सीजेपी कोर पैनल की बैठक 5 अगस्त को, अभिजीत दिपके करेंगे अध्यक्षता
छत्रपति संभाजीनगर, 2 अगस्त (आईएएनएस)। अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाला ऑनलाइन आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) 5 अगस्त को अपनी कोर कमेटी की बैठक में राजनीति में उतरने या न उतरने के बारे में कोई अहम फैसला लेने वाला है। रविवार को सूत्रों ने इसके बारे में बताया।
एक अधिकारी ने बताया कि अभिजीत दिपके, अलग-अलग राज्यों में समर्थकों से मिले फीडबैक के आधार पर भविष्य की रणनीति बनाने के लिए आंदोलन के सदस्यों की अपने घर पर बैठक करने वाले हैं।
सीजेपी के अधिकारी ने कहा कि नीट पेपर लीक को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए 'सफल' विरोध-प्रदर्शन और उसके बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने दिपके के नेतृत्व वाले संगठन से उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
सूत्रों ने बताया कि 5 अगस्त को कोर कमेटी की बैठक के बाद, दिपके चर्चा के नतीजों को बताने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।
अधिकारी ने बताया कि बैठक का एजेंडा साफ तौर पर तय किया गया है। सीजेपी की भविष्य की कार्ययोजना के बारे में फैसला लेना।
दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन खत्म होने के बाद मीडिया से बातचीत में, दिपके ने छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए सीजेपी आंदोलन को एक "रिस्पॉन्स ग्रुप" के तौर पर जारी रखने के अपने इरादे का संकेत दिया था।
शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीकों में अपना भरोसा दोहराते हुए, दिपके ने पिछले कुछ दिनों में साफ किया है कि सीजेपी न तो किसी राजनीतिक दल को सरकार को निशाना बनाने के लिए अपने मंच का इस्तेमाल करने देगा और न ही खुद किसी राजनीतिक संगठन में शामिल होगा।
जानकारों का मानना है कि दिपके या सीजेपी के सामने नई चुनौती छात्रों की जायज शिकायतों पर आधारित आंदोलनों को बनाए रखना और शिक्षा क्षेत्र में बदलाव की दिशा में काम करते रहना है।
सीजेपी के आंदोलन को बढ़ाने में बाहरी ताकतों की भूमिका के आरोपों के बीच, जानकारों का मानना है कि ऐसी ताकतें वहां जन-असंतोष पैदा नहीं कर सकतीं जहां वह मौजूद नहीं है, लेकिन कुछ हालात में वे मौजूदा शिकायतों को बढ़ा सकती हैं और लोगों को एकजुट करने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं।
हाल ही में लोगों के एकजुट होने का पैमाना और रफ्तार, सीजेपी की सोशल मीडिया पर व्यापक पहुंच, बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी और आंदोलन की लगातार बनी हुई गति ने कई हलकों में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह घरेलू विरोध-प्रदर्शन से कहीं बड़ी किसी चीज का प्रतिनिधित्व करता है।
एक विश्लेषक ने कहा कि हालांकि पेपर लीक के खिलाफ हालिया आंदोलन को जन्म देने वाली शिकायतें गंभीर ध्यान देने लायक हैं, लेकिन जिस तरह से आंदोलन का विस्तार हुआ, वह एक ऐसे पैटर्न को दर्शाता है जो पिछले दो दशकों में दुनिया भर के विरोध-प्रदर्शनों में तेजी से दिखाई दे रहा है।
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Created On :   2 Aug 2026 8:10 PM IST












