Congress-TMC Merger!: क्या 'कांग्रेस' का हाथ थामेंगी ममता बनर्जी? सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद 'विलय' की अटकलें तेज

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अपने सबसे बुरे सियासी दौर से गुजर रही है। बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद विधायक और सांसद एक के बाद पार्टी का साथ छोड़ रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि टीएमसी अपने खात्मे की कगार पर पहुंच गई है। ममता बनर्जी के 80 निर्वाचित विधायकों में से 58 विधायकों ने बागी होकर अपना अलग गुट बना लिया है। इसके बाद दिल्ली में लोकसभा के 20 और राज्यसभा के दो सांसद पार्टी से अलग हो गए हैं।
कांग्रेस में होगा विलय!
टीएमसी में जारी भगदड़ के बीच अटकलें लगाई जा रही हैं कि टीएमसी का कांग्रेस में विलय हो सकता है। उसी कांग्रेस में जिससे 29 साल पहले अलग होकर ममता ने तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। विलय की अटकलें उस समय तेज हुईं जब सोमवार को इंडिया गठबंधन की बैठक में ममता बनर्जी और सोनिया गांधी गर्मजोशी से मिले, इसके एक दिन बाद दोनों के बीच फिर मुलाकात हुई। इतना ही नहीं बुधवार यानि आज अभिषेक बनर्जी राहुल गांधी से मिलने 10 जनपथ आवास पहुंचे। उनके साथ टीएमसी सांसद डैरेक ओ ब्रायन भी थे।
अटकलें लगाई जा रही हैं कि बीते 24 घंटों में गांधी और बनर्जी परिवार के बीच हुईं यह मुलाकाते विलय को लेकर ही की जा रही हैं। कहा जा रहा है कि कांग्रेस की संरक्षक सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को बड़ा ऑफर दिया है।
यह भी पढ़े -ममता बनर्जी को बड़ा झटका, सुष्मिता देव ने छोड़ी राज्यसभा और टीएमसी, बढ़ीं नए सियासी ठिकाने की अटकलें
कांग्रेस में विलय और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का ऑफर
सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी के सामने बड़ा ऑफर रखा है। जिसमें उन्होंने ममता कहा है कि वे टीएमसी का कांग्रेस में विलय कर दें। इसके बदले में उन्हें कांग्रेस का उपाध्यक्ष बना दिया जाएगा। साथ ही उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी को महासचिव का पद भी दिया जाएगा।
खबरों के मुताबिक, सोनिया ने ममता से कहा है कि मौजूदा हालातों को देखते हुए टीएमसी का कांग्रेस के साथ विलय ही सही होगा। वरना बीजेपी उन्हें भी आम आदमी पार्टी की तरह ही परेशान करेगी। कहा जा रहा है कि ममता ने इस पर विचार करने के लिए कुछ दिनों का समय मांगा है।
वहीं सियासी जानकारों का कहना है कि ममता टीएमसी का कांग्रेस में विलय करने पर राजी हो भी सकती हैं। क्योंकि जिस तरह से टीएमसी के सांसद एक के बाद एक पार्टी को छोड़ रहे हैं और अपना अलग गुट बना रहे हैं, उससे पार्टी पर दो फाड़ होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में पार्टी की कमान उनके हाथों से निकलकर बागियों के हाथ में न जाए ममता बनर्जी सोनिया गांधी के विलय के ऑफर को स्वीकार भी कर सकती हैं।
कांग्रेस से ही शुरू हुआ था सियासी सफर
ममता बनर्जी की पार्टी के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं के बीच यह बताना महत्वपूर्ण है कि ममता बनर्जी ने अपनी सियासी पारी की शुरुआत कांग्रेस से ही की थी। छात्र राजनीति से वह कांग्रेस पार्टी से जुड़ीं और धीरे-धीरे एक चर्चित नेता बन गईं। साल 1984 में वह पहली बार कांग्रेस के टिकट पर पश्चिम बंगाल की जाधवपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ीं और जीत हासिल की।
समय के साथ ममता बनर्जी का बंगला की सत्ता पर काबिज वाम दलों के खिलाफ संघर्ष तेज हो गया। उनका मानना था कि कांग्रेस उनकी राजनीतिक लड़ाई में पूरा साथ नहीं दे रही है। साथ ही, पार्टी द्वारा नजरअंदाज किए जाने की उनके मतभेद बढ़ने लगे।
इसके बाद दिसंबर 1997 में आधिकारिक तौर पर कांग्रेस से अलग होने के बाद ममता बनर्जी ने अपने सहयोगियों के साथ नई पार्टी बनाने का फैसला किया। साल 1998 में तृणमूल कांग्रेस की शुरुआत हुई। इसके बाद पार्टी ने बंगाल की राजनीति में तेजी से अपनी पहचान बनाई।
Created On :   10 Jun 2026 3:44 PM IST







