'हम अत्यंत आहत, दुखी एवं लज्जित हैं', राम मंदिर चंदा विवाद पर कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का खुला पत्र
अयोध्या, 5 जुलाई (आईएएनएस)। श्री राम जन्मभूमि मंदिर के दानपात्र से हुई चंदा चोरी की घटना को लेकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने भी एक आधिकारिक चिट्ठी जारी कर अपनी सफाई पेश की है।
गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि भगवान श्री सीताराम प्रभु की आत्यंतिक कृपा से लगभग 5 शताब्दियों का भीषण संघर्ष पूर्ण हुआ। साधु, संत, महात्मा, एवं प्रखर रामभक्तों के अविरत प्रवास तथा बलिदानों से श्री अयोध्याधाम में श्रीरामजन्मभूमि के पवित्र स्थान पर भगवान रामलला का भव्य मंदिर खड़ा हुआ। प्रभु की प्राण प्रतिष्ठा हुई और ध्वजारोहण तक सभी कार्य सोत्साह संपन्न हुए। रामभक्तों के लिए वह अत्यंत आनंददायी पर्व रहा। ऐसे मंगलमय वातावरण में अयोध्या मंदिर में घटित अविश्वसनीय अर्थ अपहार की घटना ने रामभक्तों का हृदय विदीर्ण कर दिया। कोटि-कोटि भाविकों द्वारा अत्यंत श्रद्धापूर्वक रामलला की हुंडी में समर्पित की हुई धनराशि की गिनती करते समय चोरी करने का जघन्य महापाप कुछ लोगों ने किया।
उन्होंने कहा कि चढ़ावा-चोरी का यह क्रम पिछले काफी समय से चल रहा था, यह भी प्रकाश में आया। यह सभी रामभक्तों के लिए अत्यंत दुखदायक, भीषण पीड़ादायक है। इससे हम अत्यंत आहत, दुखी एवं लज्जित हैं। श्रीमद् भागवत की पूर्व निर्धारित कथा पूर्ण करके दिनांक 5 जुलाई को मैं श्री अयोध्याजी पहुंच रहा हूं। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष के रूप में मेरा यह विनय निवेदन सभी रामभक्तों के लिए समर्पित है।
उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के व्यासी अथवा कोषाध्यक्ष पद के लिए मैंने ना कभी किसी से निवेदन किया और ना कोई प्रयास किया। प्रभु श्रीराम की सेवा किसी भी रूप में करते रहने में धन्यता एवं आनंद का अनुभव तो है ही। मेरी सतत प्रार्थना है कि प्रभु कृपा से सभी का मंगल हो। मैं लगभग हर महीने-डेढ़ महीने में व्यास के कार्यार्थ अयोध्या आता रहता हूं। मेरे विभाग अथवा अन्य प्रवास के लिए मैंने अब तक एक भी रुपया व्यय के रूप में व्यास से लिया नहीं है। प्रभु श्रीराम की निरपेक्ष सेवा के रूप में यह कार्य करने में धन्यता का अनुभव होता है। कोषाध्यक्ष के दायित्व के रूप में कोष में जमा की गई राशि का आरंभ से लेकर अब तक का लेखा-परीक्षण आय-व्यय का हिसाब सुरक्षित है, जो अधिकृत व्यक्तियों द्वारा कभी भी जांचा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि कोषाध्यक्ष के नाते आय-व्यय का हिसाब रखना मेरा कर्तव्य है। मैं निरंतर प्रवास में रहता हूं, इसलिए हमारे पुणे कार्यालय के चार्टर्ड अकाउंटेंट सहयोगी हर महीने अंतिम 4-5 दिन अयोध्या आकर आय-व्यय की जांच करते हैं तथा व्यास के कार्यालयीन साथियों को सहयोग एवं आवश्यक दिशा-निर्देश भी करते रहते हैं। उन्हीं के भरोसे में हिसाब के बारे में निश्चिंत रह पाता हूं। व्यासी बनने के समय से अबतक स्वयं मैंने किसी से भी कुछ भी नगद राशि अथवा वस्तुरूप भेंट मंदिर के लिए स्वीकार नहीं की। (इसमें दो अपवाद हैं?) मेरी दिवंगत अतिवृद्ध बड़ी बहन से 11000 रुपए दिए तथा नीलम गोऱ्हेजी से चांदी की एक किलो की ईंट पुणे में प्रदान की। इन दोनों की रसीदें उन्हें तुरंत भेज दी गई थी। उसके अलावा कभी किसी व्यक्ति से चेक के अलावा मैंने कभी भी कुछ भी ग्रहण नहीं किया।
गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि राम मंदिर की ओर से किया जाने वाला व्यय सीधे बैंक से होता है। मैं अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हूं, इसलिए वहां पर मेरे हस्ताक्षर नहीं चलते हैं। हमारे पास कोर्ड चेकबुक नहीं है। पेमेंट कभी कैश में नहीं होते, सीधे बैंक ट्रांसफर के माध्यम से ही होते हैं। जो समभक्तों के द्वारा हुंडी में समर्पित चढ़ाया जाता है, उस क्षेत्र से मेरा आरंभ से ही कभी कोई संबंध नहीं रहा। मेरा निवास पुणे में है। कथाओं के निमित्त प्रवास निरंतर चलता है; चढ़ाया गिनने का कार्य प्रतिदिन का दैनिक कार्य है। उसे स्थानिक न्यासी बंधु ही आरंभ से देखते रहे हैं। उसका एसओपी (गणना प्रक्रिया के लिए संयुक्त रूप से निर्धारित दिशा-निर्देश) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ मिलकर उन्होंने ही बनाया है। वह मुझे पिछले महीने पहली बार दिखाया गया।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण चोरी कितनी हुई, कब हुई, कैसे हुई, यह जांच का विषय है। इस महापाप की जांच गहराई से होनी चाहिए। निष्पक्ष होने चाहिए। जांच एजेंसी पर भरोसा रखना चाहिए। न्यायालय अपना कार्य करेगा। एसआईटी और पुलिस पर हमें विश्वास है। दोषी बचेंगे नहीं। सभी को जांच और न्याय व्यवस्था पर पूर्ण विश्वास करना चाहिए। हम मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम के अनन्य भक्त हैं; हम सत्य के साथ हैं। मर्यादा का पालन करते हैं। हमारा आग्रह है कि पुलिस और जांच एजेंसी दोषी को पकड़ें। अपराधी चाहे जितना भी बड़ा क्यों न हो, नाम और पद का विचार किए बिना उसे न्यायालय से सख्त दंड दिलवाया जाए।
उन्होंने कहा कि मैं व्यास के परम सम्मानित सदस्यों से करबद्ध प्रार्थना करूंगा कि भविष्य में पूरी सतर्कता और सावधानी बरतने के लिए अभेद व्यवस्था की जाए। विशेषज्ञों की राय लेकर एक ऐसी प्रबंधन प्रणाली प्रतिस्थापित की जाए जिसमें अचूक निरीक्षण हो और दावपात्र में आई राशि की गिनती में पूर्ण पारदर्शिता हो। प्रभु श्री राम के भक्तों द्वारा किसी भी रूप में दिए जाने वाले दान की पाई-पाई का हिसाब सुनिश्चित हो। हमें विश्वास है भगवान श्रीराम की कृपा से संशय के बादल छटेंगे, अपराध का अंधकार दूर होगा। भविष्य में हमारा प्रयास होगा कि हमारे समलला का मंदिर विश्व में आदर्श का मंदिर हो। श्रीराम भक्ति की धारा अखंड बहती रहे. हमें रामराज्य लगे तक साधना करनी है। भगवान सवातय धर्म और राम मंदिर की कृति को धूमिल करने के किसी प्रयास को सफल नहीं होने देंगे। यह हमारा अटूट विश्वास है।
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Created On :   5 July 2026 6:47 PM IST












