सीईसी विवाद: 'लोकतंत्र बचाओ मार्च' से 'वोट बचाओ, देश बचाओ' तक... नाम बदले, कैसे आगे बढ़ा सीजेपी- विपक्ष का आंदोलन?

लोकतंत्र बचाओ मार्च से वोट बचाओ, देश बचाओ तक... नाम बदले, कैसे आगे बढ़ा सीजेपी- विपक्ष का आंदोलन?
CEC इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर सितंबर-अक्टूबर 2026 में CJP तथा विपक्षी दलों ने कई प्रदर्शन, मार्च और रैलियों के दौरान पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और घमासान मचा हुआ है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के आरोपों को लेकर सितंबर-अक्टूबर 2026 में CJP तथा विपक्षी दलों ने कई प्रदर्शन, मार्च और रैलियां आयोजित की। CJP का आंदोलन 2 अक्टूबर को मुंबई से शुरू हुआ, बाद में 10 अक्टूबर के दिल्ली प्रदर्शन और 16 अक्टूबर के लहरा दो तिरंगा मार्च तक आगे बढ़ा जबकि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की ओर से 2 से 8-9 अक्टूबर तक दिल्ली में लगातार मार्च और विरोध प्रदर्शन किए और अभी भी जारी है। 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया गया। और शीर्ष कोर्ट में विपक्ष की ओर से संयुक्त याचिका लगाई गई। आपको बताते हैं सीजेपी और विपक्षी गुट की ओर से अब तक किए गए प्रोटस्ट, रैलियां और आंदोलन के बारे में, जो सड़क से संसद और सुप्रीम कोर्ट तक हुए और सियासी आरोप-प्रत्यारोप के साथ साथ समाज में चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिन्होंने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को नारों की गूंज के साथ बैरिकेड की जेल में तब्दील कर दिया है।

शुरु से लेकर अब तक प्रोटेस्ट

2 अक्टूबर CJP का राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन, मुंबई के शिवाजी पार्क से जेल भरो आंदोलन की शुरुआत।

2–8 अक्टूबर तक INDIA गठबंधन और कांग्रेस के देश के विभिन्न जिलों में विरोध कार्यक्रम, पूरे देश में Save Democracy March (लोकतंत्र बचाओ मार्च)

6 अक्टूबर चुनाव आयोग तक मार्च INDIA गठबंधन के सांसदों का दिल्ली में संसद से चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च, पुलिस ने रोका।

7 अक्टूबर जंतर-मंतर की ओर विरोध मार्च कांग्रेस और INDIA गठबंधन के नेताओं-सांसदों का दिल्ली में प्रदर्शन, पुलिस के साथ गतिरोध।

7 अक्टूबर Vote Bachao, Desh Bachao रैली जम्मू में INDIA गठबंधन के नेताओं ने संयुक्त रैली की घोषणा की, कई जिलों में विरोध कार्यक्रम देखे गए।

8 अक्टूबर राजघाट मार्च / मौन प्रदर्शन राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं और सांसदों का दिल्ली में महात्मा गांधी की समाधि राजघाट तक मार्च और मौन प्रदर्शन।

9 अक्टूबर राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च और ज्ञापन INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर CEC के इस्तीफे समेत मांगें रखीं।

10 अक्टूबर Jantar Mantar 2.0 / CJP विरोध प्रदर्शन CJP का दिल्ली में प्रदर्शन, आप और वामपंथी दलों ने समर्थन दिया। कांग्रेस के इसमें शामिल नहीं होने की खबरें आईं।

12 अक्टूबर सुप्रीम कोर्ट तक INDIA गठबंधन का मार्च राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं का दिल्ली में मार्च, SIR और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर याचिका दाखिल करने की पहल।

13 अक्टूबर जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने का विरोध सीजेपी के कुछ सदस्यों ने बैरिकेड के पार जाकर तिरंगा फहराया, पुलिस ने कई लोगों को हिरासत में लिया।

16 अक्टूबर Lehra Do Tiranga (लहरा दो तिरंगा) मार्च CJP ने दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में मार्च का आह्वान किया। मुंबई के आजाद मैदान में भी इसी नाम से प्रदर्शन घोषित हुआ।

