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पौष पूर्णिमा पर प्रयागराज में स्नान का है खास महत्व

BhaskarHindi.com | Last Modified - January 17th, 2019 20:30 IST

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पौष पूर्णिमा पर प्रयागराज में स्नान का है खास महत्व

डिजिटल डेस्क। हिन्दू कैलेंडर में शाकंभरी पूर्णिमा यानि पौष पूर्णिमा बहुत ही शुभ दिन माना जाता है। पौष पूर्णिमा विक्रम संवत के दसवें माह पौष के शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि होती है। मान्यता है कि पौष माह के दौरान जो व्यक्ति पुरे महीने भगवान का ध्यान कर आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करते है, उसकी पूर्णता पौष पूर्णिमा के स्नान से हो जाती है। इस दिन काशी, प्रयाग और हरिद्वार में स्नान का विशेष महत्व होता है। इस बार अर्ध कुम्भ का दूसरा शाही स्नान रहेगा जो बहुत ही महत्वपूर्ण होगा।

स्नान से पूर्वज भी होते है दोषमुक्त

पौष पूर्णिमा 21 जनवरी 2019 के 11:28 दिन से ही माघ माह का आरंभ हो जाएगा। कहा जाता है इस दिन स्नान ध्यान के बाद दान पुण्य करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि प्रयागराज में होने वाले अर्ध कुंभ में स्नान करने से मनुष्य अंधकार से प्रकाश की ओर जाता है, ये एक ऐसा स्थान है जहां बुद्धिमत्ता का प्रतीक सूर्य का उदय होता है। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में डुबकी लगाकर मनुष्य अपने समस्त पापों को धो डालता है। पवित्र गंगा में डुबकी लगाने से मनुष्य और उसके पूर्वज दोषमुक्त हो जाते हैं। 

जन्म और मृत्यु चक्र से मिलती है मुक्ति

कुंभ का ये स्नान जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाता है। कुंभ स्नान की कुछ प्रमुख तिथियां हैं। इन्हें शाही स्नान कहा जाता है। इन तिथियों पर सूर्योदय के समय साधु-संतों का समूह पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाता है। प्रत्येक समूह एक विशेष क्रम में परंपरा के अनुसार स्नान के लिए नदी में जगह लेता है। जैन धर्म मानने वाले इस दिन को “शांकभरी जयंती” मनाते है। जबकि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में रहने वाली जनजातियां पौष पूर्णिमा के दिन बड़े ही धूमधाम से छेरता पर्व मनाती है।

पौष माह में सूर्य देव की विशेष पूजा

ज्योतिषी और जानकारों का कहना है की पौष महीने में सूर्यदेव ग्यारह हजार रश्मियों के साथ तप कर सहित शीतऋतु से सुकून देते है। इसलिए पौष माह में सूर्य देव की विशेष पूजा और उपासना की जाती है जिससे मनुष्य जीवन मरण के चक्कर से मुक्त होता है। इस दिन गंगा यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान, दान और सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है। माना जाता है इस दिन गंगा स्नान करने से तन मन और आत्मा तीनों ही पापमुक्त हो जाते है। इसीलिए इस दिन सांगत के तट पर स्नान के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती है। इस महीने को सूर्य देव का महीना भी माना जाता है। पूर्णिमा की तिथि चन्द्रमा के अनुसार होती है। सूर्य चद्र्मा का यह अद्भुत संयोग केवल पौष पूर्णिमा को ही मिलता है। इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों की उपासना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। ग्रहों की बाधाएं शांत होती है और मोक्ष का वरदान मिलता है। इस वर्ष 2019 में पौष पूर्णिमा 21 जनवरी 2019 सोमवार के दिन होगी।


पौष पूर्णिमा का समय

पूर्णिमा तिथि = 20 जनवरी 2019, रविवार को 01:31 बजे दिन से प्रारंभ होगी। 

पूर्णिमा तिथि = 21 जनवरी 2019, सोमवार 11:28 बजे दिन में समाप्त होगी।

स्नान के लिए वाराणसी का दशाश्वमेध घाट और प्रयाग का त्रिवेणी संगम,हरिद्वार और काशी बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है।

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