राजस्थान हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध को फिर से चालू करने में देरी को लेकर सरकार को फटकार लगाई
जयपुर, 21 जुलाई (आईएएनएस)। राजस्थान हाईकोर्ट ने रामगढ़ बांध को फिर से चालू करने में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों को 23 जुलाई को बहाली का ठोस प्लान पेश करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि अगर सरकार चाहे तो इस ऐतिहासिक बांध को फिर से जीवित किया जा सकता है। साथ ही, कोर्ट ने लगातार हो रहे कब्जों और बांध में पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट पर चिंता जताई। ये निर्देश सोमवार को एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस भुवन गोयल की बेंच ने बांध के जीर्णोद्धार से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए।
हाईकोर्ट ने जल संसाधन, सिंचाई और राजस्व विभागों के सचिवों और जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 23 जुलाई को रामगढ़ बांध को फिर से जीवित करने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना के साथ व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हों।
सुनवाई के दौरान, एमिकस क्यूरी अभिनव शर्मा ने कोर्ट को बताया कि जमीनी स्तर पर बहुत कम प्रगति हुई है और बांध में पानी का प्राकृतिक बहाव बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि मूल जल निकासी प्रणाली को बहाल करने के लिए कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) की स्थलाकृति की जांच की जाए।
इन बातों पर गंभीरता से विचार करते हुए बेंच ने पाया कि कब्जों, जमीन के अवैध आवंटन, खाइयों और पक्के निर्माणों ने बांध के कैचमेंट एरिया और पानी के प्राकृतिक रास्तों में रुकावट पैदा की है।
स्थानीय निवासियों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील करण राठौड़ ने इस मामले में पक्षकार बनने के लिए एक अर्जी दाखिल की।
उनकी ओर से पेश वकील अंशुमन सक्सेना ने कोर्ट को बताया कि रामगढ़ बांध को फिर से जीवित करने के लिए जनसमर्थन जुटाने के उद्देश्य से जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।
राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे एडवोकेट जनरल राजेंद्र प्रसाद ने हाई कोर्ट को जीर्णोद्धार के प्रयासों में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया। इस मामले ने बांध को बहाल करने के सरकार के पुराने वादों पर भी फिर से ध्यान आकर्षित किया है।
राजस्थान विधानसभा में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत द्वारा दिए गए आश्वासनों के बावजूद, जेडीए और राजस्व विभाग द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्रों की जांच सहित प्रमुख मुद्दों पर प्रगति अभी भी स्पष्ट नहीं है।
बांध के कैचमेंट एरिया में होटलों, रिसॉर्ट्स, कृषि गतिविधियों और अन्य निर्माणों के लिए जारी एनओसी की जांच के लिए गठित विभागीय समिति ने अभी तक अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है। सरकार कथित कब्जों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने में असमर्थ रही है।
खबरों के अनुसार, रोडा और माधोवेनी नदियों के बहाव वाले इलाकों में कृषि गतिविधियां और निर्माण कार्य जारी हैं, जिससे बांध में पानी की आवक और प्रभावित हो रही है। जल संसाधन विभाग के अनुसार, बांध के निचले इलाके (डाउनस्ट्रीम एरिया) का लगभग 930 हेक्टेयर हिस्सा जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में आता है।
अधिकारियों का आरोप है कि इन इलाकों में होटल, रिसॉर्ट और अन्य निर्माण परियोजनाओं के लिए कई एनओसी जारी की गई थीं। निचले इलाके में अवैध निर्माण की शिकायतों के बावजूद, खबरों के अनुसार इस पर बहुत कम कार्रवाई हुई है।
उम्मीद है कि हाईकोर्ट 23 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार की बहाली योजना की समीक्षा करेगा। यह तारीख जयपुर के सबसे महत्वपूर्ण जल स्रोतों में से एक के भविष्य के लिए अहम साबित हो सकती है।
अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|
Created On :   21 July 2026 3:40 PM IST











