Delhi News: Repo Rate बढ़ने के बाद घर खरीदना सही फैसला या करें इंतजार? जानें एक्सपर्ट की राय

Repo Rate बढ़ने के बाद घर खरीदना सही फैसला या करें इंतजार? जानें एक्सपर्ट की राय
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी है। रेपो रेट बढ़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसका असर होम लोन, ईएमआई और रियल एस्टेट की मांग पर हो रही है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी है। रेपो रेट बढ़ने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसका असर होम लोन, ईएमआई और रियल एस्टेट की मांग पर हो रही है। हालांकि, रियल एस्टेट सेक्टर का मानना है कि इस बढ़ोतरी से बाजार पर तत्काल बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है, लेकिन होम लोन की लागत बढ़ने पर कुछ खरीदार अपने खरीदारी के फैसले को लेकर ज्यादा सतर्क हो सकते हैं।

रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब इसमें बढ़ोतरी होती है तो बैंकों के लिए फंड की लागत बढ़ सकती है और इसका असर आगे चलकर लोन की ब्याज दरों पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में नए होम लोन लेने वाले ग्राहकों के साथ-साथ फ्लोटिंग रेट वाले मौजूदा कर्जदारों की ईएमआई पर भी असर पड़ सकता है।

EMI बढ़ने से खरीदारों का बजट हो सकता है प्रभावित

रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन लंबे समय के होम लोन में छोटी ब्याज दर बढ़ोतरी भी कुल भुगतान को प्रभावित कर सकती है। खासकर पहली बार घर खरीदने वाले और बजट सेगमेंट के खरीदार अपनी ईएमआई को लेकर ज्यादा सावधानी बरत सकते हैं।

Karan Khanna, Founder, Apec Acreage Pvt Ltd, ने कहा, “आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.25% से 5.50% करना एक संतुलित कदम है। इसका हाउसिंग सेक्टर पर कितना असर होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक अपनी लोन की ब्याज दरों में कितना बदलाव करते हैं और उसका असर ग्राहकों पर कितना पड़ता है। फिलहाल रेजिडेंशियल रियल एस्टेट में अच्छी मांग बनी हुई है।”

क्या घर खरीदने का फैसला टल सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दर बढ़ने के बाद कुछ खरीदार घर खरीदने का फैसला थोड़े समय के लिए टाल सकते हैं। हालांकि, मौजूदा समय में घर खरीदने का फैसला केवल ब्याज दरों से तय नहीं होता। लोकेशन, कनेक्टिविटी, प्रोजेक्ट की गुणवत्ता, सुविधाएं और रोजगार के अवसर भी खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं।

Aman Trehan, Executive Director, Trehan IRIS, ने कहा, “आज का रेजिडेंशियल रियल एस्टेट बाजार पहले के मुकाबले काफी बदल चुका है। खरीदारों को मौजूदा ब्याज दरों और लोन की लागत के साथ खुद को ढालने का पर्याप्त समय मिल चुका है। अब घर खरीदने के फैसले में लोग ब्याज दर के साथ-साथ घर की गुणवत्ता, लोकेशन और अर्थव्यवस्था की स्थिति को भी ध्यान में रख रहे हैं। ऐसे में रेपो रेट में हालिया बढ़ोतरी से रियल एस्टेट बाजार की मांग पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है।”

टियर-2 और टियर-3 शहरों पर कितना असर?

रेपो रेट बढ़ने का असर सभी बाजारों में एक जैसा नहीं होगा। किफायती और मिड-सेगमेंट हाउसिंग में ईएमआई का महत्व ज्यादा होता है, इसलिए इन बाजारों में खरीदार ब्याज दरों को लेकर अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।

Sunil Goyal, Managing Director, Numax Group, ने कहा, “रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर मुख्य रूप से होम लोन की ब्याज दरों के जरिए देखने को मिलेगा। खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों में, जहां घर खरीदने वाले ब्याज दरों और ईएमआई को लेकर अधिक संवेदनशील होते हैं, वहां कुछ समय के लिए खरीदारों की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, इसका असर बहुत बड़ा होने की संभावना नहीं है, क्योंकि इन शहरों में किफायती और मिड-सेगमेंट आवास की मांग मजबूत बनी हुई है।”

