंतजार

हाईलाइट

  • जम्मू-कश्मीर के 19 युवाओं को घर वापसी का इंतजार

भोपाल, 13 मई (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के इंदौर की एक कोरियर कंपनी में काम करने वाले 19 युवा जम्मू-कश्मीर अपने घरों को वापस जाना चाहते है और वे इसके लिए पैदल चल पड़े हैं। उन्होंने लगभग 200 किलोमीटर का रास्ता तय भी कर लिया है। वर्तमान में भोपाल के पास रुके हैं। साथ ही उन्हें जम्मू भेजने के प्रयास हो रहे हैं।

कोरोना महामारी के चलते कामधंधे बंद हो गए हैं और कामगार अपने घरों को लौट रहे है। इंदौर की कोरियर कंपनी में काम करने वाले 19 युवाओं ने अपने घर की ओर पैदल चलना शुरू कर दिया है। इनके पास कोरियर कंपनी ने एक पत्र दिया है जिसमें सभी के नाम और अन्य ब्यौरा है।

इन 19 युवाओं में से एक रघुवीर ने आईएएनएस को बताया, कोरोना के कारण लॉकडाउन के बाद से वे इंदौर में ही थे। काम धंधा बंद होने के बाद उन्होंने जम्मू कश्मीर लौटने का मन बनाया है। इसी लिए इंदौर से पैदल निकले। विदिशा बायपास पर सामाजिक संगठन ने रोका और मदद का भरोसा दिलाया है। अगर बस आदि की व्यवस्था नहीं होती है तो पैदल ही चल देंगे।

सामाजिक कार्यकर्ता सीमा कुरुप का कहना है, इंदौर की कोरियर कंपनी में काम करने वाले 19 युवा जम्मू कश्मीर के रहने वाले हैं। ये लोग इंदौर से सड़क मार्ग से पैदल चलकर जम्मू की ओर बढ़ रहे थे। इन्हें विदिशा बायपास पर एक ढाबे पर रोका गया है। उनके खाने आदि का इंतजाम भी किया गया है।

सीमा के अनुसार उनकी भोपाल के प्रशासनिक अधिकारियों से इस संदर्भ में कोई बात नहीं हो पाई है, इन जम्मू कश्मीर युवाओं की सूचना ट्विटर के माध्यम से दी गई है। जम्मू कश्मीर के अधिकारियों से जरूर संवाद हुआ है। उधमपुर के जिलाधिकारी को युवाओं की ओर से आवेदन भेजा गया है, जिस पर उन्होंने मदद का भरोसा दिलाया है।

वहीं सूखी सेवनियां थाना क्षेत्र की प्रभारी शिवानी चतुर्वेदी ने आईएएनएस को बताया, जम्मू कश्मीर के युवाओं के उनके क्षेत्र में रुके होने की कोई सूचना नहीं है, फिर भी वे पता करा रही हैं।

ज्ञात हो कि राज्य सरकार की ओर से पूर्व में जम्मू -कश्मीर के छात्र और यहां नौकरी कर रहे लोगों को बसों के जरिए वापस भेजा गया है। वहीं राज्य सरकार ने यह तय किया है कि राज्य की सीमा में कोई भी पैदल नहीं चलेगा, उनको बस आदि की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। राज्य की सीमा के भीतर और दूसरे राज्य की सीमा तक उन्हें बस आदि के जरिए भेजा जाएगा।

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