CJP का CP पर लहरा दो तिरंगा मार्च

सीजेपी की ओर से आज कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में लहरा दो तिरंगा माार्च से पहले दिल्ली पुलिस ने सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके के घर पर नोटिस चस्पा कर दिया है। बीजेपी सांसद विवेक ठाकुर ने CJP के ‘लहरा दो तिरंगा’ विरोध प्रदर्शन पर तंज कसते हुए कहा, इनके दिल में तिरंगा नहीं बसता है, वो तिरंगे को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र की पूरी व्यवस्था पर प्रहार करने का प्रयास कर रहे हैं, देश को तोड़ने के लिए जो ताकतें काम कर रही हैं, उनका चेहरा उजागर हो गया है, यह दुखद है। ये देश को तोड़ने वाले लोग हैं, अब देश में विपक्ष के मनसूबों को नकारने का एक माहौल तैयार हो रहा है और ये कभी सफल नहीं होंगे।

1 नवंबर को लोकतंत्र बचाओ महारैली

आपको बता दें अगले महीने की पहली तारीख यानि 1 नवंबर को INDIA गठबंधन की ओर से दिल्ली में लोकतंत्र बचाओ (Save Democracy Mega Rally) महारैली प्रस्तावित है, जिसकी घोषणा 30 सितंबर को की गई थी।

विपक्ष और सीजेपी की ओर से की जा रहे प्रोटेस्ट, रैली और मार्च को लेकर सियासत शुरु से ही गरमाई हुई है, आज सीपी में सीजेपी के प्रदर्शन पर कांग्रेस सांसद राशिद अल्वी ने CP में CJP के प्रदर्शन के आह्लान पर कहा प्रदर्शन करने के लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं होती है। कांग्रेस नेता ने कहा दुनिया के जिन देशों में लोकतंत्र है, वहां पर सड़क, पार्क में बिना इजाजत के प्रदर्शन होते हैं, उन्होंने बीजेपी सरकार पर तानाशाही होने का आरोप लगाया। सरकार किसी आवाज को सुनना नहीं चाहती है। इस पर बीजेपी नेता आर पी सिंह ने पलटवार करते हुए कहा रिजीम और चुनी हुई सरकार के बीच में फर्क होता है, 140 करोड़ लोगों ने चुनकर यह सरकार भेजी है। उन्होंने आगे कहा वे खून-खराबे की भी बात कर रहे हैं, तो देश समझ रहा है कि किस प्रकार से अराजक शक्तियां इकट्ठा हो रही हैं, उन्होंने ये भी कहा वे जानते हैं कि लोकतांत्रिक तरीके से वो सत्ता परिवर्तन नहीं कर सकते।

इंडिया गठबंधन में शामिल समाजवादी पार्ची की सांसद इकरा हसन ने भी बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया, सांसद हसन ने कहा देश को लूटने का काम भाजपा कर रही है। एक व्यक्ति को बचाने के लिए उन्होंने पूरे देश के युवाओं को क्यों परेशान कर रखा है? वो ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा दिला दें। उन्होंने आगे कहा विपक्ष का काम सही मुद्दों को उठाना है लेकिन सत्ता पक्ष अहंकार में डूबा हुआ है।

CJP स्वतंत्र जनआंदोलन के रूप में सत्तारूढ़ एनडीए सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश में है। कांग्रेस आंदोलनों को राष्ट्रीय विपक्षी अभियान और न्यायिक लड़ाई से जोड़ रही है, सपा उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक सक्रियता के साथ विपक्षी मंच का इस्तेमाल कर रही है, हालांकि इस बीच विपक्षी गुट में रणनीतिक तालमेल और आंदोलन के नेतृत्व को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं।

कांग्रेस ने आंदोलन का राजनीतिक नेतृत्व अपने हाथ में रखा

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में दिल्ली में मार्च, धरना और गिरफ्तारी देकर विरोध दर्ज कराना। कांग्रेस ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को वोट चोरी के राजनीतिक अभियान से जोड़ना। उन्होंने वोट चोर गद्द छोड़ जैसे नारे गढ़े।

कांग्रेस ने INDIA गठबंधन के दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज को साथ जोड़ा। कांग्रेस की अगुवाई में इंडिया गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों के नेताओं ने संयुक्त रूप से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की और पिटीशन के जरिए SIR और मतदाता सूची की कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाना।

अभिजीत दिपके और राहुल गांधी दोनों अलग अलग बैनरों के तहत प्रोटेस्ट कर रहे हैं, लेकिन दोनों ही सरकार की नीतियों के खिलाफ मुखर हैं। हालांकि विपक्ष की ओर से दिपके को राहुल गांधी के साथ टी-बैठक में आमंत्रित करने का प्रयास किया गया, लेकिन दिपके के दिल्ली में मौजूद ना होने से वो शामिल नहीं हो सकें। अब ये देखना होगा कि दोनों की मुलाकात कब और किस मोड़ पर होगी।

Created On :   16 Oct 2026 5:53 PM IST

Tags

Next Story