राजस्थान विधानसभा समितियों का गठन एक ही समिति में वसुंधरा राजे, गहलोत और पायलट शामिल

राजस्थान विधानसभा समितियों का गठन एक ही समिति में वसुंधरा राजे, गहलोत और पायलट शामिल
राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने 16 विधानसभा समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों की घोषणा कर दी है। इनमें 12 सामान्य समितियां और 4 वित्तीय समितियां शामिल हैं।

जयपुर, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने 16 विधानसभा समितियों के अध्यक्षों और सदस्यों की घोषणा कर दी है। इनमें 12 सामान्य समितियां और 4 वित्तीय समितियां शामिल हैं।

इस गठन की सबसे खास बात यह रही कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को एक साथ विधानसभा की नियम समिति (रूल्स कमेटी) में सदस्य बनाया गया है।

विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी इस समिति के पदेन अध्यक्ष होंगे। समिति में वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है, जिनमें श्रीचंद कृपलानी, चंद्रभान सिंह आक्या, हरीश चौधरी और दीप्ति किरण माहेश्वरी भी शामिल हैं।

16 समितियों में से 11 के अध्यक्ष भाजपा विधायकों को बनाया गया है, जबकि कांग्रेस को 3 समितियों की अध्यक्षता मिली है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को पब्लिक अकाउंट्स कमेटी (पीएसी) का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जो एक अहम वित्तीय समिति मानी जाती है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र पारीक को प्रश्न एवं संदर्भ समिति और नरेंद्र बुधानिया को पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति का अध्यक्ष बनाया गया है।

एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जनरल पर्पज कमेटी का सदस्य बनाया गया है। यह समिति परंपरागत रूप से विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में काम करती है और इसमें 16 सदस्य होते हैं, जिनमें वरिष्ठ विधायक और नेता प्रतिपक्ष भी शामिल रहते हैं।

महिलाओं की भागीदारी की बात करें तो 16 समितियों में सिर्फ एक समिति की अध्यक्ष महिला विधायक को बनाया गया है। भाजपा विधायक कल्पना देवी को महिला एवं बाल कल्याण से जुड़ी समिति की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इन समितियों का कार्यकाल अगले वर्ष 31 मार्च तक रहेगा। नई समितियां विधानसभा की कार्यप्रणाली की निगरानी, नीतियों की समीक्षा और शासन से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

रूल्स कमेटी का मुख्य काम विधानसभा के नियमों की समीक्षा करना, उनमें संशोधन करना और आवश्यक बदलावों की सिफारिश करना होता है, ताकि सदन की कार्यवाही और अधिक सुचारु व प्रभावी बन सके।

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Created On :   9 April 2026 5:00 PM IST

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