Education System News: शिक्षा पर कांग्रेस का श्वेतपत्र की मांग, जीतू पटवारी ने गिनाए स्कूलों से विश्वविद्यालय तक के आंकड़े

शिक्षा पर कांग्रेस का श्वेतपत्र की मांग, जीतू पटवारी ने गिनाए स्कूलों से विश्वविद्यालय तक के आंकड़े
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर सवालों को लेकर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संबोधित पत्रकार वार्ता को संबोधित किया।

भास्कर ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आज शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर सवालों को लेकर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में संबोधित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है, लेकिन देश की शिक्षा व्यवस्था इस जनसांख्यिकीय अवसर को शिक्षा और रोजगार के अवसर में बदलने में विफल हो रही है।

पटवारी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, देश में 10 करोड़ से अधिक युवा उच्च शिक्षा से बाहर हैं, करीब 12 करोड़ बच्चे स्कूली शिक्षा पूरी नहीं कर रहे हैं और लगभग 8.7 करोड़ युवा शिक्षा, रोजगार या प्रशिक्षण—NEET श्रेणी में हैं। ये आंकड़े AISHE 2023-24, UDISE+ 2024-25/2025-26, Economic Survey 2025-26 और नीति आयोग सहित विभिन्न स्रोतों पर आधारित हैं।

पटवारी ने कहा कि भारत के सामने एक तरफ जन्मदर में गिरावट के कारण आने वाले वर्षों में युवा आबादी का हिस्सा तेजी से घटने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में बच्चे और युवा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से नहीं जुड़ पा रहे हैं।

प्रस्तुति के अनुसार भारत की Total Fertility Rate (TFR) 2014 में 2.3 से घटकर 2024 में 1.9 हो चुकी है और अनुमान के अनुसार 2026-30 में यह 1.8 तथा 2031-35 में 1.7 तक पहुंच सकती है। Replacement level 2.1 से भारत पहले ही नीचे जा चुका है।

15-29 वर्ष की आबादी का हिस्सा भी 2021 के 27.3 प्रतिशत से घटकर 2026 में 25.8 प्रतिशत, 2031 में 24.1 प्रतिशत और 2036 में 22.7 प्रतिशत होने का अनुमान है। 2047 तक यह हिस्सा लगभग 15-16 प्रतिशत रह जाने का अनुमान प्रस्तुत किया गया है।

UDISE+ 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार कक्षा 1 से 5 तक 92.4 प्रतिशत, कक्षा 1 से 8 तक 82.8 प्रतिशत, कक्षा 1 से 10 तक 62.9 प्रतिशत, लेकिन कक्षा 1 से 12वीं तक केवल 47.2 प्रतिशत बच्चे पहुंचते हैं। अर्थात 100 बच्चों में लगभग 52.8 बच्चे 12वीं तक पहुंचने से पहले ही शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो जाते हैं। देश के स्कूलों में कुल 24.69 करोड़ विद्यार्थी हैं, लेकिन Primary स्तर के 10.44 करोड़ विद्यार्थियों की तुलना में Higher Secondary में केवल 2.76 करोड़ विद्यार्थी रह जाते हैं।

गरीबी और आर्थिक मजबूरी भी बच्चों के स्कूल छोड़ने की बड़ी वजह

Economic Survey 2025-26 में PLFS 2023-24 पर आधारित आंकड़ों के अनुसार 14-18 वर्ष की उम्र में स्कूल छोड़ने वालों के बीच 44 प्रतिशत ने परिवार की आय बढ़ाने के लिए काम करना और 28 प्रतिशत ने घरेलू कामों में व्यस्तता को कारण बताया। वहीं 8 प्रतिशत ने शिक्षा को आवश्यक न मानना, 1 प्रतिशत ने स्कूल बहुत दूर होना और 19 प्रतिशत ने अन्य कारण बताए। इससे शिक्षा, गरीबी और परिवार की आर्थिक स्थिति के बीच गहरे संबंध का संकेत मिलता है।

UDISE+ 2025-26 के अनुसार देश में सरकारी स्कूलों की संख्या 2014-15 के 11.07 लाख से घटकर 2025-26 में 10.05 लाख रह गई। यानी इस अवधि में लगभग 1.02 लाख सरकारी स्कूलों की शुद्ध कमी दर्ज की गई। इसी अवधि में मध्य प्रदेश में लगभग 30,650 सरकारी स्कूलों की शुद्ध कमी बताई गई है। यह केवल स्कूलों की संख्या का सवाल नहीं बल्कि सरकारी शिक्षा के सार्वजनिक infrastructure की दिशा से जुड़ा प्रश्न है।

