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मोहन यादव सरकार के शिक्षा सुधार: सरकारी स्कूलों से लेकर प्राइवेट स्कूलों तक बदले कई नियम

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मध्य प्रदेश में स्कूल शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कई बड़े फैसले लिए हैं। सरकार का फोकस सिर्फ नए स्कूल बनाने पर नहीं, बल्कि सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने, बच्चों को रोजगार से जोड़ने, पढ़ाई छोड़ चुके छात्रों को वापस स्कूल लाने और निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने पर भी है। इसके साथ ही अतिथि शिक्षकों को राहत देने और छात्रों को भारतीय इतिहास से जोड़ने के लिए भी कई अहम कदम उठाए गए हैं। आइए जानते हैं शिक्षा के क्षेत्र में हुए बड़े बदलाव।
सरकारी स्कूलों को मिलेगा नया रूप
सरकार का सबसे बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट सांदीपनि विद्यालय योजना है। इसके तहत पहले से चल रहे सीएम राइज स्कूलों को नए स्वरूप में विकसित किया जा रहा है। इन स्कूलों में आधुनिक कक्षाएं, स्मार्ट क्लास, विज्ञान और कंप्यूटर लैब, खेल सुविधाएं, लाइब्रेरी और बेहतर पढ़ाई का माहौल तैयार किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि सरकारी स्कूल भी निजी स्कूलों की तरह आधुनिक और सुविधाओं से भरपूर बनें, ताकि हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिल सके।
अब पढ़ाई के साथ रोजगार की भी तैयारी
सरकार ने हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी के छात्रों के लिए पढ़ाई को रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। अब कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन और दूसरे रोजगार से जुड़े विषयों का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद सिर्फ नौकरी पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि खुद का काम शुरू करने के लिए भी तैयार हो सकेंगे।
प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर सख्ती
अक्सर शिकायत मिलती थी कि कई निजी स्कूल अभिभावकों पर तय दुकानों से किताबें, यूनिफॉर्म और दूसरी सामग्री खरीदने का दबाव बनाते हैं। साथ ही मनमाने तरीके से फीस भी बढ़ा देते हैं। इन शिकायतों को देखते हुए सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं। अब ऐसा करने वाले स्कूलों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसका मकसद अभिभावकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम करना है।
जो बच्चे स्कूल छोड़ चुके, उन्हें फिर मिलेगी पढ़ाई
कई बच्चे आर्थिक या पारिवारिक कारणों से पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं। ऐसे बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार ने 'शिक्षा घर योजना' को मंजूरी दी है। इस योजना के जरिए स्कूल से दूर हो चुके बच्चों तक शिक्षा पहुंचाने और उन्हें फिर से पढ़ाई की मुख्यधारा में लाने की कोशिश की जाएगी।
ड्रॉपआउट घटाने और इतिहास से जोड़ने पर जोर
सरकार का दावा है कि प्राथमिक स्तर पर स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में बड़ी कमी आई है और ड्रॉपआउट दर शून्य तक पहुंची है। इसके साथ ही छात्रों को भारत के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने के लिए पाठ्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य की जीवनी शामिल करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि नई पीढ़ी अपने इतिहास और संस्कृति को बेहतर ढंग से जान सके।
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अतिथि शिक्षकों को मिली बड़ी राहत
सरकार ने अतिथि शिक्षकों के हितों का भी ध्यान रखा है। उन्हें 13 आकस्मिक अवकाश, मातृत्व अवकाश, वार्षिक स्थानांतरण जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इसके अलावा नियमित शिक्षक भर्ती में अतिथि शिक्षकों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी किया गया है। इससे लंबे समय से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों को भविष्य में बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की कोशिश
इन सभी फैसलों से साफ है कि सरकार स्कूल शिक्षा को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहती। आधुनिक स्कूल, रोजगार से जुड़ी पढ़ाई, निजी स्कूलों पर नियंत्रण, ड्रॉपआउट रोकने की पहल और शिक्षकों के हितों की सुरक्षा जैसे कदम शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। आने वाले समय में इन योजनाओं का असर छात्रों, अभिभावकों और पूरे शिक्षा तंत्र पर देखने को मिल सकता है।
Created On :   18 July 2026 4:54 PM IST













