MP News: कर्नाटक के मंत्री खरगे के समर्थन में आए दिग्विजय, कहा सालों पहले संघ का लेखा-जोखा मांग चुका हूं

कर्नाटक के मंत्री खरगे के समर्थन में आए दिग्विजय, कहा सालों पहले संघ का लेखा-जोखा मांग चुका हूं
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा आरएसएस के हिसाब-किताब मांगे जाने के बाद बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी उनके समर्थन में उतर आए।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा आरएसएस के हिसाब-किताब मांगे जाने के बाद बुधवार को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी उनके समर्थन में उतर आए। उन्होंने नवंबर 2025 में सरसंघचालक माेहन भागवत को लिखे पत्र और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को 2021 में लिखे पत्र का उल्लेख कर बताया कि अारएसएस को कानूनी स्थिति, वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही के बारे में बताना चाहिए। दिग्विजन ने कर्नाटक के गृह मंत्री खरगे का भी समर्थन किया और कहा कि संघ जैसे बड़े संगठन को भी अपने आय-व्यय, फंडिंग के बारे में जानकारी सार्वजनिक करना चाहिए। लोकतंत्र में कोई भी संस्था सवालों और जवाबदेही से ऊपर नहीं हो सकती।

दिग्विजय ने बुधवार को लिखित बयान जारी किया, जिसमें कहा कि प्रियांक खरगे ने जिन मुद्दों को उठाया है, वे वही प्रश्न हैं जिन्हें वह (दिग्विजय) कई वर्षों से सार्वजनिक रूप से उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने 22 अक्टूबर 2021 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर आरएसएस की वित्तीय गतिविधियों की जांच और पारदर्शिता की मांग की थी। वित्त मंत्री को लिखे पत्र में दिग्विजय ने नागपुर के आरटीआई कार्यकर्ता मोहनीश जबलपुरे के हवाले से कहा था कि कोविड काल के दौरान आरएसएस ने सात करोड़ से अधिक भोजन पैकेट और एक करोड़ से अधिक राशन किट बांटने का दावा किया था।

ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इसके लिए धन कहां से आया और उसका लेखा-जोखा क्या है। उन्होंने यह भी मांग की थी कि संघ के चंदे, आय-व्यय और फंडिंग स्रोतों की जांच कराई जाए और यदि संगठन को किसी प्रकार की टैक्स छूट मिली है तो उसकी भी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

दिग्विजय ने एक पत्र का और जिक्र कर कहा कि 12 नवंबर 2025 को भी सर संघचालक मोहन भागवत को पत्र लिखा था। यह पत्र उस बयान को लेकर लिखा गया था, जिसमें मोहन भागवत ने संघ के अपंजीकृत होने की तुलना हिंदू धर्म से की थी। पत्र में कहा था कि सनातन धर्म और आरएसएस की तुलना नहीं की जा सकती। कोई भी संगठन हिंदू धर्म का पर्याय नहीं हो सकता। उन्होंने पत्र में सवाल उठाया था कि देश में लाखों सामाजिक, धार्मिक और स्वयंसेवी संस्थाएं कानून के तहत पंजीकृत हैं और अपने आय-व्यय का हिसाब देती हैं, फिर अारएसएस अब तक औपचारिक रूप से पंजीकृत क्यों नहीं है। उन्होंने संघ के वित्तीय स्रोतों, संगठनात्मक ढांचे, कर दायित्वों और खर्चों का विवरण सार्वजनिक करने की मांग भी की थी।

Created On :   18 Jun 2026 12:00 AM IST

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