झारखंड में धान खरीद लक्ष्य से पीछे, दो दिन में 14 लाख क्विंटल की चुनौती

झारखंड में धान खरीद लक्ष्य से पीछे, दो दिन में 14 लाख क्विंटल की चुनौती
वित्तीय वर्ष 2025-26 अपने अंतिम चरण में है, लेकिन झारखंड में धान खरीद की रफ्तार लक्ष्य के मुकाबले काफी पीछे चल रही है। सरकार ने इस वर्ष 60 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य तय किया था, जबकि अब तक कुल 46.27 लाख क्विंटल की ही खरीद हो पाई है। यानी लक्ष्य हासिल करने के लिए करीब 14 लाख क्विंटल धान अभी भी खरीदा जाना बाकी है, जो बचे हुए समय को देखते हुए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

रांची, 29 मार्च (आईएएनएस)। वित्तीय वर्ष 2025-26 अपने अंतिम चरण में है, लेकिन झारखंड में धान खरीद की रफ्तार लक्ष्य के मुकाबले काफी पीछे चल रही है। सरकार ने इस वर्ष 60 लाख क्विंटल धान खरीदने का लक्ष्य तय किया था, जबकि अब तक कुल 46.27 लाख क्विंटल की ही खरीद हो पाई है। यानी लक्ष्य हासिल करने के लिए करीब 14 लाख क्विंटल धान अभी भी खरीदा जाना बाकी है, जो बचे हुए समय को देखते हुए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है।

जिलावार स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। पश्चिमी सिंहभूम, सिमडेगा, साहेबगंज, पाकुड़, लोहरदगा और खूंटी जैसे जिलों में खरीद का आंकड़ा एक लाख क्विंटल तक भी नहीं पहुंच सका है। इससे साफ है कि कुछ क्षेत्रों में खरीद प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाई है।

धान खरीद अभियान की शुरुआत 15 दिसंबर 2025 से की गई थी। किसानों को बेहतर मूल्य देने के उद्देश्य से इस बार 2,450 रुपए प्रति क्विंटल की दर तय की गई, जिसमें प्रोत्साहन राशि भी शामिल है। यह दर पिछले वर्ष के 2,400 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक है। अब तक किसानों को कुल 784.43 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है, जिसमें 24.16 करोड़ रुपए प्रोत्साहन राशि के तौर पर शामिल हैं।

राज्य में धान खरीद के लिए 801 क्रय केंद्र बनाए गए हैं, ताकि किसानों से सीधे खरीद सुनिश्चित की जा सके। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कई जगहों पर प्रक्रियात्मक और व्यवस्थागत बाधाएं सामने आ रही हैं, जिससे खरीद की गति प्रभावित हुई है। हालांकि, पिछले वर्षों की तुलना में इस साल धान खरीद की स्थिति में काफी सुधार देखा गया है।

वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 में लक्ष्य का मात्र 29 प्रतिशत ही हासिल किया जा सका था, जबकि 2024-25 में यह बढ़कर 67 प्रतिशत (40.8 लाख क्विंटल) पहुंचा था। इस वर्ष अब तक लगभग 77 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे बेहतर प्रदर्शन है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दर में वृद्धि और क्रय केंद्रों की सक्रियता ने खरीद की रफ्तार बढ़ाई है, लेकिन कुछ जिलों में प्रशासनिक सुस्ती के कारण 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना अब भी दूर की कौड़ी नजर आता है।

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Created On :   29 March 2026 2:12 PM IST

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