प्रस्तुति के अनुसार देशभर में स्वीकृत 48.10 लाख शिक्षक पदों में से 40.63 लाख पदों पर शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि 7.48 लाख पद खाली हैं। यानी कुल शिक्षक पदों में लगभग 16 प्रतिशत vacancy है। राज्यों में मध्य प्रदेश में शिक्षक vacancy करीब 19 प्रतिशत बताई गई है और 69,667 पद खाली हैं। अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश 22%, उत्तराखंड 24%, त्रिपुरा 26%, मिजोरम 30% और बिहार 32% vacancy के आंकड़े दिए गए हैं।

देशभर में 1,00,843 Single-Teacher Schools हैं, जिनमें करीब 33.77 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। मध्य प्रदेश में 2,269 Single-Teacher Schools बताए गए हैं, जिनमें करीब 2.29 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं। इसके अलावा देश में 5,663 Zero-Enrolment Schools हैं, जहां एक भी बच्चा नामांकित नहीं है। नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार 36 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में 50 से कम विद्यार्थी हैं और वहां केवल एक या दो शिक्षक हैं, जबकि मानक PTR 30:1 बताया गया है।

Economic Survey 2025-26 के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 17 प्रतिशत स्कूल Secondary स्तर के हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 38 प्रतिशत है। यानी शहरी क्षेत्रों में Secondary स्कूलों का अनुपात ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में दो गुने से अधिक है।

मध्य प्रदेश की स्थिति पर प्रस्तुति में बताया गया है कि Class 1 से 12 तक Retention Rate केवल 32.3 प्रतिशत है। यानी 100 बच्चों में करीब 32 बच्चे ही 12वीं तक पहुंचते हैं। इसके साथ ही 2014-15 से 2025-26 के बीच प्रदेश में 30,650 सरकारी स्कूलों की शुद्ध कमी और 2025-26 में 2,269 Single-Teacher Schools बताए गए हैं।

प्रस्तुति में 2022-23 से 2024-25 के बीच सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट और निजी स्कूलों में बढ़ोतरी के आंकड़े दिए गए हैं। सरकारी स्कूलों का आंकड़ा 13.6 करोड़ से घटकर 12.2 करोड़ और निजी स्कूलों का 8.4 करोड़ से बढ़कर 9.6 करोड़ बताया गया है। प्रस्तुति में NSSO के हवाले से निजी स्कूलों में शिक्षा का खर्च सरकारी स्कूलों की तुलना में औसतन लगभग 10 गुना अधिक बताया गया है।

RTE Act, 2009 में 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का कानूनी प्रावधान है। प्रस्तुति में NSSO के अप्रैल-जून 2025 सर्वे के हवाले से कहा गया है कि 27 प्रतिशत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे core fees चुका रहे हैं, जिसकी औसत राशि ₹2,863 प्रति वर्ष बताई गई है। इसके साथ ही लाखों बच्चे Single-Teacher Schools और हजारों स्कूल Zero-Enrolment की स्थिति में हैं।

AISHE 2023-24 के अनुसार Higher Education का Gross Enrolment Ratio करीब 30 प्रतिशत बताया गया है। उच्च शिक्षा में कुल enrolment 4.50 करोड़ है, जबकि 18-23 वर्ष की projected population करीब 15 करोड़ है।

प्रस्तुति के अनुसार लगभग 10.5 करोड़ युवा Higher Education GER coverage से बाहर हैं। प्रस्तुति में भारत का Higher Education GER 32 प्रतिशत बताया गया है, जबकि तुलनात्मक आंकड़ों में United Kingdom 80%, United States 79%, Germany 77%, China 72%, Japan 65% और South Africa 24% दिए गए हैं।

ये तुलनात्मक आंकड़े PRS Legislative Research की Demand for Grants Analysis 2026-27: Education के संदर्भ में प्रस्तुत किए गए हैं। Centrally Funded Higher Educational Institutions में 34 प्रतिशत teaching posts खाली बताए गए हैं। स्वीकृत 41,351 पदों में से 27,133 पद भरे हुए और 14,042 पद खाली बताए गए हैं। संस्थान-वार vacancy में IIITs में 54%, IITs में 39% और Central Universities में 29% vacancy के आंकड़े दिए गए हैं।

मध्य प्रदेश के 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में 1,949 स्वीकृत पदों में से 1,585 पद खाली बताए गए हैं, यानी vacancy करीब 81 प्रतिशत है। Assistant Professor के 1,069 पदों में केवल 276 पद भरे बताए गए हैं। वहीं 93 विषयों में एक भी Assistant Professor नहीं होने की बात प्रस्तुति में कही गई है।

