तिहाड़ जेल में निधन: सज्जन कुमार का सियासी सफर, पार्षद से सांसद तक पहुंचे, 1984 दंगों ने बदल दी पूरी कहानी

सज्जन कुमार का सियासी सफर, पार्षद से सांसद तक पहुंचे, 1984 दंगों ने बदल दी पूरी कहानी
1984 सिंख दंगों के मामलों में पूर्व सांसद सज्जन कुमार को 3 केस में से एक में बरी, 2 में दोषी ठहराया गया था।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पूर्व सांसद और इंडियन नेशनल कांग्रेस के नेता सज्जन कुमार का आज तिहाड़ जेल में निधन हो गया है। उन्हें दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में मृत अवस्था में लाया गया था। अस्पताल के सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। 1984 के सिख विरोधी दंगों का सज्जन के जीवन पर काफी बुरा असर पड़ा। आपको बता दें कांग्रेस नेता व पूर्व सांसद सज्जन कुमार का जन्म 23 सितंबर 1945 को दिल्ली में हुआ था। शिक्षा की बात की जाए तो उन्होंने मैट्रिक तक पढ़ाई की थी। उनका विवाह राम कौर से हुआ था, उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। 1984 सिंख दंगों के मामलों में पूर्व सांसद सज्जन कुमार को 3 केस में से एक में बरी, 2 में दोषी ठहराया गया था। सज्जन के राजनीतिक करियर की बात की जाए तो उन्होंने 1977 में दिल्ली नगर निगम पार्षद के तौर पर राजनीति की शुरूआत की। उसके बाद दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के महासचिव बने।

संसद का सफर

सज्जन कुमार 1980 में पहली बार बाहरी दिल्ली से सांसद चुने गए। 1991 और 2004 में भी इसी सीट से सांसद रहे। संसद में सज्जन ने शहरी विकास और सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना से जुड़ी कमेटियों में कार्य किया।

सज्जन कुमार के राजनीतिक जीवन पर सबसे अधिक बुरा असर 1984 के सिख विरोधी दंगों का पड़ा। उन्होंने दिसंबर 2018 में दिल्ली उच्च न्यायालय से उम्रकैद की सजा मिलने के बाद कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था। फरवरी 2025 में एक अन्य 1984 दंगा हत्या केस में उन्हें उम्रकैद हुई। वो पिता-पुत्र की हत्या समेत 2 मामलों में कोर्ट की ओर से दोषी ठहराए गए थे।

दिल्ली कैंट की पालम कॉलोनी में 5 सिखों की हत्या के बाद गुरुद्वारे को आग के हवाले कर दिया गया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस केस में सज्जन कुमार को दोषी ठहराते हुए 17 दिसंबर, 2018 को उम्रकैद की सजा सुनाई। जबकि राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के सुल्तानपुरी में 3 सिखों की हत्या मामले में कांग्रेस नेता को सितंबर 2023 को बरी कर दिया।

1 नवंबर, 1984 को सरस्वती विहार में सरदार जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या कर दी गई थी। दंगाइयों ने उन्हें जिंदा जला दिया गया। इस मामले में कोर्ट ने सज्जन कुमार को 12 फरवरी, 2025 को दोषी ठहराया, 25 फरवरी को उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। 31अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1 नवंबर से दिल्ली समेत कई सिख बहुल इलाकों में दंगे भड़क गए। इन दंगों में हजारों लोग मारे गए थे।

Created On :   20 Aug 2026 4:39 PM IST

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