खरीदार कर सकते हैं ज्यादा मोलभाव

ब्याज दर बढ़ने के बाद खरीदार प्रॉपर्टी की कीमत, भुगतान योजना और डेवलपर की ओर से मिलने वाले ऑफर्स पर ज्यादा बातचीत कर सकते हैं। इससे डेवलपर्स को बिक्री बढ़ाने के लिए बेहतर भुगतान योजनाएं, ऑफर्स और प्राइसिंग स्ट्रैटेजी पर काम करना पड़ सकता है।

Ashwinder R. Singh, Vice Chairman, BCD Group और Chairman, CII Committee on Real Estate, के मुताबिक, रेपो रेट बढ़ने का असर केवल रियल एस्टेट की मांग पर नहीं पड़ेगा, बल्कि खरीदारों के व्यवहार पर भी देखने को मिलेगा। खरीदार कीमतों को लेकर ज्यादा बातचीत कर सकते हैं और बैंक तथा वित्तीय संस्थान लोन देने में अधिक सावधानी बरत सकते हैं। हालांकि, उनके मुताबिक यह अनुशासन लंबे समय में रियल एस्टेट सेक्टर के लिए फायदेमंद हो सकता है।

कमर्शियल और रिटेल रियल एस्टेट पर सीमित असर

रेपो रेट बढ़ने का असर केवल रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी तक सीमित नहीं है। कमर्शियल और रिटेल रियल एस्टेट पर भी इसका असर देखा जा सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इस सेगमेंट को ब्याज दरों के अलावा उपभोक्ता खर्च, कारोबार के विस्तार और आर्थिक गतिविधियों से भी काफी समर्थन मिलता है।

Arjun Gehlot, Director, Ambience Group, ने कहा, “रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी से कमर्शियल रियल एस्टेट के आउटलुक में बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है। मॉल और रिटेल डेस्टिनेशन का कारोबार ब्याज दरों में छोटे समय के बदलाव के बजाय लोगों के खर्च, रिटेल कंपनियों के विस्तार और कुल कारोबारी गतिविधियों से ज्यादा प्रभावित होता है।”

वहीं, संजय शर्मा, डायरेक्टर, एसकेए ग्रुप ने कहा, “आरबीआई द्वारा रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.5% करना भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और आगे की ग्रोथ में भरोसे को दिखाता है। रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी स्थिति मजबूत बनी हुई है। घरों की लगातार मांग, लोगों की बढ़ती आकांक्षाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से इस सेक्टर को मजबूती मिल रही है। हम रेजिडेंशियल रियल एस्टेट के लिए इसे एक सकारात्मक दौर मानते हैं। आज घर खरीदार अच्छी गुणवत्ता, बेहतर तरीके से प्लान की गई सोसाइटी और लंबे समय में अच्छी वैल्यू देने वाले प्रोजेक्ट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रियल एस्टेट की मजबूत बुनियाद और खरीदारों की बदलती पसंद आने वाले समय में डेवलपर्स और घर खरीदारों, दोनों के लिए अच्छे अवसर पैदा करती रहेगी।”

कुल मिलाकर, रेपो रेट में बढ़ोतरी से कमर्शियल और रिटेल रियल एस्टेट पर वित्तीय लागत का कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन मजबूत उपभोक्ता मांग, कारोबार का विस्तार और बेहतर कमर्शियल प्रॉपर्टी की जरूरत सेक्टर को सपोर्ट करती रहेगी। खासकर ऐसे मॉल और रिटेल डेस्टिनेशन जिनमें शॉपिंग के साथ मनोरंजन और फूड जैसी सुविधाएं हैं, आने वाले समय में मजबूत मांग का लाभ उठा सकते हैं।

कुल मिलाकर क्या होगा असर?

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी को एक ऐसा बदलाव माना जा रहा है, जिसका असर बाजार पर धीरे-धीरे दिखाई दे सकता है। होम लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने पर ईएमआई बढ़ सकती है और कुछ खरीदार अपने बजट की दोबारा समीक्षा कर सकते हैं। इसके बावजूद मजबूत आवासीय मांग, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और रोजगार के अवसर रियल एस्टेट बाजार को सपोर्ट कर सकते हैं।

Created On :   7 Oct 2026 8:53 PM IST

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