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रवि पुष्य नक्षत्र पर करें ये काम, मिलेगी स्थायी समृद्धि के साथ कार्य सिद्धि...

March 17th, 2019 09:22 IST
रवि पुष्य नक्षत्र पर करें ये काम, मिलेगी स्थायी समृद्धि के साथ कार्य सिद्धि...

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। इस बार रवि पुष्य नक्षत्र 17 मार्च 2019 को आ रहा है। इस दिन आमलकी एकादशी पर्व का संयोग होने से यह दिन और भी ख़ास हो गया है। पुष्य नक्षत्र का समय 16 मार्च की रात 22:17 से लेकर 17 मार्च की रात 8:45 तक रहेगा। उदय कालीन दिन रविवार होने के कारण ये रविपुष्य नक्षत्र योग बन रहा है, जो दिन रविवार को पूरा दिन रहेगा। ज्योतिष के अनुसार पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभकारक नक्षत्र कहा जाता है। पुष्य का अर्थ होता है कि पोषण करने वाला और ऊर्जा-शक्ति प्रदान करने वाला नक्षत्र। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति सदा लोगों की भलाई व सेवा करने के लिए तत्पर रहते हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक अपने परीश्रम से जीवन में सफलता प्राप्त करते हैं। कहा जाता है कि इस शुभ दिन पर संपत्ति और समृद्धि की देवी माँ लक्ष्मी का जन्म हुआ था। पुष्य नक्षत्र में किए जाने वाले कार्यों से जीवन में समृद्धि का आगमन होता है। 

जीवन में समृद्धि का आगमनः पुष्य नक्षत्र में किए गए कामों को हमेशा सफलता व सिद्धि मिलती है। इसलिए, विवाह को छोड़कर हर एक कार्यों के लिए पुष्य नक्षत्र को शुभ माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र में किए जाने वाले मांगलिक कार्य:

1- ज्ञान और विद्याभ्यास के लिए पावन दिन।

2- इस दिन आध्यात्मिक कार्य किए जा सकते हैं।

3- मंत्रों, यंत्रों, पूजा, जाप और अनुष्ठान हेतु शुभ दिन।

4- माँ लक्ष्मी की उपासना और श्री यंत्र की खरीदी करके जीवन में समृद्धि ला सकते हैं।

5- इस समय के दौरान किए गए तमाम धार्मिक और आर्थिक कार्यों से जातक की उन्नति होती है।

6- इस दिन पूजा या उपवास करने से जीवन के हर एक क्षेत्र में सफलता की प्राप्ति होती है।

7- कुंडली में विद्यमान दूषित सूर्य के दुष्प्रभाव को घटाया जा सकता है।

8- इस दिन किए कार्यों को सिद्धि व सफलता मिलती है।

9- धन का निवेश लंबी अवधि के लिए करने पर भविष्य में उसका अच्छा फल प्राप्त होता है।

10- काम की गुणवत्ता और असरकारकता में भी सुधार होता है।

11- इस शुभदायी दिन पर महालक्ष्मी की साधना करने से उनका विशेष व मनोवांछित फल प्राप्त होता है।


रविवार के दिन पड़ने वाले पुष्य योग को रवि पुष्य नक्षत्र कहते हैं। और ये रवि पुष्य योग सबसे शुभ माना जाता हैं। इस रवि नक्षत्र में छोटे बालकों के उपनयन संस्कार और उसके बाद सबसे पहली बार विद्याभ्यास के लिए गुरुकुल में भेजा जाता है। इसका ज्ञान के साथ अटूट संबंध है। पुष्य नक्षत्र को ब्रह्याजी का श्राप मिला था, इसलिए यह नक्षत्र शादी-विवाह के लिए वर्जित माना गया है। पुष्य नक्षत्र में दिव्य औषधियों को लाकर उनकी सिद्धि की जाती है। जीवन में संपत्ति और समृद्धि को आमंत्रित करने के लिए पुष्य नक्षत्र व्यक्ति को पूरा अवसर प्रदान करता है। इस दिन किए गए सभी मांगलिक कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होते हैं।

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