शिक्षा के निजीकरण और केंद्रीयकरण के खिलाफ शिक्षकों को सामाजिक भूमिका निभानी होगी दीपंकर भट्टाचार्य

शिक्षा के निजीकरण और केंद्रीयकरण के खिलाफ शिक्षकों को सामाजिक भूमिका निभानी होगी दीपंकर भट्टाचार्य
भाकपा(माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने रविवार को कहा कि शिक्षा के निजीकरण, व्यापारीकरण और केंद्रीयकरण के खिलाफ शिक्षकों को अपनी सामाजिक भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के सवाल को केवल शिक्षकों की सेवा-शर्तों तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में हो रहे वैचारिक हस्तक्षेप के खिलाफ भी व्यापक बहस और आंदोलन की जरूरत है।

पटना, 4 अक्टूबर (आईएएनएस)। भाकपा(माले) महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने रविवार को कहा कि शिक्षा के निजीकरण, व्यापारीकरण और केंद्रीयकरण के खिलाफ शिक्षकों को अपनी सामाजिक भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के सवाल को केवल शिक्षकों की सेवा-शर्तों तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में हो रहे वैचारिक हस्तक्षेप के खिलाफ भी व्यापक बहस और आंदोलन की जरूरत है।

पटना के आईएमए हॉल में आयोजित ‘शिक्षा बचाओ, देश बचाओ’ सेमिनार को संबोधित करते हुए दीपंकर ने नई शिक्षा नीति-2020 के खिलाफ व्यापक शिक्षक एकता और छात्र आंदोलनों के समर्थन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मीडिया, सिनेमा और शिक्षण संस्थानों के माध्यम से समाज की सोच को प्रभावित करने की कोशिशों के बीच शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। नीतीश कुमार सरकार ने शिक्षा सुधार आयोग के जरिए समान स्कूल प्रणाली की दिशा में पहल की थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसी तरह भूमि सुधार आयोग की रिपोर्ट भी लागू नहीं की गई। उन्होंने कहा कि बिहार में जिन क्षेत्रों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है, उनमें शिक्षा प्रमुख है।

दीपंकर ने नागरिकता कानून के खिलाफ आंदोलन, किसान और मजदूर आंदोलनों तथा पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार में स्कूली छात्रों के बीच ‘स्कूल ठीक करो’ जैसे सवाल उठ रहे हैं। जेनरेशन अल्फा के इन आंदोलनों में शिक्षकों को भी भागीदार बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिहार में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए और इस प्रक्रिया में शिक्षकों को भी लगाया गया था। अब शिक्षकों को मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों के नाम फिर से जुड़वाने की लोकतांत्रिक मुहिम में भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर और ज्योतिबा फुले-सावित्रीबाई फुले के शिक्षा और सामाजिक बराबरी के विचारों को याद करते हुए कहा कि पूरे वर्ष शिक्षा, सामाजिक समानता और फुले-आंबेडकर की विचारधारा के सवालों पर व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है। सेमिनार के उद्घाटनकर्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. राजीव कुंवर ने कहा कि शिक्षा समवर्ती सूची का विषय है, लेकिन नई शिक्षा नीति के जरिए इसके बढ़ते केंद्रीयकरण की प्रक्रिया सामने आई है। उन्होंने कहा कि शिक्षक आंदोलन को मजबूत करने के लिए शिक्षा को व्यापक जनआंदोलन का मुद्दा बनाना होगा।

पालीगंज विधायक संदीप सौरभ ने कहा कि बिहार के शिक्षकों को सरकारी शिक्षक का दर्जा मिलने के बावजूद अभी सरकारी वेतनमान और समुचित अधिकार नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों के अधिकार और शिक्षा की रक्षा के लिए सभी शिक्षक संगठनों को एक मंच पर आने की जरूरत बताई। विधान परिषद सदस्य शशि यादव ने शिक्षा के निजीकरण, व्यापारीकरण और सांप्रदायीकरण के खिलाफ आवाज बुलंद करने तथा शिक्षा के अधिकार के लिए चल रहे छात्र आंदोलनों के साथ खड़े होने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (गोपगुट) के अध्यक्ष रामबली प्रसाद, महासचिव प्रेमचंद सिन्हा, प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य अध्यक्ष प्रदीप राय सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और शिक्षा आंदोलन से जुड़े लोग मौजूद रहे।

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Created On :   4 Oct 2026 8:24 PM IST

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