दिल्ली हाईकोर्ट : 2018 सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम: दिल्ली हाईकोर्ट ने सीआईसी के आदेश के खिलाफ अपील पर आदेश सुरक्षित रखा

July 22nd, 2022

डिजिटल डेस्क,नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को चुनौती देने वाली एक अपील पर फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की नियुक्ति के संबंध में 12 दिसंबर, 2018 को हुई सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक का विवरण देने से इनकार कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद के साथ मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपील पर आदेश सुरक्षित रख लिया।30 मार्च को, दिल्ली उच्च न्यायालय ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें कॉलेजियम की बैठक के विवरण से इनकार किया गया था।

याचिका में सीआईसी के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें बैठक के बारे में सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की याचिका को खारिज कर दिया गया था, जिसे अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। पिछली सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अंजलि भारद्वाज की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण पेश हुए।

कॉलेजियम के विवरण की मांग करते हुए, याचिकाकर्ता ने 26 फरवरी, 2019 को आरटीआई आवेदन दायर किया था। हालांकि, याचिकाकर्ता को सूचित किया गया था कि मांगी गई जानकारी को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी (एफएए) द्वारा उचित नहीं माना गया है और इसलिए प्रासंगिक नहीं है।

याचिका में शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश मदन लोकुर के पहले के उद्धरण का उल्लेख किया गया है, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के 12 दिसंबर, 2018 को जस्टिस प्रदीप नंदराजोग और जस्टिस राजेंद्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने के प्रस्ताव को सार्वजनिक नहीं किए जाने पर निराशा व्यक्त की थी।

12 दिसंबर, 2018 के कॉलेजियम के फैसले के विरोध में, जिसमें जस्टिस लोकुर एक हिस्सा थे, कॉलेजियम ने बाद में न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत करने की सिफारिश की।

फिलहाल याचिका में कहा गया है, 12 दिसंबर, 2018 को तत्कालीन कॉलेजियम ने कुछ निर्णय लिए। हालांकि, न्यायालय के शीतकालीन अवकाश के हस्तक्षेप के बीच आवश्यक परामर्श नहीं किया जा सका और यह पूरा नहीं किया जा सका। जब तक कोर्ट फिर से खोला गया, तब तक कॉलेजियम की संरचना में बदलाव आ गया था। 5/6 जनवरी 2019 को व्यापक विचार-विमर्श के बाद, नवगठित कॉलेजियम ने इस मामले पर नए सिरे से विचार करना और उपलब्ध अतिरिक्त सामग्री के आलोक में प्रस्तावों पर विचार करना उचित समझा।

 

(आईएएनएस)

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