ताजिकिस्तान रिपब्लिक के विदेश मंत्री से मिले सीबी जॉर्ज
दुशांबे/नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के सेक्रेटरी (वेस्ट), राजदूत सिबी जॉर्ज ने बुधवार को ताजिकिस्तान रिपब्लिक के विदेश मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात की। ये मुलाकात ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में हुई। इस दौरान दोनों ने आपसी रिश्ते में हुई प्रगति की समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत की।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने आधिकारिक एक्स पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। बताया कि राजदूत सिबी जॉर्ज ने ताजिकिस्तान रिपब्लिक के विदेशी मामलों के मंत्री सिरोजिद्दीन मुहरिद्दीन से मुलाकात की। उन्होंने द्विपक्षीय रिश्तों की समीक्षा की और समान रुचि के क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
'इंडिया-ताजिकिस्तान फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन' का 5वां राउंड भी दुशांबे में हुआ। जिसकी सह अध्यक्षता सेक्रेटरी (वेस्ट) और विदेश मामलों के उप मंत्री, इदिबेक कलंदर ने की।
दोनों देशों ने व्यापार और आर्थिक संबंध, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, फिनटेक, फार्मास्यूटिकल्स, संस्कृति, और पीपुल-टू-पीपुल संबंधों जैसे आपसी रुचि के क्षेत्रों को ध्यान में रख मौजूदा द्विपक्षीय संबंधों की विस्तृत समीक्षा की।
भारत और ताजिकिस्तान के बीच संबंध, विशेष रूप से व्यापार और आर्थिक सहयोग के माध्यम से, पिछले 25 वर्षों में काफी विकसित हुए हैं। सोवियत संघ के विघटन के बाद, दोनों देशों द्वारा द्विपक्षीय संबंधों को तेज करने के लिए नियमित रूप से उच्च-स्तरीय राजनयिक यात्राओं को अंजाम दिया जाता रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2015 में ताजिकिस्तान की यात्रा पर गए, तो ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान वर्ष 2016 में भारत यात्रा पर आए थे।
दोनों देशो ने दवाई, पर्यावरण, पर्यटन सुविधा, तकनीकी, तथा अंतकवाद, उग्रवाद, मानव व ड्रग्स तस्करी, और अफगानिस्तान में अस्थिरता और अशांति की समस्या आदि क्षेत्र में साथ मिल काम करने पर सहमति जताई है। 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति रहमान के साथ अपनी वार्ता के बाद हस्ताक्षर किए गए सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में से एक आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष, अन्य समझौता, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंक वित्तपोषण से संबंधित मुद्दे थे।
भारत के लिए ताजिकिस्तान रणनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है। इसकी सीमाएं पाकिस्तान, अफगानिस्तान और चीन से लगती हैं। इस वजह से यह भारत के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। दोनों देश आतंकवाद-विरोधी और रक्षा सहयोग पर संयुक्त कार्य समूहों के माध्यम से सक्रिय रूप से काम करते रहे हैं। हाल ही में नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग बढ़ाने और व्यापार व आर्थिक संबंधों को गहरा करने पर चर्चा हुई थी।
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Created On :   1 April 2026 5:14 PM IST












