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जनभागीदारी बढ़ाने में विफल रहा परिवहन विभाग - पॉयलट प्रोजेक्ट फोटो खींचो इनाम पाओ फेल

जनभागीदारी बढ़ाने में विफल रहा परिवहन विभाग - पॉयलट प्रोजेक्ट फोटो खींचो इनाम पाओ फेल

 डिजिटली डेस्क कटनी । यात्री वाहनों में ओवर लोडिंग रोकने में जहां परिवहन विभाग कागजी घोड़ा दौड़ाता रहा, वहीं सड़क और आमजनों की रक्षा के लिए एक सजग प्रहरी भी तैयार नहीं कर सका। तीन वर्ष पहले परिवहन आयुक्त ने आम लोगों को इस अभियान से जोडऩे के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया था। इसमें ओवर लोड वाहनों की फोटो खींचकर उसे एप में भेजना था। जिसके लिए एक हजार रुपए इनाम दिए जाने की घोषणा भी की गई थी। इसके बावजूद इस योजना को आरटीओ विभाग ने इस कदर से फेल किया कि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सब कुछ जानते हुए भी अंजान बने रहे, तो आम लोगों को भी इसकी जानकारी नहीं लग सकी। आरटीओ विभाग के अधिकारियों को तो यह भी नहीं पता कि इस तरह की शुरुआत उनके विभाग ने की थी। परिवहन विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि यह योजना वास्तव में आम लोगों तक पहुंच जाती, तो इसका फायदा प्रत्यक्ष रुप से शासन को होता। समय से पहले सड़कें जर्जर नहीं होती तो ओवर लोडिंग वाहनों से जो हादसे हो रहे हैं। उसमें कमीं आती।
यह रही योजना
वाहनों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोक ने के लिए वर्ष 2016 में इसकी शुरुआत पॉयलट प्रोजेक्ट के रुप में विभाग के आयुक्त ने की थी। इस प्रोजेक्ट में एक एप लांच किया गया था। इस एप को कोई भी मोबाइल में डाउनलोड कर किसी ओवर लोड यात्री वाहन की फोटो भेज सकता था।  वाहन क्रमांक,संचालित मार्ग, स्थान का नाम और समय के साथ इसे भेजने की शर्त रही। जानकारी मिलने के बाद परिवहन विभाग इसकी जांच करता और शिकायत सही पाए जाने पर दोषी वाहन मालिक के विरुद्ध कार्यवाही करते हुए इनाम के रुप में एक हजार रुपए सूचनाकर्ता को बतौर इनाम के रुप में दिया जाता।
तो नहीं छिपता झूठ
एप के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी परिवहन विभाग की रही। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी और कर्मचारी इस एप को दबाकर इसलिए बैठे रहे कि उनके विभाग में कोई आम आदमी दखलंदाजी न कर सके। कार्यालय के अंदर विभाग एक बोर्ड भी नहीं लगा सका। सार्वजनिक जगहों की बात तो छोड़ दें। जब कार्यालय में इस एप के बारे में यहां के कर्मचारियों से जानकारी ली गई, तब अधिकांश लोग इसके बारे में कुछ भी नहीं बता सके। उनका कहना रहा कि यह कटनी के लिए लागू नहीं हुआ है।
जिम्मेदारों की भी रुचि नहीं
इस एप ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को किस तरह से असमंजस में डालकर रखा है। इसकी बानगी अधिकारी के जवाब से ही जाना जा सकता है। परिवहन अधिकारी एमडी मिश्रा से जब इस एप के बारे में पूछा गया तो पहले तो वे हां-हां करते रहे। लेकिन जब जवाब देने की बारी आई, तो उन्होंने फोन ही काट दिया। फोन लगाने पर व्यस्त का सिलसिला चलता रहा।
 

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