पांच सरकारी विश्वविद्यालयों—राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिंदवाड़ा; क्रांतिवीर तात्या टोपे विश्वविद्यालय, गुना; क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय, खरगोन; महाराजा छत्रसाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, छतरपुर; और रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय, सागर—में एक भी Assistant Professor नहीं होने का उल्लेख है।

खरगोन विश्वविद्यालय में 140 स्वीकृत पदों में एक भी पद भरा नहीं होने, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में 154 में से 68 पद खाली होने तथा सरकारी कॉलेजों में Librarian के 582 पदों में से 346 पद खाली होने के आंकड़े भी दिए गए हैं।

जीतू पटवारी ने कहा कि जब भारत की युवा आबादी का हिस्सा लगातार घटने वाला है, तब सरकार को बताना चाहिए कि Demographic Dividend को बचाने और उसे Education Dividend में बदलने के लिए उसकी ठोस योजना क्या है?

जीतू पटवारी ने पूछे सवाल?

जब कक्षा 1 के 100 बच्चों में केवल 47.2 बच्चे 12वीं तक पहुंच रहे हैं, तो स्कूल Retention बढ़ाने और Dropout रोकने के लिए सरकार की जवाबदेही क्या है?

जब 2014-15 से 2025-26 के बीच देश में करीब 1.02 लाख सरकारी स्कूलों की शुद्ध कमी हुई है, तो सरकारी स्कूलों को मजबूत करने की नीति क्या है?

जब देश में 1,00,843 Single-Teacher Schools हैं और इनमें 33.77 लाख बच्चे पढ़ रहे हैं, तो इन बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिलेगी?

जब 18-23 वर्ष की करीब 15 करोड़ projected population के मुकाबले Higher Education GER केवल करीब 30% है, तो करीब 10.5 करोड़ युवाओं के बराबर आबादी GER coverage से बाहर क्यों है?

जब देश के centrally funded higher educational institutions में करीब 34% teaching posts खाली हैं, तो सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और भविष्य के रोजगार के लिए कैसे तैयार करेगी?

जब युवा आबादी के लिए Demographic Dividend की खिड़की सीमित होती जा रही है, तो शिक्षा, कौशल और रोजगार के माध्यम से इस अवसर को सुरक्षित करने की समयबद्ध रणनीति क्या है?

पटवारी ने कहा कि भारत की युवा आबादी देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है, लेकिन इसके लिए हर बच्चे को स्कूल, हर युवा को उच्च शिक्षा एवं कौशल और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने होंगे। यदि बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल से बाहर हो रहे हैं, शिक्षक पद खाली हैं, सरकारी स्कूलों की संख्या घट रही है और उच्च शिक्षा में करोड़ों युवा प्रवेश से बाहर हैं, तो Demographic Dividend अपने आप Education Dividend में नहीं बदल सकता। उन्होंने कहा कि शिक्षा को प्राथमिकता देना केवल सरकार की एक योजना का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य, सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास से जुड़ा सवाल है।

अखिल भारतीय कांग्रेस के प्रवक्ता अभय दुबे ने भी पत्रकार वार्ता में शिक्षा और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा को अफोर्डेबल न बनाने के साथ-साथ आंदोलन को भी अफोर्डेबिलिटी से बाहर कर रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षा महंगी होती जा रही है और दूसरी तरफ छात्रों तथा युवाओं के लोकतांत्रिक सवालों को भी आर्थिक बाधाओं से जोड़ना उचित नहीं है। दुबे ने राजनीतिक संवाद और लोकतांत्रिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी की सरकार के समय, अटल जी के दौर में, भाजपा की राष्ट्रीय समिति के आतिथ्य का उदाहरण सामने रहा है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच संवाद, विचारों का आदान-प्रदान और लोकतांत्रिक आतिथ्य की परंपरा बनी रहनी चाहिए। कांग्रेस पार्टी छात्रों की आवाज को मजबूत करने के लिए ‘छात्रों की गूंज’ के माध्यम से देशव्यापी चर्चा को आगे बढ़ाएगी।

कांग्रेस सरकार से मांग करती है कि शिक्षा व्यवस्था के इन आंकड़ों पर तत्काल श्वेतपत्र जारी किया जाए, रिक्त शिक्षक पदों को भरा जाए, सरकारी स्कूलों और विश्वविद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए तथा बच्चों और युवाओं के लिए शिक्षा से रोजगार तक स्पष्ट और समयबद्ध रोड मैप प्रस्तुत किया जाए।

Created On :   16 Sept 2026 5:55 PM IST

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