'मायका' से मिली वैश्विक पहचान, पर अब भी टर्निंग पॉइंट की तलाश में हैं विनीत रैना

मायका से मिली वैश्विक पहचान, पर अब भी टर्निंग पॉइंट की तलाश में हैं विनीत रैना
अभिनेता विनीत रैना इन दिनों अपने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। अभिनेता ने हाल ही में आईएएनएस के साथ खास बातचीत की और बताया कि 'मायका' सीरियल ने उन्हें ग्लोबली पहचान दिलाई थी।

मुंबई, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। अभिनेता विनीत रैना इन दिनों अपने आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट को लेकर सुर्खियों में बने हुए हैं। अभिनेता ने हाल ही में आईएएनएस के साथ खास बातचीत की और बताया कि 'मायका' सीरियल ने उन्हें ग्लोबली पहचान दिलाई थी।

अभिनेता ने कहा, "जहां तक मुझे लगता है कि मेरे लाइफ का टर्निंग पॉइंट अभी तक आया नहीं है और अभी भी मैं उसकी तलाश में हूं। मैंने कभी कोई खास सीमा तय नहीं की कि कोई एक पल ही मेरे करियर को पूरा परिभाषित कर दे। हालांकि, मुझे अपनी पहली बड़ी पहचान जी टीवी के शो 'मायका- साथ जिंदगी भर का' से मिली थी। मेरे किरदार वीर खुराना को पूरे भारत के साथ-साथ विदेशों में भी बहुत पसंद किया गया था। इस शो ने मुझे देश-विदेश में अच्छी पहचान दिलाई थी।"

उन्होंने आगे बताया कि 'मायका' के बाद उन्होंने कई चैनलों पर कई लोकप्रिय शो किए। हर शो से उन्हें नया अनुभव और सीख मिली।

अभिनेता ने टीवी इंडस्ट्री में बदलाव और बदलते ट्रेंड को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "बदलाव तो होना ही है। यही एकमात्र ऐसी चीज है जो कभी नहीं बदलती। इंडस्ट्री हमेशा बदलती रहेगी और ट्रेंड्स भी बदलते रहेंगे। असली बात यह है कि आप खुद को कितना अपडेट और अपग्रेड करते हैं, ठीक वैसे ही जैसे मोबाइल फोन को समय-समय पर अपडेट करना पड़ता है। मेरा हमेशा से यही मानना रहा है कि अगर आप खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान देंगे, तो बाहर कितना भी बदलाव क्यों न आए, आप खुद-ब-खुद उसके हिसाब से ढल जाएंगे।"

अभिनेता ने कई टीवी शोज में काम किया और ओटीटी पर भी काम किया है। उन्होंने दोनों में अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, "हर माध्यम की अपनी अलग खासियत होती है। एक अच्छे एक्टर होने के नाते मुझे लगता है कि अगर मौका मिले तो हर प्लेटफॉर्म पर काम करना चाहिए। मैं खुद को कभी सिर्फ टीवी, सिर्फ फिल्म या सिर्फ ओटीटी तक सीमित नहीं रखता।"

विनीत रैना ने आगे नेपोटिज्म को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, "कुछ हद तक पक्षपात हर जगह होता ही है। टीमें उन लोगों के साथ काम करना पसंद करती हैं, जिनके साथ उन्हें सहज महसूस होता है। यह बात समझ में आती है, लेकिन जानबूझकर गुटबाजी करना और मौके सिर्फ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित रखना रचनात्मकता के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है।"

अभिनेता ने इस बात को भी साफ किया कि व्यक्तिगत तौर पर उन्हें ऐसी किसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

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Created On :   4 April 2026 2:40 PM IST

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