MP News: छात्रों से लेकर किसानों तक हर वर्ग परेशान, सरकार जवाबदेही से भागने के बजाय जनता के सवालों का जवाब दे: कुणाल चौधरी

छात्रों से लेकर किसानों तक हर वर्ग परेशान, सरकार जवाबदेही से भागने के बजाय जनता के सवालों का जवाब दे: कुणाल चौधरी
छात्रों की गूंज की सफलता के लिए छात्र-छात्राओं और राहुल गांधी का जताया आभार

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के सचिव कुणाल चौधरी ने इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल हुए प्रदेशभर के छात्र-छात्राओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि युवाओं ने अपने भविष्य और अधिकारों से जुड़े सवालों को मजबूती से उठाया है। उन्होंने कार्यक्रम के लिए राहुल गांधी का भी आभार व्यक्त किया।

कुणाल चौधरी ने कहा कि इंदौर की अर्थव्यवस्था में नौजवानों की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन आज प्रदेश का पढ़ा-लिखा युवा रोजगार, भर्ती परीक्षाओं, पेपर लीक और वेतन से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा भर्ती में गड़बड़ी का सबसे बड़ा नुकसान विद्यार्थियों और अभ्यर्थियों को उठाना पड़ता है। यदि किसी बच्चे ने वर्षों मेहनत करके परीक्षा दी और पेपर लीक या भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी के कारण उसका भविष्य प्रभावित हुआ है तो ऐसे प्रभावित अभ्यर्थियों को मुआवजा मिलना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि पेपर लीक को लेकर जवाबदेही तय करने वाला बोर्ड कब बनेगा? युवाओं को बार-बार परीक्षाओं में बैठने, फीस भरने और तैयारी करने के लिए मजबूर किया जाता है, लेकिन जब व्यवस्था की गलती सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने के बजाय विद्यार्थियों को परेशान होना पड़ता है। कुणाल चौधरी ने कहा कि प्रदेश में पढ़े-लिखे युवाओं को उनका वेतन नहीं मिल रहा है। जब युवा अपने अधिकारों के लिए प्रदर्शन करते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाती है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं की आवाज सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। युवाओं के सवालों का जवाब लाठी या कार्रवाई से नहीं, बल्कि रोजगार और नीतिगत समाधान से दिया जाना चाहिए। कुणाल चौधरी ने भागीरथपुरा मामले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि इसकी जवाबदेही कब तय होगी।

उन्होंने छिंदवाड़ा में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मासूम बच्चों की मौत बेहद गंभीर विषय है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस मामले में जिम्मेदार कौन है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में ड्रग से जुड़े गंभीर मामले सामने आ रहे हैं और ड्रग की फैक्ट्रियों के संचालन के आरोप लग रहे हैं। ऐसे मामलों में पूरे नेटवर्क की जांच होनी चाहिए और यदि किसी अधिकारी या प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

कुणाल चौधरी ने सागर में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब जहरीली शराब से लोगों की जान जाती है तो केवल छोटे आरोपियों पर कार्रवाई करके सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उन्होंने सवाल किया “बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? मंत्रियों की जिम्मेदारी कब तय होगी? उन्होंने कहा कि किसी भी घटना में यदि प्रशासनिक लापरवाही या सरकारी तंत्र की विफलता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित स्तर पर राजनीतिक जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जहां सरकारी धन का नुकसान हुआ है, वहां सरकारी धन की वसूली जिम्मेदार लोगों से की जानी चाहिए।

भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज पर सरकार कब बोलेगी?

चौधरी ने भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज से जुड़े मुद्दे पर भी सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि राजधानी के नागरिकों से जुड़े महत्वपूर्ण अधोसंरचना के सवालों पर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और जनता को समयबद्ध जानकारी देनी चाहिए। चौधरी ने मध्यप्रदेश में सोयाबीन की फसल को लेकर किसानों की स्थिति पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान लगातार अलग-अलग फसलों से जुड़ी समस्याओं का सामना करता रहा है।

जब गेहूं के किसानों की समस्या आई, मैंने उनकी बात उठाई। जब केले के किसानों की समस्या आई, मैंने उनकी समस्या सरकार के सामने रखी। मूंग, धान और कपास के किसानों की समस्याओं को भी लगातार उठाया। आज फिर मध्यप्रदेश के सोयाबीन किसानों की आवाज सरकार के सामने रख रहा हूं।” उन्होंने कहा कि प्रदेश में सोयाबीन की फसल पर मौसम और बीमारी का असर पड़ा है। किसानों द्वारा पीले मोजेक सहित फसल खराब होने की शिकायतें की जा रही हैं। ऐसे समय में सरकार को तत्काल सर्वे कराकर किसानों को राहत उपलब्ध करानी चाहिए।

एक बीघा में 12 क्विंटल सोयाबीन’ के दावे पर सवाल

चौधरी ने एक समाचार का हवाला देते हुए कहा कि सितंबर की बारिश के बाद सोयाबीन के दाने बोल्ड होने और उत्पादन बढ़ने की खबर प्रकाशित हुई है तथा एक बीघा में 12 क्विंटल तक उत्पादन होने का दावा किया गया है। उन्होंने कहा “मैं चुनौती देता हूं कि मध्यप्रदेश में एक बीघा में 12 क्विंटल सोयाबीन पैदा करने वाले किसी एक किसान को सामने लाकर दिखाइए। मैं उसे ₹1 लाख का इनाम दूंगा।”

