दैनिक भास्कर हिंदी: पंजाब को ड्रग मुक्त करने सिद्धू का अजीब आइडिया, बोले- अफीम को लीगल करो

October 2nd, 2018

हाईलाइट

  • पंजाब सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने अफीम की खेती का समर्थन किया
  • सिद्धू ने अफीम को हेरोइन से बेहतर बताते हुए इसे कानूनी मान्यता दिए जाने की मांग की
  • सिद्धु की इस बात का सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी समर्थन कर दिया

डिजिटल डेस्क, चंडीगढ़। उड़ते पंजाब को जमीन पर लाने के लिए अब तक की सभी सरकारों ने तमाम प्रयास किए हैं, मगर अब तक परिणाम शून्य ही नजर आते हैं। पंजाब को नशा मुक्त करने के लिए अब कांग्रेस सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने अफीम की खेती का समर्थन किया है। सिद्धू की इस बात का सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी समर्थन कर दिया है। बता दें कि सिद्धू ने अफीम को हेरोइन से बेहतर बताते हुए इसे कानूनी मान्यता दिए जाने की मांग की है।

अफीम की खेती को लीगल करने की मांग करते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि अफीम हेरोइन से बेहतर होती है और पंजाब सरकार को इसे प्रदेश में कानूनी मान्यता दे देनी चाहिए। इस दौरान सिद्धू ने सार्वजनिक रूप से यह भी कहा कि उनके चाचा भी अफीम खाते थे। वहीं सीएम अमरिंदर ने कहा कि उन्हें खुशी है कि अफीम को लीगल करने का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आया है। उन्होंने कहा कि वह पिछले कार्यकाल से ही इस नीति पर जोर देते रहे हैं।

बता दें कि आम आदमी पार्टी के निलंबित सांसद (पटियाला) धर्मवीर गांधी चूरा पोश्त और अफीम की खेती को कानूनी मान्यता देने की मांग करते रहे हैं।

सोमवार को अमरिंदर सिंह ने युवा पीढ़ी को बचाने के लिए केंद्र सरकार से राष्ट्रीय ड्रग नीति बनाने की मांग की। अमरिंदर सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय ड्रग नीति, दवा उद्योग के लिए आवश्यक ड्रग की खेती की जरूरत का समाधान भी करेगी। केंद्र को ऐसी नीति बनाने में राज्यों और विशेषज्ञों को साथ लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि ड्रग की बुराई से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए समग्र फॉर्मूला बनाने की जरूरत है।

अन्य राज्यों की बात करते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा कि राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे राज्य भी अफीम को लीगल मानते हुए उसकी खेती कर रहे हैं। उसके लिए उन्हें पंजाब में आकर्षक बाजार मिल रहा है। उन्होंने इस बात का स्वागत किया कि यह मुद्दा कुछ राज्यों में अफीम की खेती की बढ़ती मांग के कारण केंद्र में आ गया है।

सीएम अमरिंदर ने कहा कि वह सीएम के तौर पर अपने पिछले कार्यकाल से ही ऐसी नीति पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने केंद्र के सामने और मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में भी राष्ट्रीय नीति का मुद्दा उठाया था। ड्रग की इस बुराई के सफाए के लिए एक अभेद्य प्रणाली बनाने की जरूरत है।

 

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