पर्यटन के लिए अल्मोड़ा का अनमोल रत्न है कसार देवी मंदिर, सीएम धामी ने किया वीडियो पोस्ट

पर्यटन के लिए अल्मोड़ा का अनमोल रत्न है कसार देवी मंदिर, सीएम धामी ने किया वीडियो पोस्ट
देवभूमि उत्तराखंड अपनी खूबसूरत वादियों के लिए दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन अल्मोड़ा की पहाड़ियों में प्राचीन कसार देवी मंदिर है, जो अपनी आध्यात्मिकता और कुछ रहस्यमयी तथ्यों को लेकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचता है।

उत्तराखंड, 24 मार्च (आईएएनएस)। देवभूमि उत्तराखंड अपनी खूबसूरत वादियों के लिए दुनियाभर में मशहूर है, लेकिन अल्मोड़ा की पहाड़ियों में प्राचीन कसार देवी मंदिर है, जो अपनी आध्यात्मिकता और कुछ रहस्यमयी तथ्यों को लेकर सभी का ध्यान अपनी ओर खींचता है।

यह मंदिर अल्मोड़ा शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर का इतिहास और यहां की कुछ पौराणिक कहानियां प्रसिद्ध हैं। माना जाता है कि यह अल्मोड़ा में स्थित एक प्राचीन (2वीं शताब्दी) और पवित्र शक्तिपीठ है, जो अपनी अलौकिक शांति और वैज्ञानिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को इस मंदिर के बारे में बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, "जनपद अल्मोड़ा में स्थित प्राचीन एवं दिव्य शक्ति स्थल 'कसार देवी मंदिर' अपनी अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा और ध्यान के लिए विश्वविख्यात है। यहां का शांत, स्वच्छ और मनोहारी वातावरण इसकी दिव्यता का और भी गहराई से अनुभव कराता है। आप भी अल्मोड़ा आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।"

यह मंदिर न सिर्फ भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है, बल्कि उन लोगों के लिए भी खास है जो आध्यात्मिक शांति और वैज्ञानिक रहस्य दोनों का अनुभव करना चाहते हैं।

कसार देवी मंदिर पूरे भारत में इकलौती ऐसी जगह है जहां धरती के अंदर मौजूद अनोखी चुंबकीय शक्तियां काम करती हैं। माना जाता है कि इसी स्थान पर देवी मां साक्षात अवतरित हुई थीं। इस पूरे क्षेत्र के नीचे विशाल भू-चुंबकीय पिंड मौजूद हैं और इसे विज्ञान की भाषा में 'वैन एलेन बेल्ट' कहा जाता है। कहा जाता है कि भू-चुंबकीय पिंड मौजूद होने के कारण नासा ने मंदिर में आकर रिसर्च की थी।

नासा के अनुसार, यह स्थान दुनिया में उन चुनिंदा जगहों में से एक है (जैसे पेरू का माचू पिच्चू और इंग्लैंड का स्टोनहेंज) जहां 'वैन एलेन बेल्ट' के कारण अद्वितीय भू-चुंबकीय ऊर्जा है।

इस मंदिर का निर्माण दूसरी शताब्दी में हुआ था। यहां कसार देवी माता की पूजा की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा के छठवें स्वरूप कात्यायनी देवी का रूप माना जाता है। यह जगह अब अपनी शांति, ध्यान और हिमालय के अद्भुत दृश्यों के कारण युवाओं और पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गई है।

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Created On :   24 March 2026 12:41 PM IST

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