भारत-अमेरिका की नौसेनाएं करेंगी समुद्र में छिपे विस्फोटकों से निपटने का अभ्यास

भारत-अमेरिका की नौसेनाएं करेंगी समुद्र में छिपे विस्फोटकों से निपटने का अभ्यास
भारतीय और अमेरिकी नौसेना एक विशेष अभ्यास करने जा रही हैं। इसके तहत समुद्र के भीतर छिपे विस्फोटक खतरों को खोजने और उन्हें निष्क्रिय करने का अभ्यास किया जाएगा। दोनों देशों के नौसैनिक विशेषज्ञ एक साथ प्रशिक्षण लेंगे। भारत व अमेरिका की नौसेनाओं का यह ‘एक्सपलोसिव ऑर्डेनेंस डिस्पोजल’ (ईओडी) अभ्यास 10 से 14 अगस्त तक कोच्चि स्थित नौसेना की दक्षिणी कमान में आयोजित किया जाएगा।

नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय और अमेरिकी नौसेना एक विशेष अभ्यास करने जा रही हैं। इसके तहत समुद्र के भीतर छिपे विस्फोटक खतरों को खोजने और उन्हें निष्क्रिय करने का अभ्यास किया जाएगा। दोनों देशों के नौसैनिक विशेषज्ञ एक साथ प्रशिक्षण लेंगे। भारत व अमेरिका की नौसेनाओं का यह ‘एक्सपलोसिव ऑर्डेनेंस डिस्पोजल’ (ईओडी) अभ्यास 10 से 14 अगस्त तक कोच्चि स्थित नौसेना की दक्षिणी कमान में आयोजित किया जाएगा।

यह महत्वपूर्ण समुद्री अभ्यास पांच दिन तक चलेगा। इसमें दोनों नौसेनाओं के विशेषज्ञ गोताखोर और विस्फोटक आयुध निष्क्रियकरण दल एक-दूसरे के साथ अपने अनुभव साझा करेंगे। दोनों ही देशों के नौसैनिक तकनीक और काम करने के अपने-अपने तरीके साझा करेंगे। अभ्यास के दौरान विशेषज्ञों के बीच चर्चा, संयुक्त प्रशिक्षण, उपकरणों का प्रदर्शन और अलग-अलग चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों पर आधारित व्यावहारिक अभ्यास होंगे।

नौसेना के मुताबिक, इस अभ्यास की खासियत यह होगी कि दोनों देशों के विशेषज्ञ एक-दूसरे को तकनीक बताएंगे। साथ ही आपस में मिलकर वास्तविक परिस्थिति जैसे हालात में विस्फोटक के खतरों से निपटने का अभ्यास भी करेंगे। इसके जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि किसी समुद्री क्षेत्र में संदिग्ध विस्फोटक मिलने पर, पानी के भीतर खतरा पैदा होने पर या किसी जटिल स्थिति में दोनों नौसेनाएं किस तरह मिलकर तेजी और सुरक्षित तरीके से कार्रवाई कर सकती हैं।

अभ्यास के दौरान विस्फोटक आयुध निष्क्रियकरण की आधुनिक तकनीकों, नई प्रौद्योगिकियों और दुनिया में अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों पर भी जानकारी साझा की जाएगी। दोनों पक्ष एक-दूसरे की क्षमताओं, संचालन की अवधारणाओं और विशेषज्ञ दलों के इस्तेमाल की रणनीति को करीब से समझेंगे। दरअसल, भारत और अमेरिका की नौसेनाएं वर्ष 2005 से संयुक्त बचाव और विस्फोटक आयुध निष्क्रियकरण अभ्यास करती आ रही हैं।

इस वर्ष का अभ्यास इस विशेष द्विपक्षीय प्रशिक्षण श्रृंखला का आठवां संस्करण है। इस अभ्यास का मकसद केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। इसके जरिए दोनों देशों के विशेषज्ञों के बीच आपसी भरोसा, तालमेल और संचालन क्षमता को मजबूत करना है, ताकि समुद्र में पैदा होने वाले जटिल और तेजी से बदलते विस्फोटक खतरों का मिलकर प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग के बीच कोच्चि में होने वाला यह अभ्यास विशेष समुद्री अभियानों में दोनों देशों की बढ़ती साझेदारी और आपसी संचालन क्षमता का एक और महत्वपूर्ण उदाहरण होगा।

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Created On :   9 Aug 2026 7:15 PM IST

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