भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच वैज्ञानिक सहयोग हुआ मजबूत, खगोलीय वेधशाला को सौंपा गया बैनर

भारत-दक्षिण अफ्रीका के बीच वैज्ञानिक सहयोग हुआ मजबूत, खगोलीय वेधशाला को सौंपा गया बैनर
दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त प्रभात कुमार ने दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला (एसएएओ) को भारत के इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए) का एक बैनर औपचारिक रूप से सौंपा। यह कार्यक्रम केप टाउन में रॉयल ऑब्जर्वेटरी में आयोजित किया गया, जिसका मकसद भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से चल रहे वैज्ञानिक सहयोग को और मजबूत करना था।

नई दिल्ली, 10 मई (आईएएनएस)। दक्षिण अफ्रीका में भारत के उच्चायुक्त प्रभात कुमार ने दक्षिण अफ्रीकी खगोलीय वेधशाला (एसएएओ) को भारत के इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीएए) का एक बैनर औपचारिक रूप से सौंपा। यह कार्यक्रम केप टाउन में रॉयल ऑब्जर्वेटरी में आयोजित किया गया, जिसका मकसद भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच लंबे समय से चल रहे वैज्ञानिक सहयोग को और मजबूत करना था।

इस हफ्ते की शुरुआत में हुए समारोह में भारतीय राजदूत ने एसएएओ के 'बेहतरीन रिसर्च' की तारीफ की। उन्होंने कहा कि आईयूसीएए का बैनर लगाना इस बात का प्रतीक है कि भारत सरकार वैज्ञानिक रिसर्च और इनोवेशन को कितनी अहमियत देती है। दक्षिण अफ्रीका के 'इंडिपेंडेंट ऑनलाइन' (आईओएल) ने यह खबर दी।

उन्होंने कहा, “विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग भारत की विदेश नीति का अहम हिस्सा है। भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच ऐतिहासिक रिश्ते हैं और हमें मिलकर आगे भी काम करते रहना चाहिए। उच्चायोग या वाणिज्य दूतावास से किसी भी तरह की मदद चाहिए हो, तो हम हमेशा तैयार हैं।”

एसएएओ की मैनेजिंग डायरेक्टर रोजालिंड स्केल्टन ने भी इस साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि पिछले 20 वर्षों में एसएएलटी सुविधा ने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं।

उन्होंने कहा, “हमें खास तौर पर उस तकनीकी विकास पर गर्व है जो एसएएलटी को भविष्य की तरफ ले जा रहा है। फिलहाल हम भारतीय सहयोगियों के साथ मिलकर एक नया कैमरा डिटेक्टर और कंट्रोलर बना रहे हैं, जिसे आने वाले महीनों में टेलीस्कोप में लगाया जाएगा। यह हमारे लिए एक बेहद रोमांचक नया कदम है।”

स्केल्टन ने यह भी बताया कि ब्र‍िक्‍स के तहत आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ेगा। दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिक इस साल भारत में होने वाली महत्वपूर्ण खगोल विज्ञान बैठकों में हिस्सा लेंगे।

उन्होंने कहा, "हम अक्टूबर और नवंबर में भारत आने को लेकर उत्साहित हैं। इसमें ब्रिक्‍स एस्ट्रोनॉमी वर्किंग ग्रुप की बैठक, साथ ही एसएएलटी वर्कशॉप और बोर्ड मीटिंग भी शामिल हैं।"

भारत फिलहाल 2026 के ब्रिक्‍स चेयरशिप की जिम्मेदारी संभाल रहा है। इसके तहत खगोल विज्ञान से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें एसएएओ भी सक्रिय रूप से हिस्सा ले रहा है।

दक्षिण अफ्रीकी सरकार की ओर से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार विभाग के टेबोगो माकोमा ने इस साझेदारी के रणनीतिक महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका ब्रिक्‍स के कई वर्किंग ग्रुप्स में हिस्सा लेता है और भारत की चेयरशिप के दौरान उसके कार्यक्रमों को पूरा समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा, "ब्रिक्‍स के तहत हमारे 13 वर्किंग ग्रुप्स हैं और हमारी जिम्मेदारी है कि उनमें भागीदारी सुनिश्चित करें और भारत के कार्यक्रमों को समर्थन दें। हम पहले भी कई सफल कार्यक्रमों में हिस्सा ले चुके हैं और आगे भी पूरा सहयोग करेंगे।"

उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों का सहयोग सिर्फ खगोल विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि अंटार्कटिका, जिनेवा और फ्रांस से जुड़े वैश्विक विज्ञान प्रोजेक्ट्स में भी दोनों साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

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Created On :   10 May 2026 7:13 PM IST

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