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जिला अस्पताल में छत का प्लास्टर गिरा, स्टाफ नर्स गंभीर रूप से घायल

जिला अस्पताल में छत का प्लास्टर गिरा, स्टाफ नर्स गंभीर रूप से घायल

डिजिटल डेस्क, सतना। जिला अस्पताल की नई ओपीडी में बुधवार को ओपीडी के ईसीजी कक्ष में रिकॉर्ड मेन्टेन कर रही स्टाफ नर्स प्रिया पटेल के ऊपर छत का प्लास्टर गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप ये घायल हो गई। स्टाफ नर्स के सिर में गंभीर चोट आई है।  नर्स के घायल होने की खबर लगते ही सिविल सर्जन डॉ. एसबी सिंह के साथ डॉ. प्रमोद वाठक, डॉ. आलोक खन्ना, माइनर ओटी पहुंचे। इलाज के बाद उसे जिला अस्पताल के इन्टेंशन केयर यूनिट (आईसीयू) में भर्ती कराया गया है, उसके सिर में 12 टांके लगे हैं। स्टाफ नर्स की हालत अभी गंभीर है। उल्लेखनीय है कि बारिश के इस सीजन में अभी तक नई ओपीडी के कई चेम्बरों का प्लास्टर गिर चुका है। गनीमत यह थी कि इससे पहले किसी को चोट नहीं आई। डॉक्टर लगातार इसकी शिकायत अस्पताल प्रबंधन से कर रहे थे।

चढ़ गया भ्रष्टाचार की भेंट

अस्पताल सूत्रों की मानें तो जिला अस्पताल में तकरीबन 6 साल पहले नई ओपीडी का निर्माण शुरू हुआ था। नई ओपीडी का निर्माण कार्य बैकवर्ड रीजन्स ग्रांट (बीआरजीएफ) फंड से तकरीबन 90 लाख रुपए की लागत से निर्माण एजेंसी नगर निगम ने कराया था। वर्ष 2014 में ओपीडी तैयार होकर अस्पताल प्रबंधन को हैंडओवर किया गया था। अस्पताल सूत्र बताते हैं कि नई ओपीडी का निर्माण इतनी घटिया तरीके से किया गया था कि 2-3 साल मेें ही परिणाम सामने आने लगे थे। 6 साल में शायद ही किसी डॉक्टर का चेंबर ऐसा हो, जिसका प्लास्टर न गिरा हो। अब तो डॉक्टर यहां बैठकर मरीजों का इलाज करने से डरने लगे हैं।  

मरीजों पर नहीं, छत पर ध्यान

नई ओपीडी में सर्जिकल स्पेशलिस्ट, मेडिकल स्पेशलिस्ट, आर्थोपेडिक्स, शिशु रोग विशेषज्ञ, ईएनटी स्पेशलिस्ट, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एनसीडी स्पेशलिस्ट समेत कई मेडिकल ऑफीसर नई ओपीडी में ही मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण करते हैं। जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यहां रोज लगभग 1 हजार रोगी इलाज कराने आते हैं, दोपहर 1 बजे तक भीड़ रहती है। ऐसे में मरीजों को देखते वक्त डॉक्टरों का ध्यान छत पर होता है। क्योंकि प्लास्टर कब गिर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता।

4 चेंबरों में बैठने पर रोक

उधर नई ओपीडी के जिन चेंबरों के प्लास्टर गिर चुके हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इनमें डॉक्टरों के बैठने पर रोक लगा दिया है। बताया गया है कि जब तक इन चेंबरों के छत की रिपेयरिंग नहीं हो जाती, इन्हें बंद रखा जाएगा। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक मरम्मत के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा। 

इनका कहना है

जिन चेंबरों में प्लास्टर गिर चुका है उन्हें बंद करा दिया गया है, जल्द ही इनकी रिपेयरिंग का कार्य प्रारंभ होगा। इकबाल सिंह, अस्पताल प्रशासक

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