दैनिक भास्कर हिंदी: जज लोया केस में नहीं होगी SIT जांच, SC ने खारिज की याचिका

April 20th, 2018

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज (गुरुवार) को जज लोया की मौत मामले में अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि इस मामले में कोई जांच नहीं होगी, केस में कोई आधार नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार जजों के बयान पर संदेह का कोई कारण नहीं है। उनके बयान पर संदेह करना संस्थान पर संदेह करना जैसा होगा। कोर्ट ने कहा कि मामले के जरिए न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी। यह मांग कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला, पत्रकार बीएस लोने, बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन सहित अन्य द्वारा की गई थी। इन याचिकाओं पर 16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों द्वारा 12 जनवरी को की गई प्रेस कांफ्रेंस की तात्कालिक वजह लोया केस की सुनवाई के लिए चुनी गई पीठ थी। हालांकि बाद में उस पीठ ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया था। 


निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई की गई। इस केस को लेकर कई दिनों तक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर कहा गया कि जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच जरूरी है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने कहा था कि जज लोया मामले में जो कुछ हो रहा है, वह परेशान करने वाला है। एक के बाद एक जज को सजा दी जा रही है। उन्होंने कहा पिछले दिनों जज लोया मामले को बॉम्बे हाईकोर्ट को दूसरे जज के पास भेज दिया गया।

 



सोहराबुद्दीन केस की सुनवाई कर रहे थे लोया

बता दें कि जज लोया हाई प्रोफाइल सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे। 1 दिसंबर 2014 को उनकी दिल का दौरा पड़ने से नागपुर में मौत हो गई थी। वह वहां अपने मित्र की बेटी की शादी में भाग लेने गए थे। वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि जयंत एम पटेल को इस मामले से इसलिए दूर कर दिया गया, क्योंकि उन्होंने सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को आरोपमुक्त किए जाने के फैसले के खिलाफ अपील न दायर करने को लेकर सीबीआई से सवाल किया था। जस्टिस पटेल ने इशरत जहां एनकाउंटर मामले की भी सीबीआई जांच का आदेश दिया था। 

 

महाराष्ट्र सरकार ने कही ये बात 

वहीं महाराष्ट्र सरकार का कहना था कि जस्टिस लोया की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिकाएं एक राजनीतिक व्यक्ति को टॉरगेट करने के मकसद से दायर की गई है। याचिकाकर्ता का मंशा है कि मामले को इसी तरह तूल मिलता रहे। याचिकाकर्ता यह संदेश फैलाने की कोशिश कर रहा है कि जज, पुलिस, डॉक्टर सहित सभी के साथ समझौता किया गया। महाराष्ट्र सरकार के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा था कि इस तरह के घातक प्रचलन को शीघ्र रोका जाना चाहिए। 

 

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आरोपी थे। गत नवंबर को यह मसला तब सामने आया था जब एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि जज लोया की बहन ने भाई की मौत को लेकर सवाल उठाए हैं। जज लोया की वर्ष 2014 में मौत हो गई थी।


ये हो चुके हैं दोषमुक्त

सोहराबुद्दीन केस में राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, राजस्थान के व्यवसायी विमल पाटनी, गुजरात के पूर्व पुलिस प्रमुख पीसी पांडे, एडीजीपी गीता जौहरी व गुजरात के पुलिस अफसर अभय चूडास्मा व एनके अमीन दोषषमुक्त हो चुके हैं। इस मामले में जज लोया की बहन का कहना है कि सोहराबुद्दीन मामले में अमित शाह के पक्ष में फैसला देने के लिए जज लोया को 100 करोड़ रुपये और मुंबई में एक घर देने की पेशकश की गई थी।