उन्होंने कहा कि खेतों में जाकर वास्तविक स्थिति देखने की जरूरत है। उनके अनुसार कई किसान बेहद कम उत्पादन की शिकायत कर रहे हैं और कई जगह फसल को नुकसान हुआ है। कुणाल चौधरी ने कहा कि मीडिया को भी किसानों के खेतों तक जाकर वास्तविक स्थिति दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की वास्तविक परेशानी और जमीन पर मौजूद उत्पादन की स्थिति को समझे बिना केवल कागजी आंकड़ों के आधार पर तस्वीर पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा “लश्कर भी तुम्हारा है, हथियार भी तुम्हारे हैं, सत्ता भी तुम्हारी है, गलियारे भी तुम्हारे हैं; तुम झूठ को सच लिख दो, अखबार भी तुम्हारे हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी उन्होंने उन खबरों के संदर्भ में कही है जिनमें उनके अनुसार किसानों की वास्तविक स्थिति से अलग उत्पादन के दावे किए जा रहे हैं।

MSP ₹5,700 और किसान को कम भाव क्यों?

कुणाल चौधरी ने सोयाबीन के MSP और बाजार भाव को लेकर सरकार से सवाल किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सोयाबीन के लिए ₹5,700 प्रति क्विंटल MSP की बात कही है, लेकिन किसानों को इससे कम कीमत पर अपनी उपज बेचने की स्थिति क्यों बन रही है?

उन्होंने भावांतर योजना को लेकर भी सरकार से सवाल किया और कहा कि सरकार ने योजना को लेकर बड़े दावे किए थे, लेकिन किसानों को पंजीयन, भुगतान और वास्तविक लाभ के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मंडी में किसान को MSP से कम भाव मिल रहा है तो सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसान को घोषित समर्थन मूल्य और भावांतर व्यवस्था का वास्तविक लाभ मिले।

चौधरी ने फसल खराब होने के सर्वे को लेकर भी सरकार से सवाल किया

उन्होंने कहा कि यदि पीले मोजेक या अन्य कारणों से सोयाबीन की फसल खराब हुई है तो समय रहते सर्वे कराया जाना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया“आज सोयाबीन कटने लगी है और सरकार ने अभी तक सर्वे के आदेश नहीं दिए हैं। जब फसल कट जाएगी, उसके बाद सर्वे होगा तो किसान के नुकसान का सही आकलन कैसे होगा?” उन्होंने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सर्वे कराया जाए और वास्तविक नुकसान के आधार पर किसानों को राहत और मुआवजा दिया जाए।

कुणाल चौधरी ने सरकार और किसानों के बीच संवाद को लेकर कहा

“राजा बोले रात है, रानी बोले रात है, मंत्री बोले रात है, संत्री बोले रात है; सारी सुबह-सुबह की बात है।” उन्होंने कहा कि सरकार को दावों और विज्ञापनों के बजाय खेतों में जाकर किसानों की वास्तविक स्थिति देखनी चाहिए।

कुणाल चौधरी ने कहा कि किसान की आय केवल भाषणों से नहीं बढ़ेगी। उसे उचित MSP, समय पर सर्वे, फसल नुकसान का मुआवजा, लागत के अनुरूप कीमत और सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान को खुशहाल बताने के बजाय उसकी वास्तविक समस्याओं का समाधान करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

कुणाल चौधरी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा पर भी निशाना साधा।

उन्होंने रामेश्वर शर्मा को “नफरती चिंटू” बताते हुए आरोप लगाया कि वे सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए नफरत फैलाने की राजनीति करते हैं। चौधरी ने आरोप लगाया कि रामेश्वर शर्मा गुंडों को पालने का काम करते हैं और कहा कि भाजपा नेताओं को जनता को बांटने और विवाद पैदा करने के बजाय युवाओं, किसानों, रोजगार, शिक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे वास्तविक मुद्दों पर बात करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता आज जवाब चाहती है-

- पेपर लीक की जवाबदेही कब तय होगी?

- प्रभावित विद्यार्थियों को मुआवजा कब मिलेगा?

- युवाओं के रोजगार और वेतन का समाधान कब होगा?

- भागीरथपुरा मामले में जवाबदेही कब तय होगी?

- छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत के मामले में जिम्मेदार कौन है?

- ड्रग से जुड़े मामलों में पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई कब होगी?

- सागर जहरीली शराब कांड में बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी कब तय होगी?

- मंत्रियों की जवाबदेही कब तय होगी?

- सरकारी धन की वसूली कब होगी?

- भोपाल के 90 डिग्री ब्रिज पर सरकार कब जवाब देगी?

- सोयाबीन किसानों की खराब फसल का सर्वे कब होगा?

- किसानों को MSP और भावांतर योजना का वास्तविक लाभ कब मिलेगा?

कुणाल चौधरी ने कहा कि मध्यप्रदेश की जनता अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जवाबदेही और कार्रवाई चाहती है। सरकार को युवाओं, किसानों और आम जनता के सवालों का जवाब देना होगा।

Created On :   22 Sept 2026 3:20 PM IST

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