लोकसभा: कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा - मानव-जंगली जीव संघर्ष की रोकथाम के लिए गाइडलाइंस और स्कीमों के जरिए राज्यों को हर मुमकिन मदद

कीर्तिवर्धन सिंह ने कहा - मानव-जंगली जीव संघर्ष की रोकथाम के लिए गाइडलाइंस और स्कीमों के जरिए राज्यों को हर मुमकिन मदद
  • सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे ने राज्य समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में मानव-जंगली जीव संघर्ष का मुद्दा उठाया
  • मानव-जंगली जीव संघर्ष की रोकथाम मुख्य रूप से राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है

New Delhi News. महाराष्ट्र के शिरडी लोकसभा क्षेत्र से शिवसेना (उद्धव) सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे ने राज्य समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में मानव-जंगली जीव संघर्ष के मामले को बुधवार को लोकसभा में उठाया। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु मंत्री ने वाकचौरे के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि मानव-जंगली जीव संघर्ष की रोकथाम मुख्य रूप से राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है, लेकिन केंद्र सरकार अलग-अलग कानूनों, गाइडलाइंस और स्कीमों के जरिए राज्यों को हर मुमकिन मदद दे रही है।

कीर्तिवर्धन सिंह ने आगे बताया कि हाथी, बाघ, तेंदुआ, भालू, सांप, बंदर, जंगली सूअर, नीलगाय और काले हिरण जैसे जानवरों से जुड़े संघर्षों को कम करने के लिए 21 मार्च 2023 को साथ रहने पर आधारित प्रजातियों के लिए खास गाइडलाइन जारी की गई हैं। प्रबंधन को और असरदार बनाने के लिए सरकार ने वाइल्डलाइफ (प्रोटेक्शन) एक्ट में बदलाव किया है।

मंत्रालय ने 6 फरवरी 2021 को मानव-जंगली जीव संघर्ष पर एक एडवाइजरी और 3 जून 2022 को फसल नुकसान समेत संघर्ष मैनेजमेंट के लिए गाइडलाइंस भी जारी की हैं। संघर्ष से प्रभावित इलाकों की पहचान, रैपिड रिस्पांस टीम, मुआवजा सिस्टम, साथ ही रेडियो-कॉलरिंग और डिजिटल सर्विलांस सिस्टम जैसी मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा, प्रोजेक्ट टाइगर, प्रोजेक्ट एलीफेंट जैसी जरूरी स्कीम के जरिए राज्यों को वित्तीय मदद दी जा रही है।

Created On :   1 April 2026 5:33 PM IST

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