राज्य के सभी सरकारी विभागों का साल में एक बार साइबर ऑडिट जरूरी, सरकार ने साइबर सुरक्षा को लेकर लिया बड़ा फैसला

राज्य के सभी सरकारी विभागों का साल में एक बार साइबर ऑडिट जरूरी, सरकार ने साइबर सुरक्षा को लेकर लिया बड़ा फैसला
  • साइबर ऑडिट अब साल में कम से कम एक बार
  • क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष नजर

Mumbai News. सरकार ने राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों के मद्देनजर सरकारी संस्थानों की साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य के गृह विभाग ने महाराष्ट्र साइबर अपराध सुरक्षा महामंडल के कार्यक्षेत्र में नया दायित्व शामिल करने को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के सभी सरकारी विभागों, सरकारी कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, सहकारी बैंकों और अन्य सरकारी नियंत्रण वाली संस्थाओं का साल में कम से कम एक बार अनिवार्य साइबर सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। सरकारी आदेश के मुताबिक वर्तमान समय में साइबर अपराधों का प्रमाण बड़े स्तर पर बढ़ा है। ऐसे में सरकारी विभागों के महत्वपूर्ण डाटा, डिजिटल प्रणालियों, बुनियादी ढांचे और विभिन्न परियोजनाओं को साइबर खतरों से सुरक्षित रखना जरूरी हो गया है। इसी उद्देश्य से महाराष्ट्र साइबर अपराध सुरक्षा महामंडल की स्थापना की गई है।

साइबर ऑडिट अब साल में कम से कम एक बार

सरकार ने महाराष्ट्र साइबर अपराध सुरक्षा महामंडल के कार्यों में नया बिंदु जोड़ते हुए स्पष्ट किया है कि महामंडल के माध्यम से संबंधित संस्थाओं का वर्ष में न्यूनतम एक बार साइबर सुरक्षा परीक्षण यानी साइबर सिक्योरिटी ऑडिट अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इस दायरे में केवल सरकारी विभाग ही नहीं, बल्कि सरकारी कंपनियां, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, सहकारी बैंक और सरकारी नियंत्रण वाली अन्य संस्थाएं भी शामिल होंगी। इसका उद्देश्य साइबर सुरक्षा में मौजूद कमजोरियों की पहचान करना और समय रहते उन्हें दूर करना है।

क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष नजर

सरकार ने राज्य की संवेदनशील बुनियादी सुविधाओं यानी क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी इस व्यवस्था में प्राथमिकता दी है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता विभाग की ओर से राज्य में मौजूद संवेदनशील बुनियादी सुविधाओं की पहचान की जा रही है। ऐसी संस्थाओं का साइबर सुरक्षा ऑडिट मौजूदा वित्तीय वर्ष से महाराष्ट्र साइबर अपराध सुरक्षा महामंडल के माध्यम से अनिवार्य रूप से किया जाएगा। साइबर ऑडिट की प्रक्रिया के लिए हर श्रेणी के लिए प्रारंभिक साइबर सुरक्षा परीक्षण और उसके बाद किए जाने वाले अन्य साइबर सुरक्षा परीक्षणों के लिए अलग-अलग रेट कार्ड तैयार किए जाएंगे। इन दरों को सरकार की मंजूरी के बाद निर्धारित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि सरकारी विभागों के पास बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण और संवेदनशील डाटा उपलब्ध रहता है। इसके अलावा विभिन्न विभाग डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाओं और तकनीकी बुनियादी ढांचे पर निर्भर हैं। ऐसे में साइबर हमले की स्थिति में सरकारी कामकाज के साथ-साथ नागरिकों से जुड़ी सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इसी वजह से नियमित साइबर ऑडिट के जरिए सिस्टम की सुरक्षा, संभावित कमजोरियों और साइबर खतरों की पहचान करने पर जोर दिया गया है।

Created On :   2 Aug 2026 9:51 PM IST

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