बिदादी टाउनशिप के लिए किसानों की जमीन जबरन नहीं ली जाएगी सीएम शिवकुमार

बिदादी टाउनशिप के लिए किसानों की जमीन जबरन नहीं ली जाएगी सीएम शिवकुमार
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना (बीटीपी) को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार को स्पष्ट किया कि किसानों की जमीन किसी भी हालत में जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार अगले दो से तीन महीनों में परियोजना के कानूनी और अन्य पहलुओं की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करेगी।

बेंगलुरु, 15 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने प्रस्तावित बिदादी टाउनशिप परियोजना (बीटीपी) को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार को स्पष्ट किया कि किसानों की जमीन किसी भी हालत में जबरन अधिग्रहित नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार अगले दो से तीन महीनों में परियोजना के कानूनी और अन्य पहलुओं की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित करेगी।

विधान सौधा में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि बिदादी टाउनशिप उनका "ड्रीम प्रोजेक्ट" नहीं है और न ही इसकी शुरुआत उन्होंने की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक विरोधी किसानों को गुमराह कर रहे हैं और उनके खिलाफ साजिश रच रहे हैं।

उन्होंने कहा, "मैं किसी जल्दबाजी में नहीं हूं। यह फैसला किसानों पर छोड़ता हूं। किसानों और मेरे बीच भरोसे का रिश्ता है। समिति किसानों की आपत्तियां सुनेगी, कानूनी पहलुओं की जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार आगे का फैसला करेगी।"

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना पूर्ववर्ती सरकारों के फैसलों की निरंतरता है। उन्होंने कहा, "यह मेरा ड्रीम प्रोजेक्ट नहीं है। मैंने कभी ऐसा दावा नहीं किया और न ही इसकी आधारशिला रखी। मैं सिर्फ पिछली सरकारों के निर्णयों और किसानों तथा वरिष्ठ नेताओं के सुझावों का पालन कर रहा हूं।"

खुद को "किसान का बेटा" बताते हुए शिवकुमार ने कहा कि वह किसानों की समस्याओं को अच्छी तरह समझते हैं और उनका उद्देश्य किसी भी किसान को परेशानी में डालना नहीं है।

उन्होंने कहा, "हो सकता है मैंने खुद खेती न की हो, लेकिन किसानों की तकलीफों को समझता हूं। जो किसान अपनी जमीन देना चाहते हैं, वे दे सकते हैं। जो नहीं देना चाहते, उन्हें मजबूर नहीं किया जाएगा।"

मुख्यमंत्री ने बताया कि बेंगलुरु के आसपास सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना 23 सितंबर 2006 को तत्कालीन मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के कार्यकाल में बनी थी। उस समय नंदगुडी, कसबा, रामनगर तालुक, बिदादी, सोलूर और सथानूर सहित पांच सैटेलाइट टाउन विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था।

उन्होंने कहा कि बाद में एच.डी. कुमारस्वामी और बी.एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली सरकारों ने भी बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (बीएमआरडीए) के माध्यम से इस परियोजना को आगे बढ़ाया और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत वैश्विक निविदाएं भी आमंत्रित की थीं।

शिवकुमार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2006 में कुमारस्वामी सरकार ने प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र को 'रेड जोन' घोषित कर वहां जमीन के लेन-देन पर रोक लगाई थी और निजी कंपनी डीएलएफ से 400 करोड़ रुपये की जमा राशि लेकर उसे आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) जारी किया था।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, "आखिर यहां रियल एस्टेट का कारोबार किसने किया?" उनका इशारा पूर्व मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी और उनके परिवार की ओर था।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि सरकार किसी भी किसान की जमीन जबरन नहीं लेगी। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री की कुर्सी पर मैं रहूं या कोई और, यह परियोजना पूर्ववर्ती सरकारों के फैसलों की निरंतरता है। जो किसान जमीन देना चाहते हैं, वे दें, लेकिन जो नहीं देना चाहते, उन पर कोई दबाव नहीं डाला जाएगा।"

गौरतलब है कि बिदादी टाउनशिप परियोजना को लेकर किसान संगठनों और विपक्षी दलों का विरोध जारी है। भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) ने राज्य सरकार पर पर्याप्त परामर्श के बिना कृषि भूमि अधिग्रहण की कोशिश करने का आरोप लगाया है। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि किसानों और अन्य हितधारकों से व्यापक चर्चा के बाद ही इस परियोजना पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

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Created On :   15 July 2026 8:07 PM IST

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