उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 4 अप्रैल को बिहार का करेंगे दौरा

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 4 अप्रैल को बिहार का करेंगे दौरा
भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 4 अप्रैल यानी शनिवार को बिहार का दौरा करेंगे।

नई दिल्ली, 3 अप्रैल (आईएएनएस)। भारत के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन 4 अप्रैल यानी शनिवार को बिहार का दौरा करेंगे।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन अपने इस दौरे में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के तीसरे दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लेंगे। इसके बाद वह पश्चिम चंपारण में भितिहरवा गांधी आश्रम भी जाएंगे।

बता दें कि इससे पहले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने बुधवार को नई दिल्ली के संविधान सदन में लोकसभा सचिवालय द्वारा प्रकाशित और राज्यसभा सांसद सुधा मूर्ति द्वारा लिखित पुस्तक 'टाइड्स ऑफ टाइम: हिस्ट्री थ्रो म्यूरल्स इन पार्लियामेंट' का विमोचन किया था।

इस अवसर पर उन्होंने सुधा मूर्ति की 'संसदीय भित्ति चित्रों की शाश्वत सुंदरता और गहन प्रतीकात्मकता' को चित्रित करने के साथ-साथ पीढ़ियों से लोगों को इतिहास से जोड़ने के उनके प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि संविधान सदन के भित्ति चित्र (म्यूरल पेंटिंग) मात्र कलाकृतियां नहीं हैं, बल्कि भारत की सभ्यतागत यात्रा को प्रतिबिंबित करने वाली दृश्य कथाएं हैं।

उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला था कि उत्तर में वैशाली से लेकर दक्षिण में कुडावोलाई प्रणाली तक भारत में लोकतांत्रिक प्रथाएं निरंतर, समावेशी और समाज में गहराई से समाई हुई हैं। ये परंपराएं एक व्यापक सभ्यतागत लोकाचार का हिस्सा हैं जो संवाद, आम सहमति और विविध विचारों के सम्मान को महत्व देता है, जिससे भारत 'लोकतंत्र की जननी' बन जाता है।

उपराष्ट्रपति ने महान तमिल कवि सुब्रमण्यम भारती का जिक्र करते हुए भारत के ज्ञान, गरिमा, दानशीलता और सांस्कृतिक गहराई की समृद्धि को रेखांकित किया और कहा कि ऐसी नींव स्वाभाविक रूप से समावेशिता और सभी आवाजों के सम्मान को बढ़ावा देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में संसद भवन में पारंपरिक प्रतीकों के समावेश की सराहना की। उन्होंने संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति के संबोधन के दौरान चोल वंश के पवित्र सेन्गोल के औपचारिक प्रदर्शन का भी उल्लेख किया और इसे आधुनिक भारत को उसकी सभ्यतागत जड़ों से जोड़ने वाला एक सशक्त प्रतीक बताया।

उन्होंने कहा कि संसद एक जीवंत लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों, संवाद, वाद-विवाद, असहमति और चर्चा का प्रतिनिधित्व करती है। चर्चा, वाद-विवाद और असहमति महत्वपूर्ण हैं लेकिन अंततः इनका योगदान राष्ट्रीय हित में रचनात्मक निर्णय लेने में होना चाहिए।

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Created On :   3 April 2026 5:13 PM IST

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