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एआईसीटीई ने यूनिवर्सिटी पर छोड़ा एग्जाम का निर्णय

एआईसीटीई ने यूनिवर्सिटी पर छोड़ा एग्जाम का निर्णय

डिजिटल डेस्क, नागपुर। राज्य में अंतिम वर्ष की परीक्षा रद्द करने की घोषणा और उसके विरोध के कारण विद्यार्थी दुविधा में हैं। बैकलॉग के विद्यार्थियों को लेकर अब तक निर्णय नहीं आया है। विद्यार्थियों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस संबंध में शिकायतों की झड़ी लगा दी है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) को कई शिकायतें भेजी गई हैं। बढ़ती शिकायतों को देखते हुए एआईसीटीई ने सभी संस्थाओं के प्राचार्यों और प्रमुखों के नाम पत्र जारी किया है कि वे अपने विद्यार्थियों को सूचित करें कि परीक्षा संबंधी जितनी भी शिकायतें या सुझाव हैं, वे अपने विश्वविद्यालय से करें। विश्वविद्यालय के प्राधिकरण इस पर आवश्यक निर्णय लें।

एआईसीटीई के अनुसार उन्होंने केंद्र और यूजीसी के दिशानिर्देशों को सभी तकनीकी शिक्षा संस्थानों तक पहुंचा दी है, लेकिन परीक्षा से जुड़े फैसले करने का अधिकार विश्वविद्यालय को है। उल्लेखनीय है कि 8 मई को उच्च शिक्षा मंत्री उदय सामंत ने राज्य में केवल अंतिम वर्ष की परीक्षा लेकर शेष सभी सेमिस्टर के विद्यार्थियों को पास करने की घोषणा की थी। विश्वविद्यालयों को इस संबंध में निर्देश भी जारी किए गए। 31 मई को मुख्यमंत्री ने अंतिम वर्ष की परीक्षा रद्द करने का घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि पिछले सेमिस्टर में विद्यार्थियों को जितने अंक दिए गए, उसका औसत निकाल कर अंतिम सेमिस्टर का मूल्यांकन होगा। जो इस रिजल्ट से संतुष्ट नहीं होंगे, वे बाद में परीक्षा दे सकते हैं। अभाविप तथा अन्य पक्षों की ओर से इस निर्णय का विरोध किया जा रहा है। अंतिम वर्ष की परीक्षा रद्द करने की घोषणा से उत्पन्न हुई दुविधा के बीच राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय अपनी मैनेजमेंट काउंसिल और एकेडमिक काउंसिल की विशेष बैठक बुला कर चर्चा करने की तैयारी कर रहा है। प्राधिकरण के सदस्यों ने प्रभारी कुलगुरु डॉ. मुरलीधर चांदेकर को पत्र लिख कर यह मांग की है।
 

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