राम मंदिर निर्माण विवाद: SIT की क्लीन चिट मिलने के बाद चंपत राय ने लिखा पत्र, निर्माण से लेकर फैसले लेने तक की दी जानकारी

SIT की क्लीन चिट मिलने के बाद चंपत राय ने लिखा पत्र, निर्माण से लेकर फैसले लेने तक की दी जानकारी
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े विवाद में SIT की फाइनल रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दी गई है। इसके बाद उन्होंने 9 पेज का लेटर लिखा है।

डिजिटल डेस्क, लखनऊ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़े विवाद में SIT की फाइनल रिपोर्ट में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दी गई है। इसके बाद चंपत राय की 9 पेज की चिट्ठी भी सामने आई है। इसमें उन्होंने मंदिर की व्यवस्था से लेकर निर्माण के फैसलों तक से जुड़ी अहम बातें बताई हैं। बताते चलें कि उनका यह पत्र ऐसे समय में सामने आया है, जब मंदिर में दान और कथित अनियमितताओं को लेकर मामला गरमाया हुआ है।

चंपत राय ने अपनी चिट्ठी में बताया कि ट्रस्ट की सभी सेवाएं, जैसे दर्शन पास, आरती पास और प्रसाद, ये सभी निःशुल्क हैं। उन्होंने बताया कि मंदिर के अर्चक मुख्य रूप से पूजा-पाठ, वेद, रामायण और अन्य धार्मिक सेवाओं में लगे रहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं से पूजा कराने या दक्षिणा लेने का भी कोई काम नहीं होता है।

ट्रस्ट के तीन खातों में पैसा

चंपत राय ने दावा करते हुए कहा कि ट्रस्ट के तीन बैंक खातों में ही पैसा रखा जाता है। इन खातों की कोई चेकबुक भी नहीं ली गई है। जब भुगतान कराना होता है तो ये सभी काम ऑनलाइन RTGS के माध्यम से किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि आंतरिक और वैधानिक ऑडिट भी अलग-अलग ऑडिट फर्मों से करवाया जाता है। इसके अलावा GST, TDS, स्टांप शुल्क, लेबर सेस, PF और ESI समेत सभी सरकारी कर भी समय पर जमा किए जाते हैं।

श्रद्धालुओं की सुविधाएं

चंपत राय के मुताबिक, श्रद्धालुओं के लिए भी कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि हर निकास मार्ग पर निःशुल्क प्रसाद का वितरण होता है। भीड़ के दौरान सामान्य दर्शन के लिए अधिकतम करीब 2 घंटे का समय लगता है। वहीं, बुजुर्ग, दिव्यांग, बीमार और गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क सुगम दर्शन पास और व्हीलचेयर की सुविधा भी उपलब्ध है।

मंदिर निर्माण के फैसले पर क्या कहा?

वह आगे बताते हैं कि साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि मामले में मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने अदालत के निर्देशों के अनुसार 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र' ट्रस्ट का गठन किया। इसमें कुल 15 ट्रस्टियों की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने बताया कि मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष नृपेन्द्र मिश्रा को बनाया गया, जिनकी भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण से जुड़े फैसले इसी समिति के माध्यम से लिए जाते थे। समिति की बैठक हर महीने होती थी, जबकि कुछ समय में 15 दिनों के अंतराल पर भी बैठकें आयोजित की जाती थीं।

मंदिर निर्माण के लिए इन कंपनियों का हुआ था चयन

पत्र के मुताबिक, स्वर्गीय अशोक सिंघल के सुझावों के आधार पर लार्सन एंड टुब्रो यानी L&T को मंदिर निर्माण के लिए चुना गया था। वहीं, इस प्रोजेक्ट के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स यानी TCE को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मंदिर के वास्तुकार चंद्रकांत सोमपुरा का चयन अशोक सिंघल ने किया था और उन्हें आगे की जिम्मेदारी भी सौंपी गई। वहीं, मंदिर परिसर के अन्य भवनों और क्षेत्रों के डिजाइन एवं मास्टर प्लान के लिए नोएडा की Design Associates फर्म को जिम्मेदारी दी गई थी।

Created On :   20 Aug 2026 4:29 PM IST

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