वन नेशन, वन इलेक्शन पर सपा का विरोध, लाल बिहारी यादव ने रखी 'वन नेशन, वन एजुकेशन' की मांग

वन नेशन, वन इलेक्शन पर सपा का विरोध, लाल बिहारी यादव ने रखी वन नेशन, वन एजुकेशन की मांग
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में विपक्ष के नेता लाल बिहारी यादव ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर बुलाई बैठक पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन से पहले वन नेशन वन एजुकेशन के संबंध में बिल प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

लखनऊ, 14 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में विपक्ष के नेता लाल बिहारी यादव ने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर बुलाई बैठक पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन से पहले वन नेशन वन एजुकेशन के संबंध में बिल प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रकार के पाठ्यक्रम हैं, जिसके तहत गरीबों और अमीरों को दी जाने वाली शिक्षा में अंतर है। लिहाजा एक ऐसी व्यवस्था को जन्म दिया जाना चाहिए, ताकि समाज के विभिन्न तबके के लोगों को एक समान शिक्षा मिल सके। आईएएस और आईपीएस की परीक्षाओं में प्रश्न पत्र एक होते हैं, लेकिन पाठ्यक्रम विभिन्न प्रकार के होने चाहिए।

उनके मुताबिक, हमने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्रीय पार्टियां मुख्य रूप से स्थानीय मुद्दों का जिक्र करके चुनाव लड़ती है। राष्ट्रीय पार्टियां राष्ट्रीय मुद्दों पर चुनाव लड़ती है, लिहाजा दोनों ही पार्टियों के मुद्दे अलग होते हैं। ऐसी स्थिति में दोनों के बीच अलग-अलग मुद्दों पर चुनाव होना चाहिए, जिसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए। इसका आकलन नहीं किया जाना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हमें मौजूदा समय में इस बात पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए कि एक साथ चुनाव कराने में ज्यादा पैसा लगेगा। इसके लिए हमें ज्यादा से ज्यादा संसाधन बनाने पड़ेंगे और जब अलग-अलग चुनाव कराने की बात होती है, तो वही मशीनें अलग-अलग उपयोग में लाई जाती है, क्योंकि मूल रूप से किसी एक मशीन की मियाद 15 साल से ज्यादा नहीं होती है, इसलिए ऐसी स्थिति में खर्च भी कम होगा और मुद्दे भी जिंदा रहेंगे। मान लीजिए कोई चुनाव हो गया हो और कोई विधानसभा अगर भंग हो गई हो, तो ऐसी स्थिति में क्या किया जाएगा। क्या अब ऐसी स्थिति में पूरी पार्लियामेंट को भंग किया जाएगा? क्या सभी विधानसभाओं को भंग किया जाएगा? हमने इस बैठक में धारा 356 का भी जिक्र किया। हम सभी लोगों का इसका भी ध्यान रखना चाहिए। इन्हीं सब स्थिति को देखते हुए समाजवादी पार्टी वन नेशन वन इलेक्शन के पक्ष में बिल्कुल भी नहीं है।

उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि सभी क्षेत्रीय पार्टियां स्थानीय मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ें और राष्ट्रीय पार्टियों के मुद्दे अलग होते हैं, उनके लिए मुख्य रूप से विदेश नीति जैसे मुद्दे प्रमुख रहते हैं। ऐसी स्थिति में दोनों चुनावों को एक साथ कराना उचित नहीं रहेगा। यह सभी चुनाव अलग होने चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार से स्थिति पेचीदा नहीं हो। ऐसा समाजवादी पार्टी का विचार है।

बीजेपी एमएलसी पवन सिंह चौहान ने भी वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक, वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी (जेपीसी) की बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में वन नेशन वन इलेक्शन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। निश्चित तौर पर सभी लोगों ने अपने-अपने पक्ष रखें। ज्यादातर लोगों ने वन नेशन वन इलेक्शन को लेकर अपनी सहमति जताई, ताकि जो बारंबार चुनाव होने की वजह से जिस तरह से समय की बर्बादी होती है, उस पर रोक लगाई जा सके। खासकर यूपी और बिहार जैसे राज्यों में तो हर घर में चुनाव होते हैं। इससे पारस्परिक वैमनस्यता बढ़ती है। इससे विकास कार्य बाधित होते हैं। हमारे स्कूलों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है। इस वजह से शैक्षणिक कार्य बाधित होते हैं। ऐसी स्थिति में मुझे लगता है कि हम सभी को मिलकर वन नेशन वन इलेक्शन को सहमति जताई जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन की वजह से फिजूल खर्च पर भी अंकुश लगेगा। सबसे ज्यादा नुकसान विकास कार्यों का होता है। इससे विकास कार्य बाधित होते हैं। हमारे हिंदुस्तान में हर बार कोई न कोई चुनाव होता है। ऐसी स्थिति में जब हम किसी सम्मेलन में जाते हैं तो वहां पर चुनाव की ही बातें रहती हैं। रही बात विपक्ष की तो कुछ सहमति जता रहे हैं तो कुछ लोग असहमति जता रहे हैं।

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Created On :   14 July 2026 4:39 PM IST

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