90 वर्षीय बुजुर्ग की भविष्यवाणी निकली सच, तय समय पर हुई मौत, गाजे-बाजे के साथ निकाली अंतिम यात्रा

90 वर्षीय बुजुर्ग की भविष्यवाणी निकली सच, तय समय पर हुई मौत, गाजे-बाजे के साथ निकाली अंतिम यात्रा
राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक 90 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी मौत की पहले ही अंदेशा जताया था। हैरानी की बात यह है कि उसकी कही बात सच साबित हुई और चार दिन बाद उनका निधन हो गया। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए गाजे-बाजे के साथ अंतिम यात्रा निकाली और मृत्यु उत्सव मनाया।

बांसवाड़ा, 8 अगस्त (आईएएनएस)। राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक 90 वर्षीय बुजुर्ग ने अपनी मौत की पहले ही अंदेशा जताया था। हैरानी की बात यह है कि उसकी कही बात सच साबित हुई और चार दिन बाद उनका निधन हो गया। इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों ने उसकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए गाजे-बाजे के साथ अंतिम यात्रा निकाली और मृत्यु उत्सव मनाया।

जानकारी के अनुसार, बांसवाड़ा जिले की गांगड़तलाई पंचायत समिति क्षेत्र के हडमत गांव निवासी 90 वर्षीय वीरजी सिंगाड़ा ने अपनी मौत से करीब चार दिन पहले परिवार के सभी सदस्यों को बुलाया था। उन्होंने परिजनों से कहा था कि उनकी मृत्यु चार-पांच दिनों के भीतर हो जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके निधन के बाद कोई रोए नहीं, बल्कि उसकी अंतिम यात्रा को उत्सव की तरह निकाला जाए।

बुजुर्ग ने अपनी अंतिम इच्छा जताते हुए कहा था कि उनकी अर्थी गाजे-बाजे के साथ निकाली जाए और उनके निधन को दुख की बजाय एक उत्सव के रूप में मनाया जाए।

परिजनों के अनुसार, वीरजी सिंगाड़ा की भविष्यवाणी के अनुसार शुक्रवार को निधन हो गया। बुजुर्ग की मौत के बाद परिवार और ग्रामीणों ने उनकी अंतिम इच्छा का पालन किया। शव यात्रा के दौरान ढोल-नगाड़े बजाए गए, लोग नाचते-गाते हुए अंतिम यात्रा में शामिल हुए और पूरे रास्ते फूल बरसाए गए।

अंतिम यात्रा के बाद पूरे विधि-विधान और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस अनोखी शव यात्रा को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।

स्थानीय लोगों के अनुसार, राजस्थान के आदिवासी अंचलों में बुजुर्गों की मृत्यु को कई जगह 'मृत्यु उत्सव' के रूप में मनाने की परंपरा है। मान्यता है कि लंबी आयु प्राप्त करने के बाद होने वाली मृत्यु जीवन की पूर्णता का प्रतीक होती है, इसलिए ऐसे अवसर पर शोक के बजाय सम्मान और खुशी के साथ विदाई दी जाती है।

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Created On :   8 Aug 2026 7:45 PM IST

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