Parliamentary Friendship Groups: ओम बिरला ने संसदीय मैत्री समूहों के लिए बनाए ग्रुप, शशि थरूर से लेकर ओवैसी तक, पक्ष और विपक्ष के इन सासंदों को किया शामिल

ओम बिरला ने संसदीय मैत्री समूहों के लिए बनाए ग्रुप, शशि थरूर से लेकर ओवैसी तक, पक्ष और विपक्ष के इन सासंदों को किया शामिल
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सोमवार को 60 से ज्यादा देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों के गठन की अनुमति दे दी है। इस समूहों में सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों को शामिल किया गया है।


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सोमवार को 60 से ज्यादा देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों के गठन की अनुमति दे दी है। इस समूहों में सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों को शामिल किया गया है। इससे भारतीय लोकतंत्र की बहुदलीय और समावेशी प्रकृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। प्रमुख सांसदों में रविशंकर प्रसाद, पी। चिदंबरम, राम गोपाल यादव, टी।आर। बालू, गौरव गोगोई, कनिमोझी, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले, शशि थरूर और अनुराग ठाकुर समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

ओम बिरला ने संसदीय मैत्री समूहों के बनाए ग्रुप

इन मैत्री समूहों में कई सियासी दल के सांसदों को शामिल किया गया है। इससे भारतीय लोकतंत्र की बहुदलीय और समावेशी प्रकृति को वैश्विक मंच पर पेश करने का प्रयास किया गया है। इन प्रमुख सांसदों में से रविशंकर प्रसाद, पी। चिदंबरम, राम गोपाल यादव, टी।आर। बालू, गौरव गोगोई, कनिमोझी, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले, शशि थरूर और अनुराग ठाकुर समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हैं।

इन देशों के साथ मैत्री समूह बनाए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राजील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और यूएई शामिल हैं।

सत्तापक्ष और विपक्ष के इन सांसदों को किया शामिल

इन समूहों का उद्देश्य सांसदों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को बढ़ाना, विधायी अनुभवों का आदान-प्रदान करना और द्विपक्षीय संबंधों को अधिक गहराई देना है। इसके जरिए व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीति, संस्कृति और वैश्विक चुनौतियों जैसे विविध मुद्दों पर भी समन्वित बातचीत को बढ़ावा मिलेगा। इन समूहों के जरिए संसदीय कूटनीति, पारंपरिक कूटनीति के समानांतर एक प्रभावी प्लेटफॉर्म के रूप में उभरेगी जो 'पार्लियामेंट-टू-पार्लियामेंट' और 'पीपल-टू-पीपल' संपर्क को मजबूती देगा।

पहले चरण में 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूह बनाए गए हैं, जबकि आने वाले समय में और देशों को इसमें शामिल करने की तैयारी है। यह पहल भारत की कूटनीतिक रणनीति में संसदीय भागीदारी को एक स्थायी और सशक्त स्तंभ के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Created On :   23 Feb 2026 8:49 PM IST

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