दैनिक भास्कर हिंदी: बोहरा समुदाय की मुस्लिम महिलाओं ने पीएम मोदी से लगाई ये गुहार

November 21st, 2017

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के पीएम नरेंद्र मोदी से मुस्लिम महिलाओं ने एक बड़ी गुहार लगाई है। दाऊदी बोहरा समुदाय से आने वाली कई महिलाओं ने खतना को गैर कानूनी करार देने के लिए मदद देने को कहा है। महिलाओं ने खतना (फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन) को लेकर मोदी जी से गुहार लगाई है कि ऐसी दर्द भरी प्रथा को बंद करा दिया जाए। इसके लिए महिलाओं ने एक कैंपेन भी लॉन्च किया है। बता दें कि 19 नवंबर को वर्ल्ड डे फॉर प्रीवेंशन ऑफ चाइल्ड अब्यूस के अवसर पर वीस्पीकआउट बैनर तले इस ऑनलाइन कैंपेन की शुरुआत की गई है।

 

पोस्को एक्त के तहत अपराध माना जाए खतना

देश में खतना किए जाने के खिलाफ कोई कानून नहीं है। हर मुस्लिम महिला को इससे गुजरना पड़ता है। हालांकि अन्य देशों में भी लड़कियों का खतना किया जाता है, लेकिन वह केवल एक निवारण के तौर पर किया जाता है। जानकारी के अनुसार, बोहरा समुदाय की महिलाओं ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर कहा कि "केंद्र सरकार को राज्य सरकारों और बोहरा सय्यदनाओं को एक एडवाइजरी जारी करनी चाहिए जिसमें कहा जाए कि खतना करना आईपीसी और पोस्को एक्त के तहत अपराध है।" खतना भी पोस्को एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न को ही परिभाषित करता है।

 

बोहरा समुदाय की महिलाएं आईं आगे

हालांकि इस मुद्दे को महिला एंव बाल विकास मंत्रालय भी एक बार पहले रख चुका है। तब यह वादा भी किया गया था कि देश में खतना प्रथा को बैन कर देनी चाहिए। इसके बाद भी कई जगहों और मुस्लिम समुदायों में इस पर कोई अम्ल नहीं किया गया। मंत्रालय के वादे केवल वादे रह गए जिस कारण बोहरा समुदाय की महिलाओं को इसके खिलाफ आगे आते हुए कैंपेन चलाने की जरूरत पड़ी है।

 
 
इस पत्र में लिखा गया है कि खतना यौन हिंसा का ही एक रूप है जो कि एक व्यस्क महिला या लड़की के जीवन में गहरा असर डालता है। इस हानिकारक प्रथा को अब पूरी तरह खत्म कर दिए जाने का समय आ गया है। ऐसी प्रथा युवतियों को सिर्फ दर्द देने का काम करती है। इस अभियान में शामिल एक महिला मासूमा रानाल्वी ने कहा कि मोदी जी से गुहार है कि इस प्रथा को गैरकानूनी करार देते हुए खत्म किया जाए।