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राहगीरों का चलना हराम कर दिया तेज साउंड वाले बाइक राइडर्स ने, गिर रहे दूसरे वाहन चालक

राहगीरों का चलना हराम कर दिया तेज साउंड वाले बाइक राइडर्स ने, गिर रहे दूसरे वाहन चालक

डिजिटल डेस्क, दमोह । शहर में स्टाइलिश व पर्सनालिटी बाइक के रूप में बुलेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है। नई पुरानी कई सारी बुलेट सड़कों पर दौड़ रही हैं । खास बात यह है कि इनमें अलग अलग तरह का साइलेंसर का उपयोग करके पटाखा फूटने जैसे साउंड का तेजी से ट्रेड चल रहा है ,लेकिन युवाओं में यह साउंड का शौक लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है । शहर में इस तरह के अनेक वाहन साइलेंसर के माड़ल्स के कारण अनेक लोगों को हादसे का शिकार बना चुके हैं ।वहीं इनमें प्रदूषण भी हो रहा है लेकिन जिम्मेदार इन पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। यातायात पुलिस सिर्फ हेलमेट और वसूली करने में जुटी हुई है ।

ऐसे हो रहे हादसे 
बुलेट की तेज रफ्तार से साइलेंसर में गैस एकत्रित होती है और दाई तरफ तो लगे स्विच को ऑफ ऑन करने से गैस पटाखे की तरह साउंड करती है। इससे सड़क पर दो पहिया वाहन चालक डर कर गिर जाते हैं। 

ध्वनि प्रदूषण नियम 2000 
14 फरवरी 2000 को केंद्र सरकार ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के तहत सार्वजनिक स्थलों में ध्वनि प्रदूषण के बढ़ते स्तर को नियंत्रित करने ध्वनि प्रदूषण( विनिनियम और नियंत्रण) नियम 2000 को अधिनियमित किया था ।वर्ष 2010 में नियम 5 में संशोधन किया गया और इसके तहत धवनि पैदा करने वाले उपकरणों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया। इन सभी की अनुमति जरूरी होती है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला 2005
शोर नियम 2000 के सीधे सीधे उल्लंघन ने सुप्रीम कोर्ट 18 जुलाई 2005 को ध्वनि प्रदूषण पर ऐतिहासिक फैसला दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश आर सी लाहोटी और जस्टिस अशोक मान की सुप्रीम कोर्ट खंडपीठ ने लाउडस्पीकर और  हारनो के यहां तक की निजी आवासों में भी इस्तेमाल पर व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं ।इसमें पटाखों , लाउड स्पीकर ,वाहनों से उत्पन्न होने वाले शोर आदि को भी कवर किया गया है । 

इनका कहना है 
तेज आवाज अचानक किसी हृदय रोगी  के पास होती है तो हार्ट अटैक आने का खतरा रहता है। 5 से 20 डेसीबल साउंड सेफ है 15 से 20 डेसीबल साउंड ठीक नहीं है। लेकिन अगर कोई आवाज अचानक आती है तो इससे क्षणिक बहरापन भी आता है। डॉ डीएम संगतानी  हृदय रोग विशेषज्ञ
 

कानों के पास तेज आवाज होती है तो नसे पूरी तरह से खराब भी हो सकती हैं ।इसी तरह बच्चों सहित गर्भवती महिलाओं के लिए भी तेज साउंड से खतरा होता है। इससे सुनने और समझने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है, वहीं यह चिड़चिड़ापन पैदा करती है। डॉ मयंक प्यासी  विशेषज्ञ 

ऐसे  वाहन जो अपने मूल ढांचे में परिवर्तन करते हैं उनमें मोटर व्हीकल एक्ट 1988 की धारा 39/ 192 में यातायात पुलिस द्वारा कार्यवाही की जाती है और उस पर न्यायालय द्वारा जुर्माना किया जाता है। पुलिस द्वारा प्रतिदिन ही कार्यवाही की जाती हैं और ऐसे वाहनों के विरुद्ध कार्यवाही हो रही हैं ।यदि इस प्रकार की और भी शिकायतें आ रही हैं तो उन पर भी तत्काल कार्यवाही की जाएगी। विवेक सिंह  पुलिस अधीक्षक दमोह
 

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