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सुप्रीम कोर्ट जज के लिए कॉलेजियम ने केंद्र को फिर भेजा जस्टिस जोसेफ का नाम

July 21st, 2018 08:32 IST
सुप्रीम कोर्ट जज के लिए कॉलेजियम ने केंद्र को फिर भेजा जस्टिस जोसेफ का नाम

हाईलाइट

  • सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने दोबारा लिया जस्टिस जोसेफ के नाम को SC में प्रमोट करने का फैसला।
  • चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच वरिष्ठ जजों की कॉलेजियम ने ये फैसला लिया है।
  • 26 अप्रैल को केंद्र सरकार ने जस्टिस जोसेफ को प्रमोट करने की कॉलेजियम की सिफारिश वापस भेज दी थी।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की कॉलेजियम ने शुक्रवार को एक बार फिर उत्तराखंड के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ के नाम को शीर्ष अदालत के लिए प्रमोट करने का फैसला लिया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच वरिष्ठ जजों की कॉलेजियम ने केंद्र को जस्टिस जोसेफ का नाम भेजा है। इससे पहले 26 अप्रैल को केंद्र सरकार ने जस्टिस जोसेफ को प्रमोट करने की कॉलेजियम की सिफारिश वापस भेज दी थी। यहां हम आपको ये भी बता दें कि कॉलेजियम अगर दोबारा किसी नाम को सरकार के पास भेजती है तो सरकार उसे वापस नहीं कर सकती।

इनका भी नाम किया रिकमेंड
कॉलेजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल को जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने का भी रिकमंडेशन दिया है। इसके अलावा कलकत्ता हाई कोर्ट के सीनियर जस्टिस अनिरूद्ध बोस को झारखंड हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने, बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस वीके तहिलरमानी को मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त करने, गुजरात हाई कोर्ट के एमआर शाह को पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने का रिकमंडेशन दिया गया है। 

बैठक में केएफ जोसेफ के नाम पर बनी थी सहमति
इससे पहले 11 मई को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस बैठक में चीफ जस्टिस केएम जोसेफ के नाम को दोबारा प्रमोट कर सुप्रीम कोर्ट भेजने पर कॉलेजियम की सहमति बनी थी। कॉलेजियम ने यह भी कहा था कि दोहराई जाने वाली सिफारिश के साथ अन्य 'उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश भी भेजी जानी चाहिए।' कॉलेजिम में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जे चेलामेश्वर, रंजन गोगोई, एमबी लोकुर और कुरियन जोसेफ शामिल थे। करीब एक घंटे चली मीटिंग के बाद ये फैसला लिया गया था।   

केंद्र ने किया था जस्टिस जोसेफ का नाम खारिज
गौरतलब है कि SC के कॉलेजियम ने इसी साल 10 जनवरी को उत्तराखंड के चीफ जस्टिस जोसेफ और सीनियर वकील इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की थी। सरकार ने इंदु मल्होत्रा के नाम पर मुहर लगा दी लेकिन जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश को खारिज कर फिर से विचार करने के लिए कॉलेजियम के पास भेज दिया था। केंद्र का कहना था कि ये प्रस्ताव सर्वोच्च न्यायालय के मापदंड के अनुरूप नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में केरल का पर्याप्त प्रतिनिधित्व है।

इन पदों पर रहे चुके हैं जस्टिस जोसेफ
जस्टिस जोसेफ ने 2016 में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के मोदी सरकार के फैसले को खारिज करने वाली पीठ की अगुआई की थी। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। जोसेफ जुलाई 2014 से उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं। इस साल जून में वो 60 साल के हो गए। 14 अक्टूबर 2004 को उन्हें केरल हाई कोर्ट में स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 31 जुलाई 2014 को उन्होंने उत्तराखंड हाई कोर्ट का प्रभार संभाला था।   

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।