अयोध्या में राजनीति कर गए अखिलेश यादव, रामलला के दर्शन तक नहीं किए महंत राजू दास
आजमगढ़, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। महंत राजू दास ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने धार्मिक प्रवचन के मंच का इस्तेमाल समाजवादी पार्टी के प्रचार के लिए किया। राजू दास ने कहा कि यदि अखिलेश यादव धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, तो उन्हें सनातन धर्म, संतों और धार्मिक परंपराओं पर चर्चा करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने वहां राजनीतिक बयानबाजी की।
महंत राजू दास ने कहा कि धार्मिक कार्यक्रम के मंच पर सभी राजनीतिक दलों के लोगों का स्वागत होना चाहिए, क्योंकि धार्मिक आयोजनों में व्यक्ति की राजनीतिक पहचान के बजाय उसकी आस्था को महत्व दिया जाता है। अखिलेश यादव अयोध्या आए थे, तो सनातन धर्म और संतों के विषय में चर्चा कर सकते थे, लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और चुनावी राजनीति से जुड़ी बातें कीं। कार्यक्रम का इस्तेमाल समाजवादी पार्टी के प्रचार के लिए किया गया।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की ओर से अखिलेश यादव के रामलला के दर्शन नहीं करने पर सवाल उठाए जाने के संदर्भ में राजू दास ने कहा कि अखिलेश यादव की राम मंदिर के प्रति कभी श्रद्धा नहीं रही। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं का उल्लेख करते हुए भी राम मंदिर के प्रति उनकी निष्ठा पर सवाल उठाए। अखिलेश यादव के सांसदों और विधायकों के साथ राम मंदिर दर्शन करने जाने की बात कहने पर राजू दास ने कहा कि श्रद्धा मन से होती है, किसी के कहने से नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव हिंदू मतदाताओं का समर्थन हासिल करने के लिए धार्मिक प्रतीकों और नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
अखिलेश यादव की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दिए जाने पर राजू दास ने इसे बचकाना बयान बताया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव खुद एक प्रमुख राजनीतिक दल के अध्यक्ष और मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में चुनाव लड़ते हैं। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने को लेकर इस तरह की चुनौती देने का कोई औचित्य नहीं है।
बहुजन समाज पार्टी की ओर से अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर कारसेवकों के खून से हाथ रंगे होने संबंधी टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर राजू दास ने इसका समर्थन किया। उन्होंने समाजवादी पार्टी पर सनातन धर्म के अनुयायियों के प्रति निष्ठावान नहीं होने का आरोप लगाया। राजू दास ने यह भी कहा कि राम मंदिर के प्रति श्रद्धा किसी राजनीतिक दबाव या अपील से पैदा नहीं हो सकती। धार्मिक आस्था व्यक्ति की निजी भावना है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
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Created On :   9 Oct 2026 6:20 PM IST












