बेंगलुरु को अपने आईटी हब की तरह ही 'एग्री टेक' राजधानी भी बनना चाहिए सीएम सिद्दारमैया

बेंगलुरु को अपने आईटी हब की तरह ही एग्री टेक राजधानी भी बनना चाहिए  सीएम सिद्दारमैया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को बड़ा विजन रखते हुए कहा कि बेंगलुरु को आईटी हब की तरह कृषि तकनीक (एग्री-टेक) का भी वैश्विक केंद्र बनना चाहिए। खेती से जुड़ी नई तकनीकें हर किसान तक पहुंचनी जरूरी हैं, तभी असली बदलाव संभव होगा।

बेंगलुरु, 24 अप्रैल (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने शुक्रवार को बड़ा विजन रखते हुए कहा कि बेंगलुरु को आईटी हब की तरह कृषि तकनीक (एग्री-टेक) का भी वैश्विक केंद्र बनना चाहिए। खेती से जुड़ी नई तकनीकें हर किसान तक पहुंचनी जरूरी हैं, तभी असली बदलाव संभव होगा।

वह बेंगलुरु में आयोजित 'ग्लोबल एग्री टेक समिट- 2026' के उद्घाटन के बाद बोल रहे थे। यह कार्यक्रम कर्नाटक वाणिज्य एवं उद्योग मंडल संघ द्वारा आयोजित किया गया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल समय की जरूरत है। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समेत नई तकनीकों को खेती में अपनाने पर जोर दिया, ताकि राज्य का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम किसानों को नई तकनीक और आधुनिक तरीकों से जोड़ने में अहम भूमिका निभाते हैं।

सीएम सिद्दारमैया ने किसानों से अपील की कि वे बड़ी संख्या में इस तरह के कार्यक्रमों में हिस्सा लें। उन्होंने समिट के दौरान आयोजित ऑर्गेनिक खेती और कृषि मशीनरी की प्रदर्शनी की सराहना की, लेकिन सुझाव दिया कि इस तरह की प्रदर्शनियां अलग से आयोजित की जाएं, ताकि उनका प्रभाव और ज्यादा हो।

उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, इसलिए खेती को टिकाऊ और लाभकारी बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने चिंता जताई कि आज के युवा खेती से दूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर खेती लाभदायक बनेगी, तो युवा खुद-ब-खुद इस क्षेत्र की ओर लौटेंगे।"

सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं और उद्योग जगत से भी कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सहयोग करने की अपील की।

'कृषि भाग्य योजना' का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह योजना खासकर सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों की मदद के लिए शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में बड़ी मात्रा में सूखी जमीन है और इस मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली बीजेपी सरकार ने इस योजना को रोक दिया था, जिसे अब उनकी सरकार ने फिर से शुरू किया है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि राज्य के करीब 83 लाख किसानों को 70,000 करोड़ रुपए के कृषि ऋण दिए गए हैं। इसके अलावा, पिछले साल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 8,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे। कर्नाटक उद्योग और ग्रामीण विकास में भले ही पहले स्थान पर है, लेकिन कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाना बेहद जरूरी है, तभी खेती को वास्तव में लाभदायक बनाया जा सकेगा।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   24 April 2026 6:13 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story