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चीनी आक्रामकता का मुकाबला करने देशों ने समुद्री सहयोग के लिए हाथ मिलाया

June 22nd, 2020 21:00 IST
 चीनी आक्रामकता का मुकाबला करने देशों ने समुद्री सहयोग के लिए हाथ मिलाया

हाईलाइट

  • चीनी आक्रामकता का मुकाबला करने देशों ने समुद्री सहयोग के लिए हाथ मिलाया

नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। चीन पर कोरोनावायरस महामारी फैलाने को लेकर दुनियाभर के विभिन्न देशों ने सवाल खड़े किए हैं। चीन अब जमीन से लेकर समुद्र तक अपनी विस्तारवादी नीति के तहत इस मुद्दे से दुनिया का ध्यान भटकाने की पुरजोर कोशिशों में लगा हुआ है। ऐसे समय में दुनिया भर की ताकतें चीन का मुकाबला करने के लिए हाथ मिला रही हैं।

गलवान घाटी की घटना चीन की डराने की उसकी नीति का सिर्फ एक ऐसा उदाहरण है और समुद्र में आक्रामक कदम पहले ही पड़ोसियों के लिए एक चेतावनी संकेत के रूप में सामने आ गए हैं। इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि चीन का आक्रामक राष्ट्रवाद और सैन्य विस्तारवाद एक वास्तविकता है, जो कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के नेताओं द्वारा जताई गई नीतियों से प्रेरित है।

एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा, इन नीतियों के परिणामस्वरूप यह धारणा बन गई है कि बीजिंग अपने द्वारा बनाए गए कानून के अलावा किसी अन्य कानून का सम्मान नहीं करता है। अगर वह किसी की संपत्ति को हथियाने का कोई तरीका ढूंढ़ ले, तो वह उनके संपत्ति अधिकारों का भी सम्मान नहीं करता।

अधिकारी ने कहा कि चीन किसी सीमा या बॉर्डर का भी सम्मान नहीं करता है और अगर उसे किसी क्षेत्र पर कब्जा करने का तरीका दिख जाए तो वह संबंधित देश को डरा-धमका कर अपनी विस्तारवादी नीति पर काम करना शुरू कर देता है।

यह रवैया दक्षिण चीन सागर (एससीएस) का दावा करने के लिए स्व-घोषित नाइन-डैश लाइन द्वारा समुद्री क्षेत्र में चित्रित किया गया है। जिस तरह से चीन ने एक अंतराष्र्ट्ीय न्यायाधिकरण के फैसले को नजरअंदाज किया, जिसने दक्षिण चीन सागर में उसके क्षेत्राधिकार के दावों को खारिज कर दिया था, वह केवल उसके अहंकार को ही प्रदर्शित करता है।

अधिकारी ने कहा कि किसी के द्वारा सहानुभूति केवल चीनी लोगों के लिए तो हो सकती है, जो सिर्फ शांति और स्थिरता चाहते हैं, मगर वहां की पार्टी की विस्तारवादी नीतियों के साथ ऐसा नहीं हो सकता है।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की विस्तारवादी कार्रवाइयों ने फ्रांस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान सहित प्रमुख समुद्री शक्तियों को कड़े कदम उठाने के लिए उत्तेजित किया है, ताकि वे भारत-प्रशांत क्षेत्र में नेविगेशन की स्वतंत्रता और समावेशी नियम-आधारित व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में सहयोग बढ़ा सकें।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में क्षेत्र के लिए एक सामान्य नियम-आधारित व्यवस्था, जो सभी के लिए समान रूप से लागू होनी चाहिए, उसके लिए आवश्यक क्षेत्रीय स्तर पर बहुपक्षीय सहयोग को बनाए रखने में मदद करने के लिए और अधिक देशों के इन प्रयासों में शामिल होने की संभावना है।

एक शीर्ष भारतीय खुफिया अधिकारी ने कहा कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के इस तरह के व्यवहार से ही भारत के हालिया समुद्री कार्यक्रमों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला है।

वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ चीन की हालिया कार्रवाई स्पष्ट रूप से भारत को यह याद दिलाने के लिए है कि उसकी उत्तरी सीमाओं पर उसके पड़ोसी के साथ एक टकराव है।

यह निश्चित रूप से भारत को चीन के प्रति एक संतुलन विकसित करने में प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के साथ संरेखित करेगा और इस दिशा में भारत के कदम सही दिशा में हैं।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेता को इस बात को ध्यान में रखना होगा कि नई दिल्ली न केवल चीन के अप्रत्याशित व्यवहार के मद्देनजर भारत के समुद्री हितों को स्पष्ट करने के लिए और अधिक तैयार हो गई है, बल्कि इसे अतिरिक्त क्षेत्रीय शक्तियों के साथ तेजी से संरेखित करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यह चीज चीन के दीर्घकालिक हितों में नहीं है।

चीन को यह एहसास होना चाहिए कि दुनिया अब उसकी गैर-कानूनी आक्रामकता को हराने के लिए एकजुट हो रही है।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।